झारखंड: डॉक्टर ने महिला को मरा समझ थमाया डेथ सर्टिफिकेट, कफन हटाया तो चल रही थीं सांसें


न्यूज डेस्क, अमर उजाला,रांची
Updated Fri, 11 Dec 2020 10:44 PM IST

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

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हमारे समाज में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि वो बीमार मरीजों की जान बचाते हैं और उन्हें नई जिंदगी देते हैं। सोचिए कि अगर डॉक्टर ही मरीज को जबरन मृत घोषित करने के पीछे पड़ जाए तो क्या होगा? ऐसी ही एक घटना झारखंड के धनबाद जिले में सामने आई है, जहां डॉक्टर और अस्पताल जबरन एक महिला को मृत घोषित करने के पीछे पड़े थे।

अस्पताल ने जारी कर दिया मृत्यु प्रमाण पत्र

धनबाद जिले के असर्फी हॉस्पिटल में 9 दिसंबर को एक महिला ब्रेन हेमरेज का इलाज कराने आई थी। इलाज के लिए एडमिट होने के कुछ देर के बाद ही अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को बताया कि महिला की मौत हो गई है। हॉस्पिटल की ओर से महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र भी बना दिया गया। जब परिवार के लोग शव लेने आए तो देखा कि महिला की सांसें चल रही थीं।

अपनी बात पर अड़े रहे डॉक्टर

महिला को जिंदा पाकर परिवार वालों का गुस्सा अस्पताल प्रशासन पर निकलने लगा। लापरवाही की शिकायत लेकर जब वे अस्पताल प्रशासन के पास पहुंचे तो चिकित्सक जबरन महिला को मृत बताने में लग गए। परिवार के लोगों का कहना है कि हॉस्पिटल का स्टाफ यह मानने को राजी नहीं हो रहा था कि महिला की सांसें चल रही हैं।

पुलिस से शिकायत के बाद सुलझा मामला

बहुत देर बाद तंग आकर परिजनों को शिकायत लेकर पुलिस के पास जाना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल के कर्मचारियों ने देखा तो महिला वाकई में जिंदा निकली। अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। ब्रेन हेमरेज के इलाज के लिए आई महिला की हालत बिगड़ती देख पुलिस ने पहले हंगामा कर रहे परिजनों को शांत कराया। फिर महिला को इलाज के लिए शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

हमारे समाज में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि वो बीमार मरीजों की जान बचाते हैं और उन्हें नई जिंदगी देते हैं। सोचिए कि अगर डॉक्टर ही मरीज को जबरन मृत घोषित करने के पीछे पड़ जाए तो क्या होगा? ऐसी ही एक घटना झारखंड के धनबाद जिले में सामने आई है, जहां डॉक्टर और अस्पताल जबरन एक महिला को मृत घोषित करने के पीछे पड़े थे।

अस्पताल ने जारी कर दिया मृत्यु प्रमाण पत्र

धनबाद जिले के असर्फी हॉस्पिटल में 9 दिसंबर को एक महिला ब्रेन हेमरेज का इलाज कराने आई थी। इलाज के लिए एडमिट होने के कुछ देर के बाद ही अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को बताया कि महिला की मौत हो गई है। हॉस्पिटल की ओर से महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र भी बना दिया गया। जब परिवार के लोग शव लेने आए तो देखा कि महिला की सांसें चल रही थीं।

अपनी बात पर अड़े रहे डॉक्टर

महिला को जिंदा पाकर परिवार वालों का गुस्सा अस्पताल प्रशासन पर निकलने लगा। लापरवाही की शिकायत लेकर जब वे अस्पताल प्रशासन के पास पहुंचे तो चिकित्सक जबरन महिला को मृत बताने में लग गए। परिवार के लोगों का कहना है कि हॉस्पिटल का स्टाफ यह मानने को राजी नहीं हो रहा था कि महिला की सांसें चल रही हैं।

पुलिस से शिकायत के बाद सुलझा मामला

बहुत देर बाद तंग आकर परिजनों को शिकायत लेकर पुलिस के पास जाना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल के कर्मचारियों ने देखा तो महिला वाकई में जिंदा निकली। अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। ब्रेन हेमरेज के इलाज के लिए आई महिला की हालत बिगड़ती देख पुलिस ने पहले हंगामा कर रहे परिजनों को शांत कराया। फिर महिला को इलाज के लिए शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज भेज दिया।



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Author: riteshkucc01

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