चिराग पासवान का NDA में क्या है फ्यूचर? राज्यसभा सीट पर NDA उम्मीदवार को लेकर संशय बरकरार


लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान

राज्‍यसभा उपचुनाव (Rajya Sabha by-election) के लिए 3 नवंबर तक नामांकन और 4 नवंबर को उसकी जांच होगी. 5 नवंबर तक नामांकन वापस लिया जा सकेगा. इसके बाद 14 दिसंबर को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और मतगणना भी उसी दिन चुनाव के बाद होगी.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 26, 2020, 10:59 AM IST

पटना. पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के निधन की वजह से खाली हुई राज्य सभा की सीट पर नामांकन आज से दाखिल किया जा सकता है. नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 3 दिसम्बर है और 4 नवंबर को उसकी जांच होगी. 5 नवंबर तक नामांकन वापस लिया जा सकेगा. 14 दिसंबर को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान होने वाला है.मतगणना 14 दिसंबर की शाम में होगी. राज्यसभा की एक सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में NDA की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन उम्मीदवार के नाम को लेकर अब भी संशय बरकरार है. वजह चिराग पासवान ( Chirag Paswan) को लेकर सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) का ताजा रुख है.

दरअसल एलजेपी को एक राज्यसभा सीट देने का फैसला लोकसभा चुनाव के दौरान ‘सीट शेयरिंग फॉर्मूले’ के तहत तय हुआ था. तब बीजेपी और जेडीयू दोनों 17 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और एलजेपी ने 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. साथ ही राज्यसभा की एक सीट एलजेपी के खाते में देने के लिए बीजेपी-जेडीयू तैयार हुए थे. अगर आने वाले दिनों में रामविलास पासवान वाली खाली राज्य सभा सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी एलजेपी के उम्मीदवार को नहीं उतारेगी तो ये उस फॉर्मूले का उल्लंघन होगा.

दरअसल बिहार विधानसभा में जिस तरह से लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने नीतीश कुमार को टारगेट किया इससे जेडीयू के नेता बेहद खफा हैं. माना जा रहा है कि जदयू की तरफ से लोजपा के उम्मीदवार को सपोर्ट नहीं किया जाएगा. दूसरी ओर राजग गठबंधन सीटों का गणित भी ऐसा है कि इस एकमात्र सीट को निकालने के लिए किसी भी गठबंधन के पास विधानसभा में बहुमत का होना जरूरी है.

सीटों के समीकरण के अनुसार अगर विपक्ष की ओर से भी प्रत्याशी खड़ा कर दिया जाता है तो 243 सदस्यीय विधानसभा में जीत उसी की हो सकती है, जिसे प्रथम वरीयता के कम से कम से कम 122 वोट मिलेंगे. ऐसे में हालत यह है कि कोई भी दल अकेले इस अंक के आसपास भी नहीं ऐसे में गठबंधन के सहयोगी दलों का साथ जरूरी है. भाजपा को अपने कोटे की इस सीट को बचाने के लिए जदयू की मदद की दरकार होगी.यह भी साफ है कि अगर लोजपा उम्मीदवार उतारती है तो नीतीश कुमार की जदयू उसके उम्मीदवार को सपोर्ट करेगी या नहीं, इस पर फिलहाल कुछ भी कहना सही नहीं है. ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि राज्यसभा सीट के लिए भाजपा का कोई सर्वसम्मत (राजग के सभी चारों दलों की सहमति) चेहरा मैदान में दिख सकता है. ऐसी स्थिति में भाजपा की विजय तय मानी जा रही है.

अगर ऐसा होता है तो भाजपा के ही कोई वरीय नेता राज्यसभा जा सकते हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार उपचुनाव की एक सीट के लिए दल में कई नामों की चर्चा है. सबसे अधिक चर्चा पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की हो रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्यसभा सांसद बनाकर इन्हें केंद्र में मंत्री बनाए जाने की चर्चा जोरों पर है. इसलिए इन्हें बिहार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है. केंद्र में इन्हें कोई अहम मंत्रालय की जिम्मेवारी देने के कयास लग रहे हैं.

वहीं, पूर्व सांसद शाहनवाज हुसैन के नाम की भी काफी चर्चा है. सूत्रों के अनुसार लंबे समय से किसी सदन का सदस्य नहीं रहे शाहनवाज को उपचुनाव के माध्यम से राज्यसभा भेजा जा सकता है. हालांकि, पार्टी में चल रही नामों की पुष्टि अभी बिहार भाजपा के कोई भी नेता नहीं कर रहे हैं. यह सब कुछ आलाकमान पर निर्भर करता है. हालांकि राजग गठबंधन की ओर से राज्यसभा की यह सीट किसके खाते में जाएगी इस पर भी स्थिति अभी तक पूरी तरह से साफ नहीं है.





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Author: riteshkucc01

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