केरल कांग्रेस (एम) ने सरकार से की हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग

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मणि ने अदालत के आदेश के कारण अल्पसंख्यकों के किसी भी वर्ग को कोई नुकसान होने की स्थिति में सरकार से विशेष पैकेज लागू करने का भी आग्रह किया (सांकेतिक तस्वीर)

इस मामले पर केरल कांग्रेस के नेता का बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि न्यायालय के आदेश को लेकर किसी भी अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले एक कानूनी समीक्षा और विशेषज्ञों द्वारा एक अध्ययन कराया जाएगा.

कोट्टयम (केरल). केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (Kerala Left Democratic Front) में शामिल केरल कांग्रेस (एम) ने राज्य सरकार से केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) के उस आदेश को लागू करने का आग्रह किया है, जिसमें अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को ’मेरिट-कम-मींस’ छात्रवृत्ति समान रूप से प्रदान करने की बात कही गयी है.

केरल कांग्रेस (एम) के नेता जोस के मणि ने यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कानून के मुताबिक अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ’मेरिट-कम-मींस’ छात्रवृत्ति प्रदान करने सहित तमाम सुविधाएं समान रूप से दी जानी चाहिए.

इसके अलावा मणि ने अदालत के आदेश के कारण अल्पसंख्यकों के किसी भी वर्ग को कोई नुकसान होने की स्थिति में सरकार से विशेष पैकेज लागू करने का भी आग्रह किया. गौरतलब है कि मध्य केरल को केरल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां अल्पसंख्यक ईसाइयों की संख्या काफी अधिक है. उन्होंने कहा कि राज्य के सामाजिक न्याय विभाग की ओर से सर्वेक्षण करवा कर भी पैकेज का वितरण किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें- ममता के भतीजे अभिषेक बने राष्ट्रीय महासचिव, TMC में अब ‘वन मैन, वन पोस्ट’केरल के मुख्यमंत्री ने बैठक में कही थी ये बात

इस मामले पर केरल कांग्रेस के नेता का बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि न्यायालय के आदेश को लेकर किसी भी अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले एक कानूनी समीक्षा और विशेषज्ञों द्वारा एक अध्ययन कराया जाएगा.

केरल उच्च न्यायालय ने 29 मई को मुस्लिम समुदाय को 80 प्रतिशत और लैटिन कैथोलिक ईसाइयों और धर्मांतरित ईसाइयों को 20 प्रतिशत मेरिट-कम-मींस छात्रवृत्ति प्रदान करके अल्पसंख्यकों को उप-वर्गीकृत करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया था. न्यायालय ने कहा था कि यह कानूनी रूप से मान्य नहीं है.

(Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)









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Author: riteshkucc01

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