टोक्यो ओलंपिक: कभी बैलगाड़ी से मिट्ठी ढुलान कर कमाते थे 50 रुपये, संघर्ष ने अब पहुंचाया ओलंपिक तक

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चयन राजपूत, अमर उजाला, रुद्रपुर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 21 Jul 2021 10:14 AM IST

रुद्रपुर तराई के जिला मुख्यालय में गरीब परिवार में जन्मे मनोज सरकार टोक्यो ओलंपिक में टिकट पक्का होने के बाद राष्ट्रीय फलक पर छाए हुए हैं। लेकिन मनोज को यह मुकाम आसानी से नहीं बल्कि बेहद संघर्षों के बाद हासिल हुआ है। आर्थिक तंगी के चलते मनोज को बचपन में साइकिल में पंचर जोड़ने, खेतों में दिहाड़ी पर मटर तोड़ने और घरों में पीओपी के काम करने पड़े थे। दिलचस्प बात है कि होनहार खिलाड़ी को वर्ष 2012 में फ्रांस में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चंदे से जुटाए रुपयों से प्रतिभाग करना पड़ा था। रुद्रपुर से लखनऊ जाते समय दूरभाष पर की बातचीत में मनोज ने बताया कि बचपन के दिनों में किए गए संघर्ष को वह कभी नहीं भुला सकते हैं। उन्होंने आज जितना थोड़ा भी मुकाम हासिल किया है, वो संघर्षों की ही देन है। बचपन में दवा के ओवरडोज से उनके एक पैर ने काम करना बंद कर दिया था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते वह अच्छे डॉक्टर से पांव का इलाज नहीं करा पाए थे। उनकी मां जमुना सरकार ने मजदूरी से जुटाए रुपयों से उनको बैडमिंटन खरीदकर दिया था।



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Author: riteshkucc01

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