नवरात्र 2021: अष्टमी पर उत्तराखंड के घर-घर व मंदिरों में कन्या पूजन की धूम, ये है शुभ मुहूर्त

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 13 Oct 2021 10:47 AM IST

सार

नवमी तिथि 13 अक्तूबर को रात 8:07 बजे से 14 अक्टूबर की शाम 6:52 बजे तक रहेगी। नवमी तिथि को मनाने वाले लोग 14 अक्टूबर को व्रत रखेंगे।

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बुधवार को अष्टमी पर घर-घर व मंदिरों में कन्या पूजन किया जा रहा है। भक्त मां की साधना में लीन हैं। अष्टमी तिथि 12 अक्टूबर को रात 9:47 बजे से 13 अक्टूबर की रात 8:06 बजे तक रहेगी। अष्टमी तिथि को मनाने वाले भक्त व्रत उदया तिथि में 13 अक्तूबर को रख रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त  04:48 बजे सुबह से 05:36 शाम तक है।

अमृत काल:
आचार्य सुशांत राज ने बताया कि इस दिन अमृत काल सुबह 3:23 बजे सुबह 4:56 बजे तक और ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:48 बजे से सुबह 5:36 बजे तक है। नवमी तिथि 13 अक्तूबर को रात 8:07 बजे से 14 अक्टूबर की शाम 6:52 बजे तक रहेगी। नवमी तिथि को मनाने वाले लोग 14 अक्टूबर को व्रत रखेंगे। पूजा का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा।

इसके अलावा पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 से दोपहर 12:35 बजे तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:49 बजे से सुबह 5:37 बजे तक है। अष्टमी तिथि के समाप्त होने के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि शुरू होने के शुरुआती 24 मिनट के समय को संधि क्षण कहा जाता है। इस वक्त मां दुर्गा की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि संधि काल में मां दुर्गा ने असुर चंड और मुंड का वध किया था।

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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने प्रदेश की खुशहाली एवं समृद्धि के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि यह पर्व हम सभी को दृढ़ता के साथ सच्चाई के मार्ग पर चलने एवं अपने जीवन से बुराइयों का समूल नाश करने की प्रेरणा देता है।

कहा है कि यह पर्व मातृ-शक्ति के सम्मान से जुड़ा है, जिसमें कन्यापूजन का विशेष महत्व है। आज बालिकाएं प्रत्येक क्षेत्र में सफलता अर्जित कर रही हैं और अपने घर, परिवार और देश का नाम रोशन कर रही हैं। इस पर्व के अवसर पर हम सभी को महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ ही उनकी शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए संकल्प लेना चाहिए।

विस्तार

बुधवार को अष्टमी पर घर-घर व मंदिरों में कन्या पूजन किया जा रहा है। भक्त मां की साधना में लीन हैं। अष्टमी तिथि 12 अक्टूबर को रात 9:47 बजे से 13 अक्टूबर की रात 8:06 बजे तक रहेगी। अष्टमी तिथि को मनाने वाले भक्त व्रत उदया तिथि में 13 अक्तूबर को रख रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त  04:48 बजे सुबह से 05:36 शाम तक है।

अमृत काल:

आचार्य सुशांत राज ने बताया कि इस दिन अमृत काल सुबह 3:23 बजे सुबह 4:56 बजे तक और ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:48 बजे से सुबह 5:36 बजे तक है। नवमी तिथि 13 अक्तूबर को रात 8:07 बजे से 14 अक्टूबर की शाम 6:52 बजे तक रहेगी। नवमी तिथि को मनाने वाले लोग 14 अक्टूबर को व्रत रखेंगे। पूजा का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा।

इसके अलावा पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 से दोपहर 12:35 बजे तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:49 बजे से सुबह 5:37 बजे तक है। अष्टमी तिथि के समाप्त होने के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि शुरू होने के शुरुआती 24 मिनट के समय को संधि क्षण कहा जाता है। इस वक्त मां दुर्गा की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि संधि काल में मां दुर्गा ने असुर चंड और मुंड का वध किया था।

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राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं दी 



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Author: riteshkucc01

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