उपेंद्र कुशवाहा के बाद नीतीश ने की नरेंद्र सिंह से मुलाकात, क्या है जदयू का नया प्लान?


नीतीश और नरेंद्र
– फोटो : सोशल मीडिया

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नीतीश कुमार भले ही बिहार की सत्ता के सिंहासन पर बैठे हों, लेकिन उनकी पॉलिटिकल ताकत पहले से कमजोर हो गई है। बिहार चुनाव में उम्मीद से कम सीटे मिलने के बाद नीतीश अपने पुराने सहयोगी से मिल रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा के बाद नीतिश कुमार ने अपने पुराने सहयोगी नरेंद्र सिंह से मुलाकात की है। ऐसे में लोग अटकलें लगा रहे हैं, कि  नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक ताकत को बढ़ाने के लिए पुराने सहयोगी से गिले शिकवे मिटा रहे हैं।

 शादी में हुई मुलाकात

जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार और नरेंद्र सिंह की मुलाकात रविवार रात राजधानी पटना में आयोजित एक शादी में हुई थी। नरेंद्र सिंह के रिश्तेदार के यहां शादी थी। जिसमें नीतीश कुमार भी शामिल हुए थे। इस दौरान दोनों की मुलाकात हुई और एक-दूसरे से बातचीत भी की। इतना ही नहीं, नरेंद्र सिंह ने बिहार चुनाव में नीतीश कुमार के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की बधाई भी दी थी।

नरेंद्र सिंह से काफी पुराने हैं संबंध

नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित कुमार सिंह चकाई विधानसभा से निर्दलीय विधायक हैं। जो नीतीश सरकार के नेतृत्व में एनडीए सरकार का समर्थन कर रहे हैं।  नरेंद्र सिंह जनशक्ति पार्टी के बिहार अध्यक्ष रह चुके हैं। वह 2005 में एलजेपी से अलग होकर जेडीयू के साथ आ गए थे, जिसके बाद नीतीश कुमार ने उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाकर अपने कैबिनेट में शामिल किया था। नरेंद्र सिंह 2015 तक मंत्री रहे और बाद जेडीयू को छोड़कर जीतनराम मांझी के साथ चले गए।

नरेंद्र सिंह से पहले आरएलएसपी के अध्यक्ष से की मुलाकात

नीतीश कुमार ने नरेंद्र सिंह से पहले आरएलएसपी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की थी। इसके बाद से उपेंद्र नीतीश कुमार के तारीफों के पुल बांध रहे हैं और उन्हें अपना बड़ा भाई बता रहे हैं। नीतीश कुमार की इस मुलाकात के कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं, लेकिन एक बात तो साफ है कि इस चुनाव में नीतीश कुमार की लोकप्रीयता अल्पसंख्यकों और पिछड़ी जाति के समुदायों के बीच घटी है। जिसकी वजह से जेडीयू का राजनीतिक आधार धीरे-धीरे खिसक रहा है। इस बार के चुनाव में नीतीश कुमार को मगध और सीमांचल पर काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार जेडीयू को महज 43 सीटें ही मिली हैं। यही वजह है कि नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक पकड़ को फिर से मजबूत करने की कवायद में जुटे हुए हैं।

नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक समीकरण को मजबूत करने में लगे हुए थे। उन्होंने इस चुनाव में जीतनराम मांझी को साथ ले लिया। जेडीयू के कोटे से मांझी को 7 सीटों पर चुनाव भी लड़वा दिया था, जिनमें चार विधायक जीतकर आए थे। इसके अलावा नीतीश कुमार ने जीतनराम मांजी के बेटे संतोष सुमन को अपनी सरकार में मंत्री भी बना रखा है।

नीतीश कुमार भले ही बिहार की सत्ता के सिंहासन पर बैठे हों, लेकिन उनकी पॉलिटिकल ताकत पहले से कमजोर हो गई है। बिहार चुनाव में उम्मीद से कम सीटे मिलने के बाद नीतीश अपने पुराने सहयोगी से मिल रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा के बाद नीतिश कुमार ने अपने पुराने सहयोगी नरेंद्र सिंह से मुलाकात की है। ऐसे में लोग अटकलें लगा रहे हैं, कि  नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक ताकत को बढ़ाने के लिए पुराने सहयोगी से गिले शिकवे मिटा रहे हैं।

 शादी में हुई मुलाकात

जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार और नरेंद्र सिंह की मुलाकात रविवार रात राजधानी पटना में आयोजित एक शादी में हुई थी। नरेंद्र सिंह के रिश्तेदार के यहां शादी थी। जिसमें नीतीश कुमार भी शामिल हुए थे। इस दौरान दोनों की मुलाकात हुई और एक-दूसरे से बातचीत भी की। इतना ही नहीं, नरेंद्र सिंह ने बिहार चुनाव में नीतीश कुमार के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की बधाई भी दी थी।

नरेंद्र सिंह से काफी पुराने हैं संबंध

नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित कुमार सिंह चकाई विधानसभा से निर्दलीय विधायक हैं। जो नीतीश सरकार के नेतृत्व में एनडीए सरकार का समर्थन कर रहे हैं।  नरेंद्र सिंह जनशक्ति पार्टी के बिहार अध्यक्ष रह चुके हैं। वह 2005 में एलजेपी से अलग होकर जेडीयू के साथ आ गए थे, जिसके बाद नीतीश कुमार ने उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाकर अपने कैबिनेट में शामिल किया था। नरेंद्र सिंह 2015 तक मंत्री रहे और बाद जेडीयू को छोड़कर जीतनराम मांझी के साथ चले गए।

नरेंद्र सिंह से पहले आरएलएसपी के अध्यक्ष से की मुलाकात

नीतीश कुमार ने नरेंद्र सिंह से पहले आरएलएसपी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की थी। इसके बाद से उपेंद्र नीतीश कुमार के तारीफों के पुल बांध रहे हैं और उन्हें अपना बड़ा भाई बता रहे हैं। नीतीश कुमार की इस मुलाकात के कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं, लेकिन एक बात तो साफ है कि इस चुनाव में नीतीश कुमार की लोकप्रीयता अल्पसंख्यकों और पिछड़ी जाति के समुदायों के बीच घटी है। जिसकी वजह से जेडीयू का राजनीतिक आधार धीरे-धीरे खिसक रहा है। इस बार के चुनाव में नीतीश कुमार को मगध और सीमांचल पर काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार जेडीयू को महज 43 सीटें ही मिली हैं। यही वजह है कि नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक पकड़ को फिर से मजबूत करने की कवायद में जुटे हुए हैं।

नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक समीकरण को मजबूत करने में लगे हुए थे। उन्होंने इस चुनाव में जीतनराम मांझी को साथ ले लिया। जेडीयू के कोटे से मांझी को 7 सीटों पर चुनाव भी लड़वा दिया था, जिनमें चार विधायक जीतकर आए थे। इसके अलावा नीतीश कुमार ने जीतनराम मांजी के बेटे संतोष सुमन को अपनी सरकार में मंत्री भी बना रखा है।



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Author: riteshkucc01

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