उर्स 2021: वर्षों पुरानी परंपरा बहाल, पिरान कलियर में सूफी संतों के विरोध के बाद बड़ा लंगर शुरू 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  


विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक के 753वें सालाना उर्स में बड़ा लंगर शुरू नहीं होने पर सूफी संतों ने दरगाह कार्यालय पहुंचकर प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। क्षेत्रीय विधायक ने भी मौके पर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन का समर्थन किया और लंगर की वर्षों पुरानी परंपरा को बहाल करने की मांग की। विधायक के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने बड़ा लंगर शुरू करा दिया है।

साबिर पाक के सालाना उर्स में इस बार सूफी संतों को दिए जाने वाले लंगर पर प्रशासन ने कोरोना के चलते प्रतिबंध लगा दिया था। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद अकरम और विधायक हाजी फुरकान अहमद ने डीएम को पत्र भेजकर हर साल की तरह बड़ा लंगर शुरू कराने की मांग की थी, लेकिन उर्स की सात तारीख को बड़ा लंगर नहीं बंटा तो सज्जादानशीन परिवार के शाह यावर एजाज के नेतृत्व में सूफी संत और बाबा दरगाह कार्यालय पहुंचे।

उन्होंने दरगाह प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। साथ ही ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और वक्फ बोर्ड के सीईओ को मौके पर बुलाकर लंगर की वर्षों पुरानी परंपरा बहाल कराने की मांग की। इसके बाद विधायक हाजी फुरकान अहमद ने भी मौके पर पहुंचकर धरने का समर्थन किया। उनका कहना था कि प्रशासन यहां उर्स की रस्मों के विपरीत कार्य कर रहा है, जिसे किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

उर्स 2021: पिरान कलियर आने वाले जायरीनों की संख्या पर पाबंदी हटी, रजिस्ट्रेशन और आरटीपीसीआर रिपोर्ट जरूरी

लंगर की व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है, जिसको प्रशासन बंद करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस साल भी बड़ा लंगर शुरू होना चाहिए। धरने की सूचना मिलते ही एएसडीएम विजय नाथ शुक्ला पहुंचे और विधायक से वार्ता की। साथ ही लंगर चालू कराया। उन्होंने बताया कि कुछ गलतफहमी हो गई थी, जिसे दूर कर दिया गया है। विधायक ने कहा कि प्रशासन ने अब बड़ा लंगर चालू करा दिया है। इस दौरान गाजी मियां, नाजिम त्यागी, इसरार शरीफ, जगपाल सिंह, सूफी राशिद और प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार सुरेश पाल, कानूनगो वेदपाल सैनी, लेखपाल अनुज यादव मौजूद रहे।

सूफी संतों और जायरीनों को बांटा लंगर

सूफिया-ए-इकराम, मस्त मलंग और अकीदतमंद साबिर पाक के सालाना उर्स में शिरकत करने कलियर पहुंच चुके हैं। इस्लामी कैलेंडर की सात तारीख को बृहस्पतिवार को साबिर पाक के लंगरखाने से सज्जादानशीन शाह अली एजाज साबरी की सरपरस्ती में सज्जादानशीन प्रतिनिधि शाह सुहैल, शाह यावर एजाज साबरी और खादिम मोज्जन अब्दुस्लाम ने सूफी संतों और जायरीनों को लंगर बांटा।

उर्स में बड़ा लंगर सात तारीख से शुरू होता है और इसका सिलसिला चांद की तारीख 12 रबीउल अव्वल तक जारी रहता है। 12 रबीउल अव्वल को सिर्फ दोपहर यानी एक वक्त का लंगर बांटा जाता है। 12 रबीउल अव्वल को शाम को बंटने वाला लंगर मस्त कहलाता है। उर्स के दौरान अधिकांश सूफी संत अपनी खानगाहों पर लंगर बांटते हैं। इसके अलावा पंजाब से आने वाले जायरीन भी अपने-अपने डेरों पर लंगर बांटते हैं। लंगर इंचार्ज असलम कुरैशी और राव शारिक ने बताया कि उर्स की मुख्य रस्मों के दौरान करीब तीन क्विंटल दाल और 30 क्विंटल आटा प्रतिदिन बनता है। इस मौके पर सूफी राशिद साबरी, इकराम मियां, मुनव्वर, नोमी मियां, बबलू शाह, असद साबरी, समद साबरी, शफीक साबरी, मुराद, रहीम मौजूद रहे। 



Source link

Author: riteshkucc01

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *