सुप्रीम कोर्ट: हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक, राज्य सरकार ने किया नवंबर तक पात्र आबादी को दूसरी खुराक भी देने का वादा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 13 Sep 2021 03:35 PM IST

सार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे राहत दे दी। हाईकोर्ट ने राज्य में कोविड की निगरानी के लिए समितियों के गठन का आदेश दिया था। इस पर शीर्ष कोर्ट ने रोक लगा दी। 
 

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिमाचल सरकार को राहत दे दी। राज्य में कोविड-19 की स्थिति की निगरानी के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला स्तरीय समितियों के गठन का आदेश दिया था, उस पर शीर्ष अदालत ने रोक लगा दी। राज्य सरकार ने शीर्ष कोर्ट में कहा कि राज्य की 18 से ज्यादा उम्र की शतप्रतिशत आबादी को हाल ही में पहला टीका लगा दिया गया है। सरकार ने वचन दिया कि नवंबर तक राज्य की पूरी वयस्क आबादी को दूसरी खुराक भी लगा दी जाएगी। 
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 7 जुलाई व 14 जुलाई के आदेशों पर रोक लगा दी। इन आदेशों में हाईकोर्ट ने जिला स्तरीय निगरानी समितियों के गठन का आदेश दिया था। इन समितियों में उपायुक्त, जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव व जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष्ज्ञ को नियुक्त किया गया था। राज्य सरकार ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इन समितियों के गठन से राज्य सरकार के अधिकारी हतोत्साहित हो रहे हैं। 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड व जस्टिस बीवी नागरथ की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया था। पीठ ने कहा कि याचिका के लंबित रहने से हाईकोर्ट को इस संबंध में अनुच्छेद 226 के तहत कोई आदेश पारित करने से नहीं रोका जा सकेगा। न्यायाधीश द्वय ने का कि जब हमने कोविड-19 पर एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया था, इसमें देश भर के डॉक्टर और विशेषज्ञ शामिल थे। लेकिन हिमाचल प्रदेश की जिला स्तरीय समितियों में वे लोग शामिल हैं जो सचिव, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उनसे क्या करने की अपेक्षा की गई है। 

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाविधक्ता अभिनव मुखर्जी ने राज्य सरकार की ओर से कहा कि हमने हाल ही में राज्य की संपूर्ण वयस्क आबादी को कोरोना रोधी टीके की पहली खुराक देने की बड़ी उपलब्धि हासिल की है और नवंबर अंत तक हम सारी आबादी को दूसरी खुराक भी दे देंगे। राज्य की कोरोना संक्रमण दर मात्र 0.7 फीसदी है। ऐसे में इन समितियों के गठन से टीकाकरण में कठिन परिश्रम कर रहे राज्य के अफसरों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें हर बुधवार को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा, जहां उन पर कई आरोप लगाए गए हैं। 

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिमाचल सरकार को राहत दे दी। राज्य में कोविड-19 की स्थिति की निगरानी के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला स्तरीय समितियों के गठन का आदेश दिया था, उस पर शीर्ष अदालत ने रोक लगा दी। राज्य सरकार ने शीर्ष कोर्ट में कहा कि राज्य की 18 से ज्यादा उम्र की शतप्रतिशत आबादी को हाल ही में पहला टीका लगा दिया गया है। सरकार ने वचन दिया कि नवंबर तक राज्य की पूरी वयस्क आबादी को दूसरी खुराक भी लगा दी जाएगी। 

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 7 जुलाई व 14 जुलाई के आदेशों पर रोक लगा दी। इन आदेशों में हाईकोर्ट ने जिला स्तरीय निगरानी समितियों के गठन का आदेश दिया था। इन समितियों में उपायुक्त, जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव व जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष्ज्ञ को नियुक्त किया गया था। राज्य सरकार ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इन समितियों के गठन से राज्य सरकार के अधिकारी हतोत्साहित हो रहे हैं। 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड व जस्टिस बीवी नागरथ की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया था। पीठ ने कहा कि याचिका के लंबित रहने से हाईकोर्ट को इस संबंध में अनुच्छेद 226 के तहत कोई आदेश पारित करने से नहीं रोका जा सकेगा। न्यायाधीश द्वय ने का कि जब हमने कोविड-19 पर एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया था, इसमें देश भर के डॉक्टर और विशेषज्ञ शामिल थे। लेकिन हिमाचल प्रदेश की जिला स्तरीय समितियों में वे लोग शामिल हैं जो सचिव, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उनसे क्या करने की अपेक्षा की गई है। 

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाविधक्ता अभिनव मुखर्जी ने राज्य सरकार की ओर से कहा कि हमने हाल ही में राज्य की संपूर्ण वयस्क आबादी को कोरोना रोधी टीके की पहली खुराक देने की बड़ी उपलब्धि हासिल की है और नवंबर अंत तक हम सारी आबादी को दूसरी खुराक भी दे देंगे। राज्य की कोरोना संक्रमण दर मात्र 0.7 फीसदी है। ऐसे में इन समितियों के गठन से टीकाकरण में कठिन परिश्रम कर रहे राज्य के अफसरों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें हर बुधवार को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा, जहां उन पर कई आरोप लगाए गए हैं। 



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Author: riteshkucc01

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