कोरोना से जंग: आठ महीने की गर्भावस्था में भी लोगों की सेवा में जुटीं डॉक्टर शिवानी

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 10 Jun 2021 10:59 AM IST

सार

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लखनपुर में चिकित्सा अधिकारी डॉ शिवानी आठ महीने की गर्भावस्था में भी ड्यूटी पर हैं। मार्च में डॉ शिवानी ने नौकरी ज्वाइन की थी।

ख़बर सुनें

कोरोना से दुनिया भर में लोगों की जान बचाने के लिए डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ रोजाना इस महामारी से जूझ रहे हैं। कोरोना के खिलाफ देश में योद्धा की तरह लड़ रहे इन लोगों में कठुआ की डॉ शिवानी शर्मा भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नई जिम्मेदारी मिलने पर वह खुश भी थीं, लेकिन अपने गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की चिंता भी रह-रहकर सता रही थी। हालांकि कोरोना महामारी को देखते हुए उनके पास और कोई रास्ता नहीं था। क्योंकि ऐसे हालात में वह अपनी जिम्मेदारी से पीछे भी नहीं हटना चाहती थीं। इसका एकमात्र कारण यह रहा कि वह नहीं चाहती थीं कि उनका बच्चा उनके कर्तव्यों का पालन न करने का कारण बने। वह कहती हैं कि ऐसे समय में परिवार का समर्थन महत्वपूर्ण रहा है।

डॉ शिवानी ने बताया कि वह अपने ससुराल वालों के साथ रहती हैं। गर्भवती होने पर काम करने में मेरे फैसले का परिवार भी समर्थन करता है। पति भी पेशे से चिकित्सक हैं। वह भी कहते हैं कि जरूरतमंदों की मदद करना पहला कर्तव्य है। हमारा बच्चा उनके आशीर्वाद से सुरक्षित रहेगा।

पति दिन में कई बार फोन करके पूछते हैं हाल
डॉ शिवानी के पति उनको प्रतिदिन ड्यूटी के लिए ले जाते हैं और घर लाते हैं। इसके अलावा हर दो से तीन घंटे में उन्हें हाइड्रेट रहने की याद दिलाते हैं। वहीं उनके माता-पिता भी फोन पर हाल-चाल पूछने के साथ ही उन्हें किसी तरह का तनाव ना लेने की सलाह देते हैं। खुश रहने के लिए उत्साहित करते हैं। डॉ शिवानी गर्भावस्था के कारण अपने साथ नियमित टिफिन के अलावा स्वास्थ्य के लिए कुछ जरूरी चीजों से भरा बैग लेकर कार्यस्थल पर पहुंचती हैं।

यह भी पढ़ें- कश्मीर: अलगाववाद के सुर थमे और मस्जिदों से अमन का पैगाम, पाकिस्तानी-आतंकी संगठनों के झंडे लहराना बंद

 

विस्तार

कोरोना से दुनिया भर में लोगों की जान बचाने के लिए डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ रोजाना इस महामारी से जूझ रहे हैं। कोरोना के खिलाफ देश में योद्धा की तरह लड़ रहे इन लोगों में कठुआ की डॉ शिवानी शर्मा भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नई जिम्मेदारी मिलने पर वह खुश भी थीं, लेकिन अपने गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की चिंता भी रह-रहकर सता रही थी। हालांकि कोरोना महामारी को देखते हुए उनके पास और कोई रास्ता नहीं था। क्योंकि ऐसे हालात में वह अपनी जिम्मेदारी से पीछे भी नहीं हटना चाहती थीं। इसका एकमात्र कारण यह रहा कि वह नहीं चाहती थीं कि उनका बच्चा उनके कर्तव्यों का पालन न करने का कारण बने। वह कहती हैं कि ऐसे समय में परिवार का समर्थन महत्वपूर्ण रहा है।

डॉ शिवानी ने बताया कि वह अपने ससुराल वालों के साथ रहती हैं। गर्भवती होने पर काम करने में मेरे फैसले का परिवार भी समर्थन करता है। पति भी पेशे से चिकित्सक हैं। वह भी कहते हैं कि जरूरतमंदों की मदद करना पहला कर्तव्य है। हमारा बच्चा उनके आशीर्वाद से सुरक्षित रहेगा।

पति दिन में कई बार फोन करके पूछते हैं हाल

डॉ शिवानी के पति उनको प्रतिदिन ड्यूटी के लिए ले जाते हैं और घर लाते हैं। इसके अलावा हर दो से तीन घंटे में उन्हें हाइड्रेट रहने की याद दिलाते हैं। वहीं उनके माता-पिता भी फोन पर हाल-चाल पूछने के साथ ही उन्हें किसी तरह का तनाव ना लेने की सलाह देते हैं। खुश रहने के लिए उत्साहित करते हैं। डॉ शिवानी गर्भावस्था के कारण अपने साथ नियमित टिफिन के अलावा स्वास्थ्य के लिए कुछ जरूरी चीजों से भरा बैग लेकर कार्यस्थल पर पहुंचती हैं।

यह भी पढ़ें- कश्मीर: अलगाववाद के सुर थमे और मस्जिदों से अमन का पैगाम, पाकिस्तानी-आतंकी संगठनों के झंडे लहराना बंद

 



Source link

Author: riteshkucc01

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *