Coronavirus: क्या है लॉन्ग कोविड और कैसे इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ा रहा बुरा असर, लक्षणों को ऐसे पहचानें


कोरोना संक्रमण के ज्यादातर मामले 3 से 4 सप्ताह में हल हो जाते हैं लेकिन अधिकतर कोविड-19 मरीजों में लंबे समय तक कोविड रहता है. लंबे समय से कोविड-19 के शिकार लोगों पर मानसिक रूप से बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है. यह कई हफ्तों तक रह सकता है और रिकवरी को भी प्रभावित करता है. लॉन्ग कोविड की हालांकि कोई वैज्ञानिक परिभाषा नहीं है. दरअसल कोविड से ठीक होने के बाद भी लक्षणों का लॉन्ग टर्म अनुभव ही लॉन्ग कोविड कहा जा सकता है.

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि लक्षण उन लोगों पर भी स्ट्राइक कर सकता है जिन्हें हल्का कोविड है. पहले की स्टडीज से भी यह पता चला है कि लॉन्ग कोविड की उपस्थिति उन लक्षणों से भी निर्धारित की जा सकती है जो मरीज में अक्सर संक्रमण के पहले सप्ताह में विकसित होते हैं. यहां हम आपको कुछ सबसे कॉमन लॉन्ग कोविड लक्षणों के बारे में बता रहे हैं

थकान

वे लोग जो कोविड के शिकार हुए हैं उन्हें दूसरों के मुकाबले थकान बहुत ज्यादा रहती है. थकान उन लोगों को भी महसूस हो सकती है जिनमे कविड के हल्के लक्षण मिले हैं. वहीं कोरोना संक्रमित होने के बाद थकान और थकावट को ठीक होने में सबसे अधिक समय लगता है. इसलिए, शरीर के लिए पर्याप्त आराम करना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही लिक्विड डाइट लेना आवश्यक है. कोरोना संक्रमण से उबरन के लिए एक अच्छा आहार लें और ठीक होने के बाद ही काम पर जाएं ऐसा करने से मामला और बिगड़ जाएगा।

मांसपेशियों में दर्द

लॉन्ग कोविड मरीज अक्सर मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द और कमजोरी की शिकायत करते हैं. कुछ कोविड मरीजों में मांसपेशियों में दर्द के साथ ही बॉडी पेन भी हो सकता है. दरअसल  ऐसा वायरस से मांसपेशियों के तंतुओं को नुकसान और शरीर में असामान्य ऊतक टूटने के कारण होता है.

दिल को नुकसान

लॉन्ग कोविड मरीजों में आंतों, किडनी, फेफड़ों और दिल को नुकसान पहुंच सकता है. इनमें रिकवरी के बाद डिप्रेशन, बैचेनी के मामले भी देखने को मिल रहे हैं.

सांस लेने में तकलीफ

सांस लेने में तकलीफ, या सांस लेते समय किसी भी तरह के दर्द या परेशानी का अनुभव होना कोविड के लक्षणों के खराब होने का संकेत हो सकता है. यह लंबे समय तक भी बना रह सकता है और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है. चूंकि COVID-19 फेफड़े की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है और यह छाती और फेफड़ों के मार्ग पर अतिरिक्त दबाव डालता है, इसलिए सांस की तकलीफ और सीने में दर्द आमतौर पर अनुभव किया जा सकता है. ऐसे में एक बीमार, तनावपूर्ण शरीर को जरूरी कार्यों को करने में अधिक समय लगता है और यह खासतौर पर किसी ऐसे व्यक्ति के लिए बुरा हो सकता है जो पुराने फेफड़ों के संक्रमण और श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं.

ऑर्गन्स पर असर

लॉन्ग कोविड युवाओं और स्व्स्थ लोगों के ऑर्गन्स को भी डैमेज कर सकता है. हाल ही में हुई एक स्टडी में भी यह बात कही गई है. स्टडी के मुताबिक, कोरोना संक्रमित लो- रिस्क ग्रुप वाले मरीजों के 4 महीने बाद कई आर्गन्स को नुकसान मिला है.

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Author: riteshkucc01

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