हिमाचल: पोषण ट्रैकर एप का ढंग से प्रशिक्षण नहीं, आंगनबाड़ी वर्करों के हाथ खड़े

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सार

पोषण ट्रैकर एप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की बीमारी को दूर करने का दावा किया गया है। इस एप में छह साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी हर जानकारी रखी जाएगी।

नीलम जसवाल, प्रदेश अध्यक्ष आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पोषण ट्रैकर एप का सही ढंग से प्रशिक्षण नहीं मिलने से हाथ खड़े हो गए हैं। कई क्षेत्रों में एप चलाने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है तो कुछ जगह सिर्फ फोन कॉल के माध्यम से एप चलाने की विधि बताई गई है। अब इस प्रशिक्षण के आधार पर पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन में रिकार्ड ऑनलाइन करना पड़ रहा है। अधूरी तैयारी के साथ प्रदेश में शुरू की गई केंद्र सरकार की इस योजना ने कार्यकर्ताओं की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने से कई जगह समय से डाटा अपलोड नहीं हो पा रहा है। एप में सिर्फ अंग्रेजी भाषा भी बाधक बन गई है। ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगने पर मानदेय कटने का खतरा है। रिचार्ज राशि भी देरी से मिल रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चार मार्च 2021 को राज्य सरकारों को आदेश जारी कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को 15 मार्च तक पोषण ट्रैकर मोबाइल एप डाउनलोड करने का काम पूरा करने को कहा था।

अब एप पर लाभार्थियों की जानकारी अपलोड होने के बाद पोषक आहार दिया जा रहा है। इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने से कई लाभार्थियों को योजना से अब वंचित होना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार लाभार्थियों की एंट्री करने के बाद खुद ही डिलीट हो रही है। लाभार्थी की जानकारी और फोन नंबर अपडेट करने पर एक ओटीपी आता है, उसे प्राप्त करने में देरी होने पर पूरी प्रक्रिया को दोबारा करना पड़ता है।

रिचार्ज राशि प्राप्त होने में देरी के कारण समस्याएं खड़ी हो रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इस एप को बंद कर पुरानी व्यवस्था से ही कार्य करने की मांग की है। उधर, महिला एवं बाल विकास की निदेशक राखिल काहलो ने कहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ जल्द ही बैठक की जा रही है। इस बैठक में इनकी समस्याओं को दूर किया जाएगा।

बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण दूर करने का दावा
पोषण ट्रैकर एप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की बीमारी को दूर करने का दावा किया गया है। इस एप में छह साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी हर जानकारी रखी जाएगी। पोषण ट्रैकर एप शुरू करने का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्र, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर निगरानी रखना, उससे संबंधित सभी सेवा नागरिकों तक आसानी से देना है। एप के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं और बच्चों के पूर्ण लाभार्थी प्रबंध गतिविधियों को आसानी से प्रदान करवाया जाएगा। एप के माध्यम से कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों की भी मैपिंग की जाएगी।

अंग्रेजी भाषा में उलझ रहे कई कार्यकर्त्ता
पोषण ट्रैकर एप पूरी तरह से अंग्रेजी भाषा में है। आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी रिकॉर्ड स्थानीय भाषाओं में हैं। इसका स्थानीय भाषाओं में होना न केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए आवश्यक है, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए प्रगति की निगरानी करने के लिए भी आवश्यक है। आईसीडीएस में स्थानीय भाषाओं में रिकॉर्ड होना चाहिए। अंग्रेजी का ज्ञान न होने से कई कार्यकर्ता इसमें उलझ रहे हैं। – नीलम जसवाल, प्रदेश अध्यक्ष आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन

घटिया किस्म के दिए हैं मोबाइल
इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने से कई जिलों में एप को चलाने में परेशानियां पेश आ रही हैं। पोषण ट्रैकर एप के लिए दिए गए मोबाइल बेहद घटिया किस्म के हैं। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा घोटाला है। कार्यकर्ता मोबाइल फोन के रखरखाव व डेटा के लिए भी अपनी जेब से भुगतान कर रहे हैं। डेटा प्लान के लिए आवंटित प्रतिमाह 200 रुपये की राशि अपर्याप्त है। वर्कर्स को हर दिन बहुत सारी फोटो अपलोड करने के लिए कहा जाता है। – विजेंद्र मेहरा, प्रदेश अध्यक्ष सीटू

