World Environment Day 2021 : वन क्षेत्र घटा न पर्यावरण को हानि, फिर भी बिगड़ी उत्तराखंड की रैंकिंग

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  


न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 05 Jun 2021 01:19 PM IST

सार

जानकार ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड राज्य में मुख्य वजह रसोई गैस के अधिकतम इस्तेमाल को मानते हैं। पिछले एक साल में रसोई गैस पर लोगों की निर्भरता बढ़ी है।

रैंकिंग में पांचवें पायदान से 13वें स्थान पर खिसक गई
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

ख़बर सुनें

उत्तराखंड के वन क्षेत्र में न तो कोई कमी आई और न ही पर्यावरण को कोई बड़ी हानि पहुंची, इसके बावजूद राज्य वन प्रबंधन एवं थलीय जीवन सुरक्षा यानी वन एवं पर्यावरण की रैंकिंग में पांचवें पायदान से 13वें स्थान पर खिसक गई।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इसकी एक मात्र बड़ी वजह वन्यजीव अपराध हैं। राज्य संरक्षित वन क्षेत्र में 2019 में वन्यजीवों के अवैध शिकार के केवल 16 मामले थे, लेकिन 2020 में अवैध शिकार अपराधों में लगभग चार गुना की वृद्धि हुई। वन्यजीव अपराध के मामले बढ़कर 63 हो गए। इस कारण उत्तराखंड के अंक 95 से गिरकर 64 पर पहुंच गए।

ऊर्जा और कानून व्यवस्था में नंबर वन
जानकार ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड राज्य में मुख्य वजह रसोई गैस के अधिकतम इस्तेमाल को मानते हैं। पिछले एक साल में रसोई गैस पर लोगों की निर्भरता बढ़ी है। इससे राज्य स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा के लक्ष्य में पूरे देश में पहले स्थान पर रहा। 2019 की तुलना में यह बड़ी छलांग रही, क्योंकि तब उत्तराखंड राज्य 78 अंकों के साथ देश में नवें स्थान पर था। अब 100 अंकों के साथ राज्य की देश में पहली रैंक है। कानून व्यवस्था के मामले में भी उत्तराखंड की रैंकिंग देश में पहले स्थान पर रही। शांति, न्याय एवं सशक्त संस्थान के लक्ष्य को साधने में राज्य ने महज एक अंक का सुधार किया, लेकिन उसकी रैंकिंग दूसरे से पहले पायदान पर पहुंच गई।

कोरोना से अर्थव्यवस्था पर बड़ी मार
सतत विकास लक्ष्यों में शामिल उत्कृष्ट कार्य व आर्थिक विकास में उत्तराखंड की रैंकिंग छठे स्थान आठवें स्थान पर पहुंच गई। इस खराब रैंकिंग की वजह कोविड-19 महामारी को माना जा रहा है। कोविडकाल में राज्य की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा। शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल के मुताबिक कोरोना के हालात ने राज्य की आय के प्रमुख संसाधनों को नुकसान पहुंचाया। राज्य की आय का प्रमुख स्रोत जीएसटी है। इसके लिए सभी राज्यों के 14 प्रतिशत हिस्सेदारी का तय है। इस व्यवस्था में उपभोक्ता राज्यों को फायदा हुआ। उत्तराखंड और पंजाब जैसे मैन्युफैक्चरिंग राज्य नुकसान में है। सतत विकास लक्ष्य में यह वित्तीय हानि भी प्रतिबिंबित हुई है।

कल्याणकारी योजनाओं से सुधरी रैंकिंग
सतत विकास लक्ष्यों की रैंकिंग ने ये संकेत दिए कि उत्तराखंड में पिछले एक साल में गरीबी और कुपोषण में कमी आई और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ। क्वालिटी एजुकेशन, उपभोग एवं उत्पादन के क्षेत्र में भी राज्य की रैंकिंग में सुधार आया। जानकारों का मानना है कि ये सब कल्याणकारी योजनाओं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, गरीबी उन्मूलन से जुड़े कार्यक्रमों की वंचित वर्ग तक पहुंच के कारण संभव हो सका।

