जम्मू-कश्मीरः जल्द तैयार होने वाली खुशबूदार बासमती की किस्मों का ट्रायल पूरा


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 05 Dec 2020 11:13 AM IST

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

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दुनिया भर में मशहूर जम्मू-कश्मीर की बासमती के किसानाें को अब नई किस्मों का बीज देने की तैयारी है। जम्मू, सांबा और कठुआ को बासमती बेल्ट माना जाता है, जहां मुख्य रूप से 370 किस्म की बासमती उगाई जाती है।

शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट) जम्मू ने 118, 123 और 138 किस्मों का बीज बाजार में उतारने की तैयारी कर ली है। इन किस्मों का ट्रायल पूरा हो चुका है। दस दिसंबर को स्कॉस्ट जम्मू में बैठक प्रस्तावित है, जिसमें बासमती की नई किस्मों को किसानों में वितरित करने को लेकर मुहर लग सकती है।

 
नई किस्म की बासमती को पैदावार और स्वाद में बेहतर विकल्प बताया जा रहा है। इससे भी खास बात ये है कि 370 बासमती (150 दिन) के मुकाबले यह किस्में करीब 100 दिन में तैयार हो जाती हैं। 

नई किस्मों की प्रति हेक्टेयर पैदावार 30 से 35 क्विंटल तक है। 370 बासमती की पैदावार प्रति हेक्टेयर 20 से 22 क्विंटल के बीच रहती थी। जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में कुल 60 हजार हेक्टेयर भूमि में बासमती उगाई जाती है।

 

दुनिया भर में मशहूर जम्मू-कश्मीर की बासमती के किसानाें को अब नई किस्मों का बीज देने की तैयारी है। जम्मू, सांबा और कठुआ को बासमती बेल्ट माना जाता है, जहां मुख्य रूप से 370 किस्म की बासमती उगाई जाती है।

शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कॉस्ट) जम्मू ने 118, 123 और 138 किस्मों का बीज बाजार में उतारने की तैयारी कर ली है। इन किस्मों का ट्रायल पूरा हो चुका है। दस दिसंबर को स्कॉस्ट जम्मू में बैठक प्रस्तावित है, जिसमें बासमती की नई किस्मों को किसानों में वितरित करने को लेकर मुहर लग सकती है।

 

नई किस्म की बासमती को पैदावार और स्वाद में बेहतर विकल्प बताया जा रहा है। इससे भी खास बात ये है कि 370 बासमती (150 दिन) के मुकाबले यह किस्में करीब 100 दिन में तैयार हो जाती हैं। 


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प्रति हेक्टेयर 30 से 35 क्विंटल तक है नई किस्मों की पैदावार



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Author: riteshkucc01

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