खतरनाक हो सकता है रेमडेसिविर का इस्तेमाल, हिमाचल स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

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अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 05 Jun 2021 02:04 AM IST

सार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल के निदेशक निपुण जिंदल के अनुसार रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग उन मरीजों के उपचार में नहीं किया जाना चाहिए जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर नहीं हैं या होम आइसोलेशन में हैं।

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 रेमडेसिविर का इस्तेमाल खतरनाक भी हो सकता है। स्टेट क्लीनिकल टीम की सिफारिशों के चलते स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में साफ किया गया है कि रेमडेसिविर का इस्तेमाल केवल कोविड-19 के गंभीर मामलों में ही किया जाता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल के निदेशक निपुण जिंदल के अनुसार रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग उन मरीजों के उपचार में नहीं किया जाना चाहिए जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर नहीं हैं या होम आइसोलेशन में हैं।

उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर को केवल अस्पताल में ही लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में निर्णय लेने के लिए हर डीसीएचसी और डीसीएच में रेमडेसिविर ऑडिट समिति का गठन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में रेमडेसिविर के कुल 8970 वायल उपलब्ध हैं। 

स्टेरॉयड ज्यादा लेने से ब्लैक फंगस होने की संभावना
 स्टेरॉयड का ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल होने पर कोरोना मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ सकता है। कोविड के विभिन्न मामलों में यह देखा गया है कि संक्रमित मरीज चिकित्सकों से परामर्श लिए बिना ही अधिक मात्रा में स्टेरॉयड ले रहे हैं।

इससे शरीर में वायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी कम होना और ब्लड शुगर में अनियमितता जैसे प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। इसके अधिक उपयोेग से ब्लैक फंगस जैसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों में भी वृद्धि हो सकती है। स्टेट क्लीनिकल टीम ने सुझाव दिया है कि स्टेरॉयड का प्रयोग चिकित्सा परामर्श के साथ केवल उन कोविड-19 के मरीजों में ही किया जाना चाहिए, जिनका ऑक्सीजन स्तर कम है। 

निगरानी में रहें सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीज 
 सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित लोग अस्पताल पहुंचाने में देरी कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल के निदेशक निपुण जिंदल ने कहा कि सांस लेने में तकलीफ और ऑक्सीजन लेवल में गिरावट का तत्काल पता लगाने के लिए ऐसे मरीजों को चिकित्सकों की  निगरानी में रखना होगा।

विस्तार

 रेमडेसिविर का इस्तेमाल खतरनाक भी हो सकता है। स्टेट क्लीनिकल टीम की सिफारिशों के चलते स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में साफ किया गया है कि रेमडेसिविर का इस्तेमाल केवल कोविड-19 के गंभीर मामलों में ही किया जाता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल के निदेशक निपुण जिंदल के अनुसार रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग उन मरीजों के उपचार में नहीं किया जाना चाहिए जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर नहीं हैं या होम आइसोलेशन में हैं।

उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर को केवल अस्पताल में ही लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में निर्णय लेने के लिए हर डीसीएचसी और डीसीएच में रेमडेसिविर ऑडिट समिति का गठन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में रेमडेसिविर के कुल 8970 वायल उपलब्ध हैं। 

स्टेरॉयड ज्यादा लेने से ब्लैक फंगस होने की संभावना

 स्टेरॉयड का ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल होने पर कोरोना मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ सकता है। कोविड के विभिन्न मामलों में यह देखा गया है कि संक्रमित मरीज चिकित्सकों से परामर्श लिए बिना ही अधिक मात्रा में स्टेरॉयड ले रहे हैं।

इससे शरीर में वायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी कम होना और ब्लड शुगर में अनियमितता जैसे प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। इसके अधिक उपयोेग से ब्लैक फंगस जैसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों में भी वृद्धि हो सकती है। स्टेट क्लीनिकल टीम ने सुझाव दिया है कि स्टेरॉयड का प्रयोग चिकित्सा परामर्श के साथ केवल उन कोविड-19 के मरीजों में ही किया जाना चाहिए, जिनका ऑक्सीजन स्तर कम है। 

निगरानी में रहें सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीज 

 सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित लोग अस्पताल पहुंचाने में देरी कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल के निदेशक निपुण जिंदल ने कहा कि सांस लेने में तकलीफ और ऑक्सीजन लेवल में गिरावट का तत्काल पता लगाने के लिए ऐसे मरीजों को चिकित्सकों की  निगरानी में रखना होगा।



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Author: riteshkucc01

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