Opinion: क्या यह मध्य प्रदेश भाजपा की राजनीति में तूफान के संकेत हैं

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राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जब हार के लिए पार्टी के जयचंदों को जिम्मेदार ठहराया तो स्वाभाविक तौर पर यह अनुमान लगाया जाने लगा कि प्रदेश भाजपा की राजनीति में कोई तूफान आने वाले दिनों में आ सकता है.

Source: News18Hindi
Last updated on: May 3, 2021, 9:29 PM IST

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दमोह विधानसभा सीट के औपचारिक नतीजों के ऐलान से पहले केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल के ट्वीट के एक शब्द ने सभी को चौंका दिया. पटेल ने लिखा कि हम जीते नहीं, पर सीखे बहुत. इसके आगे सवालिया निशान था. स्वाभाविक तौर पर कई सवाल भी मौजूदा राजनीतिक स्थितियों पर उठने लगे. राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जब हार के लिए पार्टी के जयचंदों को जिम्मेदार ठहराया तो स्वाभाविक तौर पर यह अनुमान लगाया जाने लगा कि प्रदेश भाजपा की राजनीति में कोई तूफान आने वाले दिनों में आ सकता है.

पटेल के निशाने पर आखिर कौन मुख्यमंत्री या मलैया?

दमोह विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की हार सत्रह हजार से अधिक वोटों से हुई है. उपचुनाव में इतने बड़े अंतर की हार भाजपा के दिग्गज नेताओं के लिए चौंकाने वाली है. दमोह लोकसभा सीट से सांसद, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल हैं. पटेल की राजनीतिक धारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अलग चलती है. दमोह का उपचुनाव पटेल की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ था. चुनाव नतीजों के बाद पटेल द्वारा किए गए ट्वीट में कई राजनीतिक संदेश छुपे हुए हैं. पटेल ने नतीजों के बाद लिखा कि – दमोह चुनाव परिणाम ने भविष्य की चुनौतियों, षड्यंत्रों और कार्यप्रणाली में सुधार के स्पष्ट संकेत दिए हैं. पटेल के ट्वीट से पहले पराजित पार्टी उम्मीदवार राहुल लोधी ने हार का ठीकरा पूर्व मंत्री जयंत मलैया और उनके परिवार पर फोड़ दिया. लोधी ने कहा कि मलैया के घर के पोलिंग सेंटर पर भी भाजपा को वोट नहीं मिले. प्रह्लाद पटेल के ट्वीट से एक बात पूरी तरह से स्पष्ट हो जाती है कि उन्हें कमजोर करने के लिए ही उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार राहुल लोधी को षड्यंत्र के तहत हराया गया. भविष्य की चुनौती शायद खुद पटेल अपने लिए मान रहे हैं. षड्यंत्र किस स्तर पर किया गया? जयंत मलैया, पार्टी अध्यक्ष वीडी शर्मा, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव या फिर खुद मुख्यमंत्री चौहान ने हार की स्क्रिप्ट लिखी? वैसे मुख्यमंत्री चौहान की छवि भाजपा को मजबूती प्रदान करने वाले मुख्यमंत्री की है. उनके खाते में कई चुनाव, उपचुनाव जीतने का श्रेय है.

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा हार में देख रहे हैं जयचंदों की भूमिका

राज्य के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी की हार पर ट्वीट किया – “दमोह नहीं हारे हैं हम, छले गए छलछन्दों से, इस बार लड़ाई हारे हैं हम, अपने घर के जयचंदों से.” मिश्रा हार के पीछे किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं मान रहे हैं. उनका ट्वीट कई लोगों की ओर इशारा कर रहा है. पटेल और डॉ. मिश्रा के मामले में एक बात समान है. दोनों ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोधी माने जाते हैं. ऐसा माना जा रहा है कि दमोह विधानसभा उपचुनाव की हार के बहाने विरोधी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान नवंबर 2005 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं. वर्ष 2018 में पार्टी की पराजय के बाद वे पंद्रह माह मुख्यमंत्री पद से दूर रहे थे. पिछले साल मार्च में कांग्रेस के बाइस विधायकों के पार्टी बदल लेने के कारण भाजपा की राज्य की सत्ता में वापसी हुई. कोरोना का संक्रमण शुरू हो जाने के कारण पार्टी चौहान का कोई विकल्प नहीं ढूंढ़ पाई. चौहान को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पंद्रह साल पूरे होने आ रहे हैं. इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मुख्यधारा से बाहर हो गए हैं. जो अभी मुख्यधारा में हैं, उनमें नेतृत्व को लेकर बेचैनी साफ देखी जा सकती है. इनमें कैलाश विजयवर्गीय और अजय विश्नोई के नाम भी शामिल हैं. बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटों में आए उछाल का कोई इनाम विजयवर्गीय को मिल सकता है. विजयवर्गीय बंगाल के प्रभारी महासचिव हैं.

बड़े अंतर की हार कॉडर की नाराजगी का प्रतीक

दमोह में भारतीय जनता पार्टी की हार पर प्रत्याशी राहुल लोधी द्वारा कार्यवाही की मांग पर पूर्व मंत्री जयंत मलैया चुप नहीं रहे. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी ने गलत उम्मीदवार का चयन किया. बड़े अंतर की हार को मलैया सामान्य हार नहीं मानते. उन्होंने कहा कि बड़ी हार किसी नेता के कारण नहीं हो सकती. यह सिर्फ वोटर ही दे सकता है. जाहिर है दमोह उपचुनाव के बहाने मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी लड़ाई तेज होती दिखाई दे रही है. माना यह जा रहा है मलैया के बहाने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है. असंतुष्टों का नेतृत्व केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल करते दिखाई दे रहे हैं. दमोह की हार पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारा ध्यान कोविड महामारी से निपटने की ओर था. पार्टी में उठे तूफान पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की कोई प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है. पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि दमोह में पूरा कॉडर नेतृत्व से नाराज है. 2018 की हार भी कॉडर की नाराजगी के कारण हुई थी. इस बार पहले से ज्यादा ताकत से कार्यकर्ताओं ने अपना संदेश नेतृत्व को दिया है. कार्यकर्ता राहुल लोधी को पार्टी में लेने का विरोध कर रहा था. लोधी का पार्टी में प्रवेश प्रह्लाद पटेल के प्रयासों का नतीजा है. पटेल हार का जवाब देने के उत्सुक भी नजर आ रहे हैं. पार्टी उम्मीदवार जब काउंटिंग में लगातार पिछड़ रहे थे तब उन्होंने ट्वीट कर कहा हम जीते नहीं पर सीखे बहुत. अगले ट्वीट की आखिरी लाइन में उन्होंने लिखा- विद्वेष रहित कार्यप्रणाली से इनका समाधान खोजेंगे.(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)


ब्लॉगर के बारे में

दिनेश गुप्ता

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं. देश के तमाम बड़े संस्थानों के साथ आपका जुड़ाव रहा है.

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First published: May 3, 2021, 9:28 PM IST





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Author: riteshkucc01

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