नरेंद्र बरागटा ने जुब्बल-कोटखाई में ढहाया था कांग्रेस का 60 साल पुराना किला

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अमर उजाला नेटवर्क, रोहडू़
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 06 Jun 2021 12:34 PM IST

सार

पंचायत प्रधान से कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुंचे नरेंद्र बरागटा का राजनीतिक सफर शुरू से ही चुनौती भरा रहा। गांव में पंचायत प्रधान का चुनाव जीतने के बाद मंत्रिमंडल तक के सफर में नरेंद्र बरागटा के सामने कई चुनौतियां रहीं।

नरेंद्र बरागटा(फाइल)
– फोटो : अमर उजाला

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दिवंगत नरेंद्र बरागटा का जन्म 15 सितंबर 1952 को सूरत सिंह बरागटा व गींदा बरागटा के घर में जिला शिमला की तहसील कोटखाई डाकघर बघार गांव टहटोली में हुआ। उनका विवाह पुष्पा बरागटा के साथ हुआ। उनके दो  पुत्र चेतन व ध्रुव बरागटा हैं। पंचायत प्रधान से कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुंचे नरेंद्र बरागटा का राजनीतिक सफर शुरू से ही चुनौती भरा रहा। गांव में पंचायत प्रधान का चुनाव जीतने के बाद मंत्रिमंडल तक के सफर में नरेंद्र बरागटा के सामने कई चुनौतियां रहीं। इसी बीच बरागटा ने जुब्बल-कोटखाई में 60 साल पुराने कांग्रेस के गढ़ में जीत दर्ज कर नया इतिहास भी रचा था। नरेंद्र बरागटा ने पहला चुनाव 1993 में जुब्बल-कोटखाई से लड़ा लेकिन इस चुनाव को जीतना रामलाल ठाकुर के साथ उनके लिए बड़ी चुनौती था इसलिए हार का सामना करना पड़ा।

अगले विधानसभा चुनाव 1998 में शिमला से लड़े यहां से जीत हासिल की। साथ में बागवानी और तकनीकी शिक्षा मंत्री पद मिल गया। तीसरा विधानसभा चुनाव  2003 में जुब्बल-कोटखाई से लड़ा लेकिन इसमें कांग्रेस के रोहित ठाकुर से हार मिली। चौथा चुनाव 2007 में फिर जुब्बल कोटखाई से लड़ा जिसमें उनको जीत हासिल हुई। फिर  कैबिनेट स्तर का पद मिला। धूमल सरकार में वह एक प्रभावशाली मंत्रियों की सूची में गिने जाते थे।  पांचवां चुनाव 2012 में फिर जुब्बल-कोटखाई से लड़ा पर उसमें फिर हार गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद प्रदेश सरकार में अभी तक मुख्य सचेतक पद पर थे। प्रशासनिक अमले पर उनके तेज तरार स्वभाव के कारण पूरी पकड़ थी। खासकर बागवानी के क्षेत्र में बरागटा ने अपने कार्यकाल में नए आयाम स्थापित किए। सरकार में रहकर भी बागवानों के लिए अपनी बुलंद आवाज आखिर तक उठाते रहे। 

विस्तार

दिवंगत नरेंद्र बरागटा का जन्म 15 सितंबर 1952 को सूरत सिंह बरागटा व गींदा बरागटा के घर में जिला शिमला की तहसील कोटखाई डाकघर बघार गांव टहटोली में हुआ। उनका विवाह पुष्पा बरागटा के साथ हुआ। उनके दो  पुत्र चेतन व ध्रुव बरागटा हैं। पंचायत प्रधान से कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुंचे नरेंद्र बरागटा का राजनीतिक सफर शुरू से ही चुनौती भरा रहा। गांव में पंचायत प्रधान का चुनाव जीतने के बाद मंत्रिमंडल तक के सफर में नरेंद्र बरागटा के सामने कई चुनौतियां रहीं। इसी बीच बरागटा ने जुब्बल-कोटखाई में 60 साल पुराने कांग्रेस के गढ़ में जीत दर्ज कर नया इतिहास भी रचा था। नरेंद्र बरागटा ने पहला चुनाव 1993 में जुब्बल-कोटखाई से लड़ा लेकिन इस चुनाव को जीतना रामलाल ठाकुर के साथ उनके लिए बड़ी चुनौती था इसलिए हार का सामना करना पड़ा।

अगले विधानसभा चुनाव 1998 में शिमला से लड़े यहां से जीत हासिल की। साथ में बागवानी और तकनीकी शिक्षा मंत्री पद मिल गया। तीसरा विधानसभा चुनाव  2003 में जुब्बल-कोटखाई से लड़ा लेकिन इसमें कांग्रेस के रोहित ठाकुर से हार मिली। चौथा चुनाव 2007 में फिर जुब्बल कोटखाई से लड़ा जिसमें उनको जीत हासिल हुई। फिर  कैबिनेट स्तर का पद मिला। धूमल सरकार में वह एक प्रभावशाली मंत्रियों की सूची में गिने जाते थे।  पांचवां चुनाव 2012 में फिर जुब्बल-कोटखाई से लड़ा पर उसमें फिर हार गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद प्रदेश सरकार में अभी तक मुख्य सचेतक पद पर थे। प्रशासनिक अमले पर उनके तेज तरार स्वभाव के कारण पूरी पकड़ थी। खासकर बागवानी के क्षेत्र में बरागटा ने अपने कार्यकाल में नए आयाम स्थापित किए। सरकार में रहकर भी बागवानों के लिए अपनी बुलंद आवाज आखिर तक उठाते रहे। 



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Author: riteshkucc01

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