कोरोना संकट में बिजली दरें न बढ़ाने की वकालत, विद्युत नियामक आयोग ने की ऑनलाइन जन सुनवाई

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अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 29 Apr 2021 11:02 AM IST

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : पिक्साबे

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हिमाचल प्रदेश में कोरोना संकट के बीच बिजली दरों को इस वर्ष नहीं बढ़ाने की मांग की गई है। बुधवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग ने ऑनलाइन जन सुनवाई की। करीब दो दर्जन हितधारक इसमें शामिल हुए। उद्योगपतियों ने आर्थिक दिक्कतों का हवाला देते हुए अपनी समस्याओं से आयोग को अवगत कराया। महर्षि मार्कंडेय विवि सहित कई घरेलू उपभोक्ताओं ने भी अपना पक्ष रखा। जन सुनवाई में बिजली बोर्ड के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। आयोग ने सभी सुझाव और आपत्तियां दर्ज कर ली हैं। अब इन पर विचार करने के बाद संभवतया 15 मई से पहले बिजली की नई दरों की घोषणा कर दी जाएगी।

राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष डीके शर्मा की अध्यक्षता में ऑनलाइन जन सुनवाई हुई। अधिकांश उद्योगपतियों ने कोरोना संकट का हवाला देते हुए इस वर्ष बिजली दरें नहीं बढ़ाने की मांग की। कहा कि आर्थिक तौर पर उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर बिजली दरें भी बढ़ गईं तो काम करना मुश्किल हो जाएगा। बिजली उत्पादकों ने सरकार की ओर से खरीदी जाने वाली बिजली के दाम बढ़ाने की मांग की।

घरेलू उपभोक्ताओं ने लिखित सुझाव भेजकर कहा कि सरकार की ओर से सब्सिडी में की कटौती के कारण पहले ही बिजली बिल बहुत अधिक आ रहे हैं। ऐसे में अगर दरें भी बढ़ गईं तो मध्य वर्गीय उपभोक्ताओं को जीवनयापन करना मुश्किल हो जाएगा। जन सुनवाई में सीआईआई, वर्धमान ग्रुप, सहित बीबीएन, कालाअंब के उद्योगपतियों ने भाग लिया। चांजू और मलाणा बिजली परियोजना के प्रतिनिधियों ने भी अपना पक्ष रखा। बिजली बोर्ड की ओर से प्रबंध निदेशक आरके शर्मा मौजूद रहे। 

बोर्ड प्रबंधन ने घाटे का हवाला देकर दरों में बढ़ोतरी करने का भेजा है प्रस्ताव
प्रदेश के 21.48 लाख घरेलू और 4.18 लाख अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बोर्ड ने बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। 251 करोड़ के घाटे का हवाला देकर बोर्ड ने दरें बढ़ाने के लिए नियामक आयोग में याचिका दायर की है। कोरोना संकट में वर्ष 2020 में नियामक आयोग ने बिजली दरें नहीं बढ़ाईं थीं। सरकार ने मध्य वर्ष में बोर्ड को दी जाने वाली सब्सिडी की राशि को कैबिनेट बैठक में फैसला लेकर घटा दिया था। सरकार के इस फैसले से बिजली दरों के स्लैब पर सब्सिडी तय की गई है।

बढ़ते स्लैब में जाने से सब्सिडी कम हो रही है। इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में करीब पचास रुपये से 350 रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी हुई है। उधर, बिजली बोर्ड भी कोरोना संकट के चलते राजस्व प्राप्ति कम होने का तर्क देते हुए दरें बढ़ाने की मांग कर रहा है। बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 5642.04 करोड़ के राजस्व की जरूरत बताई है। वर्ष 2020-21 की राजस्व प्राप्ति 5384.1 करोड़ बताई गई है।

हिमाचल प्रदेश में कोरोना संकट के बीच बिजली दरों को इस वर्ष नहीं बढ़ाने की मांग की गई है। बुधवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग ने ऑनलाइन जन सुनवाई की। करीब दो दर्जन हितधारक इसमें शामिल हुए। उद्योगपतियों ने आर्थिक दिक्कतों का हवाला देते हुए अपनी समस्याओं से आयोग को अवगत कराया। महर्षि मार्कंडेय विवि सहित कई घरेलू उपभोक्ताओं ने भी अपना पक्ष रखा। जन सुनवाई में बिजली बोर्ड के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। आयोग ने सभी सुझाव और आपत्तियां दर्ज कर ली हैं। अब इन पर विचार करने के बाद संभवतया 15 मई से पहले बिजली की नई दरों की घोषणा कर दी जाएगी।

राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष डीके शर्मा की अध्यक्षता में ऑनलाइन जन सुनवाई हुई। अधिकांश उद्योगपतियों ने कोरोना संकट का हवाला देते हुए इस वर्ष बिजली दरें नहीं बढ़ाने की मांग की। कहा कि आर्थिक तौर पर उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर बिजली दरें भी बढ़ गईं तो काम करना मुश्किल हो जाएगा। बिजली उत्पादकों ने सरकार की ओर से खरीदी जाने वाली बिजली के दाम बढ़ाने की मांग की।

घरेलू उपभोक्ताओं ने लिखित सुझाव भेजकर कहा कि सरकार की ओर से सब्सिडी में की कटौती के कारण पहले ही बिजली बिल बहुत अधिक आ रहे हैं। ऐसे में अगर दरें भी बढ़ गईं तो मध्य वर्गीय उपभोक्ताओं को जीवनयापन करना मुश्किल हो जाएगा। जन सुनवाई में सीआईआई, वर्धमान ग्रुप, सहित बीबीएन, कालाअंब के उद्योगपतियों ने भाग लिया। चांजू और मलाणा बिजली परियोजना के प्रतिनिधियों ने भी अपना पक्ष रखा। बिजली बोर्ड की ओर से प्रबंध निदेशक आरके शर्मा मौजूद रहे। 

बोर्ड प्रबंधन ने घाटे का हवाला देकर दरों में बढ़ोतरी करने का भेजा है प्रस्ताव

प्रदेश के 21.48 लाख घरेलू और 4.18 लाख अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बोर्ड ने बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। 251 करोड़ के घाटे का हवाला देकर बोर्ड ने दरें बढ़ाने के लिए नियामक आयोग में याचिका दायर की है। कोरोना संकट में वर्ष 2020 में नियामक आयोग ने बिजली दरें नहीं बढ़ाईं थीं। सरकार ने मध्य वर्ष में बोर्ड को दी जाने वाली सब्सिडी की राशि को कैबिनेट बैठक में फैसला लेकर घटा दिया था। सरकार के इस फैसले से बिजली दरों के स्लैब पर सब्सिडी तय की गई है।

बढ़ते स्लैब में जाने से सब्सिडी कम हो रही है। इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में करीब पचास रुपये से 350 रुपये प्रतिमाह बढ़ोतरी हुई है। उधर, बिजली बोर्ड भी कोरोना संकट के चलते राजस्व प्राप्ति कम होने का तर्क देते हुए दरें बढ़ाने की मांग कर रहा है। बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 5642.04 करोड़ के राजस्व की जरूरत बताई है। वर्ष 2020-21 की राजस्व प्राप्ति 5384.1 करोड़ बताई गई है।



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Author: riteshkucc01

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