जयपुर में बनेगा स्वचालित बैंक नोट प्रसंस्करण केंद्र, रिजर्व बैंक का फैसला


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करेंसी नोटों के बढ़ते प्रसार के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने जयपुर में स्वचालित बैंक नोट प्रसंस्करण केंद्र (एबीपीसी) स्थापित करने का फैसला किया है। यह केंद्र बैंकों नोटों की प्राप्ति, भंडारण और उन्हें आगे भेजने का काम करेगा।

एबीपीसी के कामकाज में करेंसी चेस्ट और बैंक शाखाओं के प्राप्त नोटों का प्रसंस्करण करना और स्वचालित तरीके से खराब नोटों को नष्ट करना भी शामिल है। रिजर्व बैंक द्वारा जयपुर में एबीपीसी की स्थापना के लिए सलाहकार की नियुक्ति को निकाले गए आग्रह प्रस्ताव (आरएफपी) से यह जानकारी मिली है।

दस्तावेज में कहा गया है कि डिजिटल भुगतान के लगातार लोकप्रिय होने के बीच नकद आज भी भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम है। डिजिटल भुगतान के साथ चलन में बैंक नोटों की संख्या भी बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर जिस तरीके से बैंक नोटों के चलन में इजाफा हो रहा है, कुछ ऐसा ही रुख भारत में भी देखा जा रहा है।

मार्च, 2001 से मार्च, 2019 के दौरान मात्रा के हिसाब से बैंक नोटों के चलन में तीन गुना का इजाफा हुआ है। आने वाले वर्षों में इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है। दस्तावेज में कहा गया है कि इसी के मद्देनजर बैंक नोटों की प्राप्ति, भंडारण, प्रसंस्करण और निस्तारण के लिए एक स्वचालित प्रणाली की जरूरत महसूस हुई है।

करेंसी नोटों के बढ़ते प्रसार के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने जयपुर में स्वचालित बैंक नोट प्रसंस्करण केंद्र (एबीपीसी) स्थापित करने का फैसला किया है। यह केंद्र बैंकों नोटों की प्राप्ति, भंडारण और उन्हें आगे भेजने का काम करेगा।

एबीपीसी के कामकाज में करेंसी चेस्ट और बैंक शाखाओं के प्राप्त नोटों का प्रसंस्करण करना और स्वचालित तरीके से खराब नोटों को नष्ट करना भी शामिल है। रिजर्व बैंक द्वारा जयपुर में एबीपीसी की स्थापना के लिए सलाहकार की नियुक्ति को निकाले गए आग्रह प्रस्ताव (आरएफपी) से यह जानकारी मिली है।

दस्तावेज में कहा गया है कि डिजिटल भुगतान के लगातार लोकप्रिय होने के बीच नकद आज भी भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम है। डिजिटल भुगतान के साथ चलन में बैंक नोटों की संख्या भी बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर जिस तरीके से बैंक नोटों के चलन में इजाफा हो रहा है, कुछ ऐसा ही रुख भारत में भी देखा जा रहा है।

मार्च, 2001 से मार्च, 2019 के दौरान मात्रा के हिसाब से बैंक नोटों के चलन में तीन गुना का इजाफा हुआ है। आने वाले वर्षों में इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है। दस्तावेज में कहा गया है कि इसी के मद्देनजर बैंक नोटों की प्राप्ति, भंडारण, प्रसंस्करण और निस्तारण के लिए एक स्वचालित प्रणाली की जरूरत महसूस हुई है।



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Author: riteshkucc01

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