भूकंप: शिमला में डोली धरती, रिक्टर पैमाने पर 3.6 रही तीव्रता, दहशत में घरों से निकल आए लोग

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अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 15 Jul 2021 08:26 PM IST

सार

भूकंप का झटका महसूस होने पर कई लोग अपने घरों से बाहर निकले। बता दें हिमाचल की राजधानी शिमला भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील भागों में आती है। 

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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार शाम करीब 7:47 बजे भूकंप का झटका महसूस किया गया। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.6 रही। भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर 10 किलोमीटर गहराई पर था।

हालांकि भूकंप के किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप का झटका महसूस होने पर कई लोग अपने घरों से बाहर निकले। बता दें हिमाचल की राजधानी शिमला भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील भागों में आती है। 

हिमाचल भूकंप की दृष्टि से सिस्मिक जोन चार और पांच में आता है। कांगड़ा, चंबा, लाहौल, कुल्लू और मंडी भूकंप की दृष्टि से सबसे अति संवेदनशील क्षेत्र हैं। ये क्षेत्र सिस्मिक जोन पांच में आते हैं जबकि प्रदेश के अन्य क्षेत्र जोन चार के तहत आते हैं। 

1905 के भूकंप में 20 हजार से ज्यादा गईं थी जानें
कांगड़ा में 4 अप्रैल, 1905 की अलसुबह आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20 हजार से ज्यादा इंसानी जानें चली गई थीं। भूकंप से एक लाख के करीब इमारतें तहस-नहस हो गई थीं, जबकि 53 हजार से ज्यादा मवेशी भी भूकंप की भेंट चढ़ गए थे।

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार शाम करीब 7:47 बजे भूकंप का झटका महसूस किया गया। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.6 रही। भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर 10 किलोमीटर गहराई पर था।

हालांकि भूकंप के किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप का झटका महसूस होने पर कई लोग अपने घरों से बाहर निकले। बता दें हिमाचल की राजधानी शिमला भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील भागों में आती है। 

हिमाचल भूकंप की दृष्टि से सिस्मिक जोन चार और पांच में आता है। कांगड़ा, चंबा, लाहौल, कुल्लू और मंडी भूकंप की दृष्टि से सबसे अति संवेदनशील क्षेत्र हैं। ये क्षेत्र सिस्मिक जोन पांच में आते हैं जबकि प्रदेश के अन्य क्षेत्र जोन चार के तहत आते हैं। 

1905 के भूकंप में 20 हजार से ज्यादा गईं थी जानें

कांगड़ा में 4 अप्रैल, 1905 की अलसुबह आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20 हजार से ज्यादा इंसानी जानें चली गई थीं। भूकंप से एक लाख के करीब इमारतें तहस-नहस हो गई थीं, जबकि 53 हजार से ज्यादा मवेशी भी भूकंप की भेंट चढ़ गए थे।



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Author: riteshkucc01

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