राजधानी, वंदे भारत एक्स. से ज्यादा महाबोधि, एनई स्पेशल का किराया 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  


ख़बर सुनें

कोरोना काल में यात्रियों की जेब ढीली करने के साथ ही रेलवे ने कमाई का अलग ही तरीका अख्तियार कर रखा है। पिछले वर्ष लगे लॉकडाउन के पूर्व जो नियमित ट्रेनें यात्रियों को उनके गंतव्य तक छोड़ रही थी, उन ट्रेनों को पूजा स्पेशल के नाम पर चलाकर यात्रियों से लगातार ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। दिल्ली-हावड़ा रूट की ही बात करें तो प्रयागराज से गुजरने वाली तमाम पूजा स्पेशल ट्रेनों का किराया संबंधित रूट पर चलने वाली राजधानी स्पेशल, वंदे भारत स्पेशल आदि ट्रेनों से कहीं ज्यादा है। 

प्रयागराज से कानपुर सेंट्रल का शुक्रवार 16 जुलाई को वंदे भारत के चेयर कार में 575, डिबूगढ़ राजधानी के थर्ड एसी में 840 रुपये किराया बुधवार की शाम चार बजे दर्शाया जा रहा था। जबकि इसी रूट पर चलने वाली महाबोधि, नार्थ ईस्ट, मंडुवाडीह-नई दिल्ली स्पेशल से जिन यात्रियों को थर्ड एसी से कानपुर जाना है उन्हें 1100 रुपये इस यात्रा के लिए चुकाने होंगे।

इन ट्रेनों के स्लीपर कोच में भी प्रयागराज से कानपुर का किराया 415 रुपये लिया जा रहा है, जबकि प्रयागराज, शिवगंगा आदि ट्रेनों में स्लीपर का किराया 175 रुपये ही है। यही स्थिति दिल्ली जाने वाली ट्रेनों की भी है। ब्रह्मपुत्र मेल में दिल्ली के लिए थर्ड एसी में 960, प्रयागराज में 1020, हमसफर में 1155, राजधानी में 1205 और महाबोधि में 1295 रुपये यात्रियों को चुकाने पड़ रहे हैं। पिछले एक वर्ष से यात्रियों को इसी तरह से बढ़ा हुआ किराया देकर सफर करना पड़ रहा है और रेलवे की भी इससे काफी आय बढ़ी है। उधर जिन ट्रेनों में किराया कम है उसमें प्रतीक्षा सूची ज्यादा काफी लंबी हो गई है।

स्पेशल को पूजा स्पेशल ट्रेन बनाकर रेलवे वसूल रहा लंबा किराया
0 पिछले वर्ष लगे अनलॉक से ही देश भर में चल रही सभी ट्रेनें स्पेशल के रूप में चल रही हैं। अधिकांश ट्रेनों के नंबर के आगे रेलवे ने जीरो लगा दिया है। उदाहरण के लिए प्रयागराज स्पेशल, संगम स्पेशल, राजधानी स्पेशल, नार्थ ईस्ट स्पेशल आदि। इस बीच बहुत सी ट्रेनों को पूजा स्पेशल में तब्दील कर दिया गया है। जो ट्रेनें पूजा स्पेशल के रूप में चल रही हैं उनका किराया स्पेशल ट्रेन के मुकाबले काफी ज्यादा है। जबकि पूजा स्पेशल के रूप में जिनका संचालन हो रहा है वह  पिछले वर्ष लगे लॉकडाउन के पूर्व नियमित ट्रेन के रूप में चल रही थी। 

प्रयागराज से कानपुर के बीच तमाम ट्रेनों के किराये में अंतर
ट्रेन का नाम    स्लीपर    थर्ड एसी

डिब्रुगढ़ राजधानी  ——-    840
प्रयागराज स्पेशल   175      555
शिवगंगा स्पेशल     175      555
मंडुवाडीह-नई दिल्ली  415    1100
लिच्छवी पूजा स्पेशल     145       505
महाबोधि पूजा स्पेशल     415       1100
नार्थ ईस्ट पूजा स्पेशल    415        1100
वंदे भारत स्पेशल   ——      575 ( चेयरकार)
चौरीचौरा स्पेशल    145      505

वरिष्ठ नागरिकों को भी नहीं मिल रही किराये में रियायत
अनलॉक के बाद शुरू हुई ट्रेनों में वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली किराये में छूट खत्म कर दी गई है। इसके अलावा कई अन्य कोटे के तहत में दी जाने वाली छूट भी रेलवे बोर्ड नहीं दे रहा है। इसे लेकर अवकाश प्राप्त शिक्षक आरएम शुक्ला ने कई वरिष्ठ नागरिकों के हस्ताक्षर वाला पत्र रेल मंत्री को पिछले माह भेजा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कोरोना के पूर्व में दी जाने वाली छूट की मांग की है।

स्पेशल ट्रेन के किराये का निर्धारण रेलवे बोर्ड द्वारा जारी किया जाता है। इसका सर्कुलर भी जारी हो चुका है। जोनल रेलवे को किराया तय करने का कोई अधिकार नहीं है।  डॉ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआर।

विस्तार

कोरोना काल में यात्रियों की जेब ढीली करने के साथ ही रेलवे ने कमाई का अलग ही तरीका अख्तियार कर रखा है। पिछले वर्ष लगे लॉकडाउन के पूर्व जो नियमित ट्रेनें यात्रियों को उनके गंतव्य तक छोड़ रही थी, उन ट्रेनों को पूजा स्पेशल के नाम पर चलाकर यात्रियों से लगातार ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। दिल्ली-हावड़ा रूट की ही बात करें तो प्रयागराज से गुजरने वाली तमाम पूजा स्पेशल ट्रेनों का किराया संबंधित रूट पर चलने वाली राजधानी स्पेशल, वंदे भारत स्पेशल आदि ट्रेनों से कहीं ज्यादा है। 

प्रयागराज से कानपुर सेंट्रल का शुक्रवार 16 जुलाई को वंदे भारत के चेयर कार में 575, डिबूगढ़ राजधानी के थर्ड एसी में 840 रुपये किराया बुधवार की शाम चार बजे दर्शाया जा रहा था। जबकि इसी रूट पर चलने वाली महाबोधि, नार्थ ईस्ट, मंडुवाडीह-नई दिल्ली स्पेशल से जिन यात्रियों को थर्ड एसी से कानपुर जाना है उन्हें 1100 रुपये इस यात्रा के लिए चुकाने होंगे।

इन ट्रेनों के स्लीपर कोच में भी प्रयागराज से कानपुर का किराया 415 रुपये लिया जा रहा है, जबकि प्रयागराज, शिवगंगा आदि ट्रेनों में स्लीपर का किराया 175 रुपये ही है। यही स्थिति दिल्ली जाने वाली ट्रेनों की भी है। ब्रह्मपुत्र मेल में दिल्ली के लिए थर्ड एसी में 960, प्रयागराज में 1020, हमसफर में 1155, राजधानी में 1205 और महाबोधि में 1295 रुपये यात्रियों को चुकाने पड़ रहे हैं। पिछले एक वर्ष से यात्रियों को इसी तरह से बढ़ा हुआ किराया देकर सफर करना पड़ रहा है और रेलवे की भी इससे काफी आय बढ़ी है। उधर जिन ट्रेनों में किराया कम है उसमें प्रतीक्षा सूची ज्यादा काफी लंबी हो गई है।

स्पेशल को पूजा स्पेशल ट्रेन बनाकर रेलवे वसूल रहा लंबा किराया

0 पिछले वर्ष लगे अनलॉक से ही देश भर में चल रही सभी ट्रेनें स्पेशल के रूप में चल रही हैं। अधिकांश ट्रेनों के नंबर के आगे रेलवे ने जीरो लगा दिया है। उदाहरण के लिए प्रयागराज स्पेशल, संगम स्पेशल, राजधानी स्पेशल, नार्थ ईस्ट स्पेशल आदि। इस बीच बहुत सी ट्रेनों को पूजा स्पेशल में तब्दील कर दिया गया है। जो ट्रेनें पूजा स्पेशल के रूप में चल रही हैं उनका किराया स्पेशल ट्रेन के मुकाबले काफी ज्यादा है। जबकि पूजा स्पेशल के रूप में जिनका संचालन हो रहा है वह  पिछले वर्ष लगे लॉकडाउन के पूर्व नियमित ट्रेन के रूप में चल रही थी। 

प्रयागराज से कानपुर के बीच तमाम ट्रेनों के किराये में अंतर

ट्रेन का नाम    स्लीपर    थर्ड एसी


डिब्रुगढ़ राजधानी  ——-    840

प्रयागराज स्पेशल   175      555

शिवगंगा स्पेशल     175      555

मंडुवाडीह-नई दिल्ली  415    1100

लिच्छवी पूजा स्पेशल     145       505

महाबोधि पूजा स्पेशल     415       1100

नार्थ ईस्ट पूजा स्पेशल    415        1100

वंदे भारत स्पेशल   ——      575 ( चेयरकार)

चौरीचौरा स्पेशल    145      505

वरिष्ठ नागरिकों को भी नहीं मिल रही किराये में रियायत

अनलॉक के बाद शुरू हुई ट्रेनों में वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली किराये में छूट खत्म कर दी गई है। इसके अलावा कई अन्य कोटे के तहत में दी जाने वाली छूट भी रेलवे बोर्ड नहीं दे रहा है। इसे लेकर अवकाश प्राप्त शिक्षक आरएम शुक्ला ने कई वरिष्ठ नागरिकों के हस्ताक्षर वाला पत्र रेल मंत्री को पिछले माह भेजा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कोरोना के पूर्व में दी जाने वाली छूट की मांग की है।

स्पेशल ट्रेन के किराये का निर्धारण रेलवे बोर्ड द्वारा जारी किया जाता है। इसका सर्कुलर भी जारी हो चुका है। जोनल रेलवे को किराया तय करने का कोई अधिकार नहीं है।  डॉ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआर।



Source link

Author: riteshkucc01

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *