छत्तीसगढ़ी व्यंग्य- बड़ उदार हे गा हमर कका

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बाक्स …………. कका ह बने ठेठरी, खुरमी , चौसेला खावत पियत हवाई जिहाज के खूब मजा लेथे. हर समे सरकारी थैला ल धर के आथे-जाथे. जिहां आँसू पोंछना हे, उहाँ कका अपन सरकारी थैला-थैली ले ओखर आँसू पोंछ देथे. उपर वाले के भजन अउ भक्ति करे ले ओला फूल पावर मिलथे. फेर कका कोनो ल नइ घेपे.



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Author: riteshkucc01

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