जम्मू-कश्मीर: सेकेंडरी स्तर पर ड्रॉपआउट रेट में सुधार, एक वर्ष में 6.54 फीसदी कम

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jun 2021 12:04 AM IST

सार

प्रदेश में 15 वर्ष की आयु से ऊपर पढ़े-लिखे लोगों की संख्या 76.40 प्रतिशत है। हायर सेकेंडरी स्तर पर सकल नामांकन अनुपात 42.31 फीसदी है। वहीं उच्च शिक्षा 18-23 आयु वर्ग में 30.9 प्रतिशत है। उच्च शिक्षा में 18-23 आयु वर्ग में लिंग समानता सूचकांक 1.09 है जो 2019 में 1.09 ही था।

छात्र-छात्राएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
– फोटो : iStock

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जम्मू-कश्मीर में एक साल में सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में ड्रॉपआउट रेट में 6.54 प्रतिशत की कमी आई है। 2019 में सेकेंडरी स्तर पर ड्रॉपआउट रेट 24.35 फीसदी था जो 2020 में 17.81 फीसदी तक पहुंच गया है।

केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की ओर से जारी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स इंडेक्स एंड डैशबोर्ड 2020-21 की रिपोर्ट में ये आंकड़े सामने आए हैं। नीति आयोग ने वीरवार को ये रिपोर्ट जारी की है।

एसडीजी रिपोर्ट में गुणवत्ता शिक्षा के मामले में जम्मू-कश्मीर में थोड़ा सुधार हुआ है। प्रदेश में सेकेंडरी स्तर पर ड्रॉपआउट रेट कम होने के साथ 80 प्रतिशत स्कूलों में बुनियादी ढांचे के तहत बिजली, स्वच्छ जल की सुविधा है। वहीं सेकेंडरी स्तर पर 80.09 फीसदी शिक्षक प्रशिक्षित हैं। 19.7 प्रतिशत 15 वर्ष से ऊपर के दिव्यांग हैं जिन्होंने कम से कम सेकेंडरी स्तर तक की पढ़ाई की है। सेकेंडरी स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 12 है।

यह भी पढ़ें- चार साल की बच्ची की मौत: अफसरों पर बरसे फारूक अब्दुल्ला, इस घटना ने घाटी को झकझोर दिया    

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में एक साल में सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में ड्रॉपआउट रेट में 6.54 प्रतिशत की कमी आई है। 2019 में सेकेंडरी स्तर पर ड्रॉपआउट रेट 24.35 फीसदी था जो 2020 में 17.81 फीसदी तक पहुंच गया है।

केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की ओर से जारी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स इंडेक्स एंड डैशबोर्ड 2020-21 की रिपोर्ट में ये आंकड़े सामने आए हैं। नीति आयोग ने वीरवार को ये रिपोर्ट जारी की है।

एसडीजी रिपोर्ट में गुणवत्ता शिक्षा के मामले में जम्मू-कश्मीर में थोड़ा सुधार हुआ है। प्रदेश में सेकेंडरी स्तर पर ड्रॉपआउट रेट कम होने के साथ 80 प्रतिशत स्कूलों में बुनियादी ढांचे के तहत बिजली, स्वच्छ जल की सुविधा है। वहीं सेकेंडरी स्तर पर 80.09 फीसदी शिक्षक प्रशिक्षित हैं। 19.7 प्रतिशत 15 वर्ष से ऊपर के दिव्यांग हैं जिन्होंने कम से कम सेकेंडरी स्तर तक की पढ़ाई की है। सेकेंडरी स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 12 है।

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Author: riteshkucc01

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