चौपट हुआ साहसिक पर्यटन कारोबार: काम नहीं होने से ब्यास की धारा से हट गईं 300 राफ्ट

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रोशन ठाकुर, अमर उजाला नेटवर्क, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 01 May 2021 03:36 AM IST

रिवर राफ्टिंग- फाइल फोटो
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना की दूसरी लहर से जिला कुल्लू में पर्यटन कारोबार को बड़ा झटका लगा है। पर्यटकों से गुलजार रहने वाले टूरिस्ट प्वाइंटों के साथ अब जिले में ब्यास की धारा पर होने वाली रिवर राफ्टिंग भी बंद होने लगी है। ब्यास नदी के राफ्टिंग प्वाइंटों पर सन्नाटा पसर गया है। कामकाज नहीं होने से 300 राफ्टों को हटा दिया है। इस कारण करीब पांच हजार कारोबारियों का रोजगार छिन गया है। जिले के पर्यटन को बढ़ावा देने में कुल्लू-मनाली के साहसिक पर्यटन की अहम भूमिका है। ब्यास नदी पर रिवर राफ्टिंग पूरे देश में मशहूर है। सालाना लाखों पर्यटक अठखेलियां कर राफ्टिंग का आनंद लेते हैं। 

साहसिक पर्यटन से करीब पांच हजार लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, मगर पर्यटकों से गुलजार रहने वाली ब्यास की धारा भी बिन सैलानियों के सूनी पड़ गई है। जिले में बरसात के दो माह को छोड़कर दस माह तक राफ्टिंग की जाती है। कई सैलानी राफ्टिंग का मजा उठाने के लिए सैर-सपाटे को आते हैं, मगर 2020 के साथ 2021 का पर्यटन कारोबार के साथ साहसिक पर्यटन भी ठप हो गया है।

रिवर राफ्टिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम अत्री ने कहा कि दो सालों से रिवर राफ्टिंग का कारोबार बुरी तरह पिट गया है। एसोसिएशन ने सरकार से सालाना रिवर राफ्टिंग फीस को माफ करने की मांग की है। कई बार स्थानीय मंत्री के माध्यम से सरकार से गुहार लगाई कि कोरोना काल में 2500 रुपये प्रति राफ्ट फीस न ली जाए, लेकिन सरकार ने उनकी इस मांग को नहीं माना। उन्होंने कहा कि कोरोना से 20 अप्रैल के बाद पूरा कारोबार प्रभावित हो गया और ब्यास नदी से करीब 300 राफ्टों को काम न होने से बंद कर दिया है।

रिवर राफ्टिंग से इन लोगों का छिना रोजगार 
कुल्लू। ब्यास नदी पर होने वाली रिवर राफ्टिंग दुनिया भर में मशहूर है। पर्यटन सीजन में यहां करीब 500 राफ्ट ब्यास नदी में अठखेलियां करती हैं। रिवर राफ्टिंग से जहां राफ्ट संचालकों, गाइड, टैक्सी संचालकों, जीप संचालकों, चाय व रेहड़ी-फड़ी वालों का कामकाज भी छीन गया है। जानकारी के अनुसार जिला में रिवर राफ्टिंग से करीब पांच हजार लोगों के कामकाज प्रभावित हो गया है।

कोरोना की दूसरी लहर से जिला कुल्लू में पर्यटन कारोबार को बड़ा झटका लगा है। पर्यटकों से गुलजार रहने वाले टूरिस्ट प्वाइंटों के साथ अब जिले में ब्यास की धारा पर होने वाली रिवर राफ्टिंग भी बंद होने लगी है। ब्यास नदी के राफ्टिंग प्वाइंटों पर सन्नाटा पसर गया है। कामकाज नहीं होने से 300 राफ्टों को हटा दिया है। इस कारण करीब पांच हजार कारोबारियों का रोजगार छिन गया है। जिले के पर्यटन को बढ़ावा देने में कुल्लू-मनाली के साहसिक पर्यटन की अहम भूमिका है। ब्यास नदी पर रिवर राफ्टिंग पूरे देश में मशहूर है। सालाना लाखों पर्यटक अठखेलियां कर राफ्टिंग का आनंद लेते हैं। 

साहसिक पर्यटन से करीब पांच हजार लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, मगर पर्यटकों से गुलजार रहने वाली ब्यास की धारा भी बिन सैलानियों के सूनी पड़ गई है। जिले में बरसात के दो माह को छोड़कर दस माह तक राफ्टिंग की जाती है। कई सैलानी राफ्टिंग का मजा उठाने के लिए सैर-सपाटे को आते हैं, मगर 2020 के साथ 2021 का पर्यटन कारोबार के साथ साहसिक पर्यटन भी ठप हो गया है।

रिवर राफ्टिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम अत्री ने कहा कि दो सालों से रिवर राफ्टिंग का कारोबार बुरी तरह पिट गया है। एसोसिएशन ने सरकार से सालाना रिवर राफ्टिंग फीस को माफ करने की मांग की है। कई बार स्थानीय मंत्री के माध्यम से सरकार से गुहार लगाई कि कोरोना काल में 2500 रुपये प्रति राफ्ट फीस न ली जाए, लेकिन सरकार ने उनकी इस मांग को नहीं माना। उन्होंने कहा कि कोरोना से 20 अप्रैल के बाद पूरा कारोबार प्रभावित हो गया और ब्यास नदी से करीब 300 राफ्टों को काम न होने से बंद कर दिया है।

रिवर राफ्टिंग से इन लोगों का छिना रोजगार 

कुल्लू। ब्यास नदी पर होने वाली रिवर राफ्टिंग दुनिया भर में मशहूर है। पर्यटन सीजन में यहां करीब 500 राफ्ट ब्यास नदी में अठखेलियां करती हैं। रिवर राफ्टिंग से जहां राफ्ट संचालकों, गाइड, टैक्सी संचालकों, जीप संचालकों, चाय व रेहड़ी-फड़ी वालों का कामकाज भी छीन गया है। जानकारी के अनुसार जिला में रिवर राफ्टिंग से करीब पांच हजार लोगों के कामकाज प्रभावित हो गया है।



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Author: riteshkucc01

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