सुप्रीम कोर्ट की नसीहत: वकील हड़ताल कर किसी अदालत में बाधा नहीं डाल सकते, राजस्थान बार एसो. को अवमानना नोटिस

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 12 Oct 2021 09:09 PM IST

सार

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अदालतों में कामकाज सही ढंग से हो सके, यह सुनिश्चित करना वकीलों का कर्तव्य है। वे इसमें बाधा पैदा नहीं कर सकते।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी बार एसोसिएशन द्वारा हड़ताल या बहिष्कार की अपील के कारण वकीलों का कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने से मना करना ‘गैरपेशेवराना’ और ‘अनुचित’ है क्योंकि वे कोर्ट की कार्यवाही को बाधित कर मुवक्किलों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते।

शीर्ष अदालत ने ये भी कहा कि एक वकील कोर्ट का अधिकारी होता है और समाज में उसका एक विशेष स्थान होता है। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने 27 सितंबर, 2021 को राजस्थान हाईकोर्ट के वकीलों के हड़ताल पर जाने संबंधित केस की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारियों को नोटिस भेजकर ये पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।।

पीठ ने कहा, किसी वकील के लिए कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार करना गैर पेशवराना और अनुचित है, भले ही ये कदम उसने बार एसोसिएशन या बार काउंसिल के हड़ताल या बहिष्कार की अपील के कारण ही क्यों न उठाया हो। एक वकील कोर्ट का अधिकारी होता है जो समाज में विशेष स्थान का लाभ उठाता है। कोर्ट की कार्यवाही सुचारू रूप से चले ये सुनिश्चित करना वकीलों का कर्तव्य और जिम्मेदारी है, वे अपने मुवक्किलों के प्रति भी जिम्मेदार होते हैं और हड़ताल से न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप होता है।

राजस्थान हाईकोर्ट के एक कोर्ट का बहिष्कार
पीठ ने कहा, शीर्ष कोर्ट द्वारा पहले के फैसलों में वकीलों के हड़ताल के बारे जताई गई चिंताओं और बनाए गए कानूनों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। शीर्ष अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की उस अर्जी पर भी विचार किया जिसमें उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि बीसीआई ने राजस्थान बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट में सिर्फ एक कोर्ट के बहिष्कार की अपील की गई थी। इसपर पीठ ने कहा कि ये भी स्वीकार्य नहीं है।

बायकॉट से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरा
पीठ ने कहा, सिर्फ एक कोर्ट का बहिष्कार न्यायपालिका की स्वतंत्रता को चोट पहुंचाता है और जिस जज की कोर्ट का बहिष्कार किया गया है उसपर दबाव डालने का काम करता है। ये न्यायपालिका के मनोबल को प्रभावित कर सकता है। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को राजस्थान हाईकोर्ट के महारजिस्ट्रार के जरिये बार एसोसिएशन को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है। महारजिस्ट्रार को ये भी निर्देश दिया गया है कि नोटिस बार के सभी संबंधित अधिकारियों को समय से मिल जाए ये सुनिश्चित करें। मामले में अगली सुनवाई 25 अक्तूबर को होगी।

25 अक्तूबर को आगे सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए? मामले की अगली सुनवाई 25 अक्तूबर को होगी।

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी बार एसोसिएशन द्वारा हड़ताल या बहिष्कार की अपील के कारण वकीलों का कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने से मना करना ‘गैरपेशेवराना’ और ‘अनुचित’ है क्योंकि वे कोर्ट की कार्यवाही को बाधित कर मुवक्किलों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते।

शीर्ष अदालत ने ये भी कहा कि एक वकील कोर्ट का अधिकारी होता है और समाज में उसका एक विशेष स्थान होता है। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने 27 सितंबर, 2021 को राजस्थान हाईकोर्ट के वकीलों के हड़ताल पर जाने संबंधित केस की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारियों को नोटिस भेजकर ये पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।।

पीठ ने कहा, किसी वकील के लिए कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार करना गैर पेशवराना और अनुचित है, भले ही ये कदम उसने बार एसोसिएशन या बार काउंसिल के हड़ताल या बहिष्कार की अपील के कारण ही क्यों न उठाया हो। एक वकील कोर्ट का अधिकारी होता है जो समाज में विशेष स्थान का लाभ उठाता है। कोर्ट की कार्यवाही सुचारू रूप से चले ये सुनिश्चित करना वकीलों का कर्तव्य और जिम्मेदारी है, वे अपने मुवक्किलों के प्रति भी जिम्मेदार होते हैं और हड़ताल से न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप होता है।

राजस्थान हाईकोर्ट के एक कोर्ट का बहिष्कार

पीठ ने कहा, शीर्ष कोर्ट द्वारा पहले के फैसलों में वकीलों के हड़ताल के बारे जताई गई चिंताओं और बनाए गए कानूनों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। शीर्ष अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की उस अर्जी पर भी विचार किया जिसमें उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि बीसीआई ने राजस्थान बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट में सिर्फ एक कोर्ट के बहिष्कार की अपील की गई थी। इसपर पीठ ने कहा कि ये भी स्वीकार्य नहीं है।

बायकॉट से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरा

पीठ ने कहा, सिर्फ एक कोर्ट का बहिष्कार न्यायपालिका की स्वतंत्रता को चोट पहुंचाता है और जिस जज की कोर्ट का बहिष्कार किया गया है उसपर दबाव डालने का काम करता है। ये न्यायपालिका के मनोबल को प्रभावित कर सकता है। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को राजस्थान हाईकोर्ट के महारजिस्ट्रार के जरिये बार एसोसिएशन को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है। महारजिस्ट्रार को ये भी निर्देश दिया गया है कि नोटिस बार के सभी संबंधित अधिकारियों को समय से मिल जाए ये सुनिश्चित करें। मामले में अगली सुनवाई 25 अक्तूबर को होगी।

25 अक्तूबर को आगे सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए? मामले की अगली सुनवाई 25 अक्तूबर को होगी।



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Author: riteshkucc01

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