पंजाब में बिजली संकट: तलवंडी साबो और लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट के एक-एक यूनिट बंद, सप्लाई में कमी

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: पंजाब ब्‍यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 07:42 PM IST

सार

गुरुवार को दिन के समय बिजली की मांग 9464 मेगावाट दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम को बाहर से करीब 5000 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। पावरकॉम की खुद की बिजली आपूर्ति 3929 मेगावाट रही।

पंजाब में बिजली संकट गहराया।
– फोटो : फाइल फोटो

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थर्मलों में कोयले का संकट झेल रहे पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) के लिए अब उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करना बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। गुरुवार को तलवंडी साबो और लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट के एक-एक यूनिट दोबारा से बंद पड़ गए। जिस कारण बिजली की सप्लाई में बड़ी कमी आ गई।

पावरकॉम ने बढ़ी मांग को बाहर से बिजली खरीद कर काफी हद तक पूरा करने की कोशिश की। हालांकि अब भी जहां किसानों को दो घंटे कम बिजली सप्लाई मिली, वहीं गांवों में भी दो घंटे के कट लगे। गुरुवार को रोपड़ में दो, लहरा मुहब्बत में डेढ़ दिनों का, तलवंडी साबो में करीब दो दिनों का, राजपुरा में दो दिनों से ज्यादा का और गोइंदवाल में मात्र एक दिन का कोयला शेष था। कोयला संकट के कारण पावरकॉम बाहर से महंगी बिजली खरीद रहा है।

यह भी पढ़ें – बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में बढ़ोतरी पर रार: केंद्र के समर्थन में आए कैप्टन, जाखड़-परगट ने उठाए सवाल 

बावजूद इसके मांग पूरी न होने के कारण लोगों को बिजली कट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में गुरुवार को बिजली उत्पादन में उस समय और कटौती हो गई, जब तकनीकी कारणों के चलते तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का और लहरा मुहब्बत का 210 मेगावाट का यूनिट बंद हो गया। इससे बिजली उत्पादन में 770 मेगावाट की कटौती हो गई। जिससे पावरकॉम की मुश्किलें बढ़ गईं।

गुरुवार को दिन के समय बिजली की मांग 9464 मेगावाट दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम को बाहर से करीब 5000 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। पावरकॉम की खुद की बिजली आपूर्ति 3929 मेगावाट रही। इसमें अपने थर्मलों से पावरकाम को 944 मेगावाट, हाइडलों से 481 मेगावाट, सोलर प्रोजेक्टों से 182 मेगावाट और प्राइवेट थर्मलों से 2330 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई। बाहर से खरीद के बावजूद मांग पूरी न होने के कारण किसानों को छह घंटे के बजाय चार घंटे बिजली सप्लाई मिली। 

तलवंडी साबो के 660-660 मेगावाट के दो यूनिट, रोपड़ का 210 मेगावाट का एक यूनिट और लहरा मुहब्बत का 210 व 250 मेगावाट के दो यूनिट बंद पड़े हैं। इन यूनिटों के बंद होने से पावरकॉम की मुसीबतें बढ़ी हैं। बिजली उत्पादन में बड़ी कमी दर्ज की गई है।

विस्तार

थर्मलों में कोयले का संकट झेल रहे पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) के लिए अब उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करना बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। गुरुवार को तलवंडी साबो और लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट के एक-एक यूनिट दोबारा से बंद पड़ गए। जिस कारण बिजली की सप्लाई में बड़ी कमी आ गई।

पावरकॉम ने बढ़ी मांग को बाहर से बिजली खरीद कर काफी हद तक पूरा करने की कोशिश की। हालांकि अब भी जहां किसानों को दो घंटे कम बिजली सप्लाई मिली, वहीं गांवों में भी दो घंटे के कट लगे। गुरुवार को रोपड़ में दो, लहरा मुहब्बत में डेढ़ दिनों का, तलवंडी साबो में करीब दो दिनों का, राजपुरा में दो दिनों से ज्यादा का और गोइंदवाल में मात्र एक दिन का कोयला शेष था। कोयला संकट के कारण पावरकॉम बाहर से महंगी बिजली खरीद रहा है।

यह भी पढ़ें – बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में बढ़ोतरी पर रार: केंद्र के समर्थन में आए कैप्टन, जाखड़-परगट ने उठाए सवाल 

बावजूद इसके मांग पूरी न होने के कारण लोगों को बिजली कट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में गुरुवार को बिजली उत्पादन में उस समय और कटौती हो गई, जब तकनीकी कारणों के चलते तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का और लहरा मुहब्बत का 210 मेगावाट का यूनिट बंद हो गया। इससे बिजली उत्पादन में 770 मेगावाट की कटौती हो गई। जिससे पावरकॉम की मुश्किलें बढ़ गईं।

गुरुवार को दिन के समय बिजली की मांग 9464 मेगावाट दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम को बाहर से करीब 5000 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। पावरकॉम की खुद की बिजली आपूर्ति 3929 मेगावाट रही। इसमें अपने थर्मलों से पावरकाम को 944 मेगावाट, हाइडलों से 481 मेगावाट, सोलर प्रोजेक्टों से 182 मेगावाट और प्राइवेट थर्मलों से 2330 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई। बाहर से खरीद के बावजूद मांग पूरी न होने के कारण किसानों को छह घंटे के बजाय चार घंटे बिजली सप्लाई मिली। 

तलवंडी साबो के 660-660 मेगावाट के दो यूनिट, रोपड़ का 210 मेगावाट का एक यूनिट और लहरा मुहब्बत का 210 व 250 मेगावाट के दो यूनिट बंद पड़े हैं। इन यूनिटों के बंद होने से पावरकॉम की मुसीबतें बढ़ी हैं। बिजली उत्पादन में बड़ी कमी दर्ज की गई है।



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Author: riteshkucc01

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