जम्मू-कश्मीर शराब विवाद: बाहर के लोगों को शराब के ठेके देने का आरोप, विभाग ने किया इंकार

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 10 Jun 2021 06:53 PM IST

सार

जम्मू कश्मीर में 125 शराब की दुकानों पर बाहिरयों का कब्जा। स्थानीय लोगों के नाम पर लिए गए हैं ठेके।

wine
– फोटो : पिक्साबे

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें

विस्तार

नई आबकारी नीति के तहत दिए गए शराब के ठेकों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। वाइन ट्रेड एसोसिएशन ने सीधा आरोप लगाया है कि नई पालिसी के तहत जम्मू कश्मीर के बाहर के माफियाओं को ठेके दे दिए गए हैं। हालांकि इन लोगों ने जम्मू कश्मीर के नागरिकों के जरिए ठेके लिए हैं। लेकिन हकीकत यह है कि ठेके बाहर के लोगों को मिले हैं। जिससे प्रदेश में शराब माफिया सक्रिय हो गया है। उधर, विभाग ने इसे सिरे से नकारा है। विभाग का कहना है कि नियम के तहत ही ठेके दिए गए हैं।

वाइन ट्रेड एसोसिएशन के प्रधान चरणजीत सिंह का कहना है कि यहां तक एसोसिएशन ने पता कराया है। उसके मुताबिक 125 दुकानें बाहर के लोगों को दी गई हैं। हालांकि इन लोगों ने ठेके प्रदेश के नागरिकों के नाम पर लिए हैं। चार से पांच फर्म भी ऐसी हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा ठेके लिए हैं। इनमें ओबराय, त्रीमूर्ति, पूनम वाइन ट्रेड आदि शामिल हैं। यहां तक ठेके लेने के लिए फर्जी डोमीसाइल जैसे दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया है।

सिंह का कहना है कि इस नई आबकारी नीति के तहत दिए गए ठेकों की सीबीआई जांच होनी चाहिए। ताकि इसे पूरे रैकेट का भंडाफोड हो सके। वाइन ट्रेड एसोसिएशन के चेयरमैन जगदीश जसरोटिया का कहना है कि बाहरी लोगों को ठेके देने के मामले की जांच होनी चाहिए। वाइन ट्रेड एसोसिएशन ने यह भी दावा किया है कि 20 से 25 लोगों ने बोली लगाकर इसका पैसा ही जमा नहीं कराया। जिसके चलते यह वाइन शाप नहीं खुल सकी हैं।

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर शिक्षा विभाग: सीबीएसई पैटर्न पर होंगी जेके बोर्ड की 9वीं कक्षा की परीक्षाएं

जम्मू बेस्ट असेंवली मूवमेंट के प्रधान सुनील डिपंल ने मंडलायुक्त जम्मू राघव लंगा से मुलाकात की। कहा कि वार्ड नंबर 26 में 60 दुकानें खुली हैं। जिसकी एनओसी संबंधित तहसीलदारों द्वारा दी गई हैं। जबकि इसका स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है। विरोध होने के बावजूद कैसे एनओसी दी जा सकती है।मंडलायुक्त ने डिपंल को आश्वासन दिया है कि इसे लेकर बात की जाएगी।

ऐसा हरगिज नहीं हुआ

नियम के तहत ही औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ठेके दिए गए हैं। किसी बाहरी को लाइसेंस नहीं दिया गया है।– कुसूम शर्मा, डिप्टी एक्साइज कमिश्न, जेएंडके



Source link

Author: riteshkucc01

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *