लखनऊ समेत नौ महानगरों में दो-दो अध्यक्ष बनाएगी कांग्रेस, हाईकमान को भेजा गया प्रस्ताव


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 12 Dec 2020 08:23 PM IST

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा।
– फोटो : amar ujala

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कांग्रेस लखनऊ और कानपुर समेत नौ महानगरों में दो-दो अध्यक्ष बनाएगी। इस बारे में पार्टी हाईकमान को प्रस्ताव भेज दिया गया है। हालांकि पार्टी के अंदर ही इस फैसले के खिलाफ विरोध के स्वर उठने शुरू हो गए हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि एक शहर में दो अध्यक्ष होने से काम होने के बजाय विवाद बढ़ेंगे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक यूपी की जिम्मेदारी संभाल रहे राष्ट्रीय सचिवों के माध्यम से यह प्रस्ताव हाईकमान को भेजा गया है। पहले चरण में लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, बरेली, आगरा, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और वाराणसी महानगरों में दो अध्यक्ष बनाए जाएंगे। इसके लिए महानगर को वार्डों के आधार पर दो हिस्सों में बांटा जाएगा।

पार्टी का मानना है कि महानगरों में एक अध्यक्ष से काम नहीं चल पा रहा है। दो अध्यक्ष होने से सांगठनिक गतिविधियां तेज होंगी। बूथ स्तर तक संगठन को पहुंचाने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस प्रस्ताव के बाबत अभी कोई भी नेता सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं। पार्टी के अंदर ही एक धड़ा इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा है।

इस धड़े में शामिल नेताओं का कहना है कि यूथ व महिला कांग्रेस और एनएसयूआई संगठन को प्रदेश में चार-चार हिस्सों में बांटा गया, पर इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। एक ही शहर में दो अध्यक्ष होने से अंतरविरोध बढ़ेंगे। आपसी खींचतान बढ़ने से काम करना मुश्किल होगा। पार्टी संगठन के लिहाज से इसके नतीजे सुखद नहीं होंगे।

कांग्रेस लखनऊ और कानपुर समेत नौ महानगरों में दो-दो अध्यक्ष बनाएगी। इस बारे में पार्टी हाईकमान को प्रस्ताव भेज दिया गया है। हालांकि पार्टी के अंदर ही इस फैसले के खिलाफ विरोध के स्वर उठने शुरू हो गए हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि एक शहर में दो अध्यक्ष होने से काम होने के बजाय विवाद बढ़ेंगे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक यूपी की जिम्मेदारी संभाल रहे राष्ट्रीय सचिवों के माध्यम से यह प्रस्ताव हाईकमान को भेजा गया है। पहले चरण में लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, बरेली, आगरा, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और वाराणसी महानगरों में दो अध्यक्ष बनाए जाएंगे। इसके लिए महानगर को वार्डों के आधार पर दो हिस्सों में बांटा जाएगा।

पार्टी का मानना है कि महानगरों में एक अध्यक्ष से काम नहीं चल पा रहा है। दो अध्यक्ष होने से सांगठनिक गतिविधियां तेज होंगी। बूथ स्तर तक संगठन को पहुंचाने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस प्रस्ताव के बाबत अभी कोई भी नेता सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं। पार्टी के अंदर ही एक धड़ा इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा है।

इस धड़े में शामिल नेताओं का कहना है कि यूथ व महिला कांग्रेस और एनएसयूआई संगठन को प्रदेश में चार-चार हिस्सों में बांटा गया, पर इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। एक ही शहर में दो अध्यक्ष होने से अंतरविरोध बढ़ेंगे। आपसी खींचतान बढ़ने से काम करना मुश्किल होगा। पार्टी संगठन के लिहाज से इसके नतीजे सुखद नहीं होंगे।



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Author: riteshkucc01

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