दूसरे राज्यों का खराब प्रदर्शन
सतत विकास लक्ष्यों की ओवरआल रैंकिंग में उत्तराखंड की लंबी छलांग की एक प्रमुख वजह दूसरे राज्यों के कमजोर प्रदर्शन को भी माना गया। जिन लक्ष्यों में कुछ राज्यों ने खराब प्रदर्शन किया, उसका लाभ उत्तराखंड व अन्य अन्य राज्यों को हुआ।

विस्तार

उत्तराखंड के वन क्षेत्र में न तो कोई कमी आई और न ही पर्यावरण को कोई बड़ी हानि पहुंची, इसके बावजूद राज्य वन प्रबंधन एवं थलीय जीवन सुरक्षा यानी वन एवं पर्यावरण की रैंकिंग में पांचवें पायदान से 13वें स्थान पर खिसक गई।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इसकी एक मात्र बड़ी वजह वन्यजीव अपराध हैं। राज्य संरक्षित वन क्षेत्र में 2019 में वन्यजीवों के अवैध शिकार के केवल 16 मामले थे, लेकिन 2020 में अवैध शिकार अपराधों में लगभग चार गुना की वृद्धि हुई। वन्यजीव अपराध के मामले बढ़कर 63 हो गए। इस कारण उत्तराखंड के अंक 95 से गिरकर 64 पर पहुंच गए।

ऊर्जा और कानून व्यवस्था में नंबर वन

जानकार ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड राज्य में मुख्य वजह रसोई गैस के अधिकतम इस्तेमाल को मानते हैं। पिछले एक साल में रसोई गैस पर लोगों की निर्भरता बढ़ी है। इससे राज्य स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा के लक्ष्य में पूरे देश में पहले स्थान पर रहा। 2019 की तुलना में यह बड़ी छलांग रही, क्योंकि तब उत्तराखंड राज्य 78 अंकों के साथ देश में नवें स्थान पर था। अब 100 अंकों के साथ राज्य की देश में पहली रैंक है। कानून व्यवस्था के मामले में भी उत्तराखंड की रैंकिंग देश में पहले स्थान पर रही। शांति, न्याय एवं सशक्त संस्थान के लक्ष्य को साधने में राज्य ने महज एक अंक का सुधार किया, लेकिन उसकी रैंकिंग दूसरे से पहले पायदान पर पहुंच गई।

कोरोना से अर्थव्यवस्था पर बड़ी मार

सतत विकास लक्ष्यों में शामिल उत्कृष्ट कार्य व आर्थिक विकास में उत्तराखंड की रैंकिंग छठे स्थान आठवें स्थान पर पहुंच गई। इस खराब रैंकिंग की वजह कोविड-19 महामारी को माना जा रहा है। कोविडकाल में राज्य की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा। शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल के मुताबिक कोरोना के हालात ने राज्य की आय के प्रमुख संसाधनों को नुकसान पहुंचाया। राज्य की आय का प्रमुख स्रोत जीएसटी है। इसके लिए सभी राज्यों के 14 प्रतिशत हिस्सेदारी का तय है। इस व्यवस्था में उपभोक्ता राज्यों को फायदा हुआ। उत्तराखंड और पंजाब जैसे मैन्युफैक्चरिंग राज्य नुकसान में है। सतत विकास लक्ष्य में यह वित्तीय हानि भी प्रतिबिंबित हुई है।

कल्याणकारी योजनाओं से सुधरी रैंकिंग

सतत विकास लक्ष्यों की रैंकिंग ने ये संकेत दिए कि उत्तराखंड में पिछले एक साल में गरीबी और कुपोषण में कमी आई और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ। क्वालिटी एजुकेशन, उपभोग एवं उत्पादन के क्षेत्र में भी राज्य की रैंकिंग में सुधार आया। जानकारों का मानना है कि ये सब कल्याणकारी योजनाओं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, गरीबी उन्मूलन से जुड़े कार्यक्रमों की वंचित वर्ग तक पहुंच के कारण संभव हो सका।

दूसरे राज्यों का खराब प्रदर्शन

सतत विकास लक्ष्यों की ओवरआल रैंकिंग में उत्तराखंड की लंबी छलांग की एक प्रमुख वजह दूसरे राज्यों के कमजोर प्रदर्शन को भी माना गया। जिन लक्ष्यों में कुछ राज्यों ने खराब प्रदर्शन किया, उसका लाभ उत्तराखंड व अन्य अन्य राज्यों को हुआ।



Source link

Author: riteshkucc01

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *