मध्य प्रदेश: कोरोना महामारी के बीच जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल छठे दिन भी जारी

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कोरोना महामारी के चलते मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा 24 घंटे पूरे होने के बाद भी जूनियर डॉक्टर काम पर वापस नहीं आए हैं। इसके बाद अब सरकार जूडा के खिलाफ एक्शन के मूड में आ गई है। मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर ने बताया, मेडिकल कॉलेज की सीट छोड़ने वाले जूनियर डॉक्टर को बांड के अनुसार, 10 से 30 लाख रुपए तक देने होंगे।।

निशांत वरवड़े ने बताया, यूजी और पीजी में नीट से सलेक्टेड स्टूडेंट्स को मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में मैरिट के आधार पर एडमिशन के लिए सरकार द्वारा मध्यप्रदेश चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम-2018 एवं संशोधन 19 जून, 2019 के अनुसार, पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

सरकार ने मेडिकल कॉलेज के डीन को इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए हैं गौरतलब है कि एक दिन पहले जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा 468 जूनियर डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद अब नई चेतावनी जारी की गई है।

उपरोक्त नियम की कण्डिका-15 (1) (ख) के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के बाद अभ्यर्थी द्वारा सीट छोड़ने पर उस पर बांड की शर्तें लागू होंगी। आयुक्त वरवड़े बताया, इसके अनुसार 10 लाख रुपये और 30 लाख रुपये (प्रवेश वर्ष 2020) स्वशासी संस्था को देना होगा। प्राइवेट मेडिकल एवं प्राइवेट डेंटल कॉलेज की सीट छोड़ने पर संबंधित कॉलेज में संचालित पाठ्यक्रम में पूरा शैक्षणिक शुल्क देना होगा।

वरवड़े ने बताया कि उपरोक्त नियम वर्ष 2018 से प्रवेशित सभी विद्यार्थियों पर प्रभावशील है। आयुक्त ने कहा कि सभी डीन को निर्देश दे दिए हैं। इस संबंध में संभागायुक्त अपने स्तर पर कार्रवाई करेंगे। लगातार डॉक्टरों की सुविधाएं के लिए कदम उठा रहे हैं। अब कोर्ट के आदेश अनुसार कार्रवाई की जा रही है। अस्पतालों में स्टाफ बढ़ाने के लिए हम पहले से ही कार्रवाई कर रहे हैं।

कोरोना महामारी के चलते मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा 24 घंटे पूरे होने के बाद भी जूनियर डॉक्टर काम पर वापस नहीं आए हैं। इसके बाद अब सरकार जूडा के खिलाफ एक्शन के मूड में आ गई है। मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर ने बताया, मेडिकल कॉलेज की सीट छोड़ने वाले जूनियर डॉक्टर को बांड के अनुसार, 10 से 30 लाख रुपए तक देने होंगे।।

निशांत वरवड़े ने बताया, यूजी और पीजी में नीट से सलेक्टेड स्टूडेंट्स को मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में मैरिट के आधार पर एडमिशन के लिए सरकार द्वारा मध्यप्रदेश चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम-2018 एवं संशोधन 19 जून, 2019 के अनुसार, पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

सरकार ने मेडिकल कॉलेज के डीन को इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए हैं गौरतलब है कि एक दिन पहले जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा 468 जूनियर डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद अब नई चेतावनी जारी की गई है।

उपरोक्त नियम की कण्डिका-15 (1) (ख) के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के बाद अभ्यर्थी द्वारा सीट छोड़ने पर उस पर बांड की शर्तें लागू होंगी। आयुक्त वरवड़े बताया, इसके अनुसार 10 लाख रुपये और 30 लाख रुपये (प्रवेश वर्ष 2020) स्वशासी संस्था को देना होगा। प्राइवेट मेडिकल एवं प्राइवेट डेंटल कॉलेज की सीट छोड़ने पर संबंधित कॉलेज में संचालित पाठ्यक्रम में पूरा शैक्षणिक शुल्क देना होगा।

वरवड़े ने बताया कि उपरोक्त नियम वर्ष 2018 से प्रवेशित सभी विद्यार्थियों पर प्रभावशील है। आयुक्त ने कहा कि सभी डीन को निर्देश दे दिए हैं। इस संबंध में संभागायुक्त अपने स्तर पर कार्रवाई करेंगे। लगातार डॉक्टरों की सुविधाएं के लिए कदम उठा रहे हैं। अब कोर्ट के आदेश अनुसार कार्रवाई की जा रही है। अस्पतालों में स्टाफ बढ़ाने के लिए हम पहले से ही कार्रवाई कर रहे हैं।



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Author: riteshkucc01

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