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पोषण ट्रैकर एप का सही ढंग से प्रशिक्षण नहीं मिलने से हाथ खड़े हो गए हैं। कई क्षेत्रों में एप चलाने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है तो कुछ जगह सिर्फ फोन कॉल के माध्यम से एप चलाने की विधि बताई गई है। अब इस प्रशिक्षण के आधार पर पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन में रिकार्ड ऑनलाइन करना पड़ रहा है। अधूरी तैयारी के साथ प्रदेश में शुरू की गई केंद्र सरकार की इस योजना ने कार्यकर्ताओं की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने से कई जगह समय से डाटा अपलोड नहीं हो पा रहा है। एप में सिर्फ अंग्रेजी भाषा भी बाधक बन गई है। ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगने पर मानदेय कटने का खतरा है। रिचार्ज राशि भी देरी से मिल रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चार मार्च 2021 को राज्य सरकारों को आदेश जारी कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को 15 मार्च तक पोषण ट्रैकर मोबाइल एप डाउनलोड करने का काम पूरा करने को कहा था।

अब एप पर लाभार्थियों की जानकारी अपलोड होने के बाद पोषक आहार दिया जा रहा है। इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने से कई लाभार्थियों को योजना से अब वंचित होना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार लाभार्थियों की एंट्री करने के बाद खुद ही डिलीट हो रही है। लाभार्थी की जानकारी और फोन नंबर अपडेट करने पर एक ओटीपी आता है, उसे प्राप्त करने में देरी होने पर पूरी प्रक्रिया को दोबारा करना पड़ता है।

रिचार्ज राशि प्राप्त होने में देरी के कारण समस्याएं खड़ी हो रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इस एप को बंद कर पुरानी व्यवस्था से ही कार्य करने की मांग की है। उधर, महिला एवं बाल विकास की निदेशक राखिल काहलो ने कहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ जल्द ही बैठक की जा रही है। इस बैठक में इनकी समस्याओं को दूर किया जाएगा।

बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण दूर करने का दावा

पोषण ट्रैकर एप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की बीमारी को दूर करने का दावा किया गया है। इस एप में छह साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी हर जानकारी रखी जाएगी। पोषण ट्रैकर एप शुरू करने का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्र, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर निगरानी रखना, उससे संबंधित सभी सेवा नागरिकों तक आसानी से देना है। एप के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं और बच्चों के पूर्ण लाभार्थी प्रबंध गतिविधियों को आसानी से प्रदान करवाया जाएगा। एप के माध्यम से कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों की भी मैपिंग की जाएगी।

अंग्रेजी भाषा में उलझ रहे कई कार्यकर्त्ता

पोषण ट्रैकर एप पूरी तरह से अंग्रेजी भाषा में है। आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी रिकॉर्ड स्थानीय भाषाओं में हैं। इसका स्थानीय भाषाओं में होना न केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए आवश्यक है, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए प्रगति की निगरानी करने के लिए भी आवश्यक है। आईसीडीएस में स्थानीय भाषाओं में रिकॉर्ड होना चाहिए। अंग्रेजी का ज्ञान न होने से कई कार्यकर्ता इसमें उलझ रहे हैं। – नीलम जसवाल, प्रदेश अध्यक्ष आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन

घटिया किस्म के दिए हैं मोबाइल

इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने से कई जिलों में एप को चलाने में परेशानियां पेश आ रही हैं। पोषण ट्रैकर एप के लिए दिए गए मोबाइल बेहद घटिया किस्म के हैं। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा घोटाला है। कार्यकर्ता मोबाइल फोन के रखरखाव व डेटा के लिए भी अपनी जेब से भुगतान कर रहे हैं। डेटा प्लान के लिए आवंटित प्रतिमाह 200 रुपये की राशि अपर्याप्त है। वर्कर्स को हर दिन बहुत सारी फोटो अपलोड करने के लिए कहा जाता है। – विजेंद्र मेहरा, प्रदेश अध्यक्ष सीटू



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Author: riteshkucc01

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