उत्तराखंड: विभिन्न राज्यों के 42 वेटलैंड क्षेत्रों का होगा संरक्षण, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन को सौंपी जिम्मेदारी

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सार

अध्ययन के अनुसार पर्यावरण में आए बदलावों के चलते उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में स्थित वेटलैंड सिकुड़ रहे हैं।

वेटलैंड
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न राज्यों में स्थित 42 वेटलैंड को संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन को जिम्मेदारी सौंपी है। पहले चरण में त्रिपुरा मेें स्थित रुद्रसागर झील को संरक्षित किया गया है। अगले चरण में अन्य राज्यों में स्थित वेटलैंड का संरक्षण किया जाएगा। 

अध्ययन के अनुसार पर्यावरण में आए बदलावों के चलते उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में स्थित वेटलैंड सिकुड़ रहे हैं। वेटलैंड में खरपतवार की अधिकता, गाद की मात्रा बढ़ने और अतिक्रमण के चलते कई वेटलैंड का वजूद पर ही संकट है। इसके अलावा वेटलैंड में जलकुंभी पनपने से वनस्पतियां नष्ट होने से जलीय जंतुओं पर असर पड़ रहा है। वेटलैंड के समीपवर्ती खेतों में रासायनिक खादों के उपयोग से नदियां प्रदूषित हो रही हैं। गाद भरने से नदी का जलस्तर भी घट रहा है। 

अध्ययन के तथ्य परियोजना में सबसे पहले झील से मिलने वाली पारिस्थितिकीय सेवाओं का मूल्यांकन किया गया। स्थानीय मछुवारों और 18 गांवों के साथ मिलकर परियोजना के तहत झील परिक्षेत्र में उपलब्ध जैवविविधता को भी सूचीबद्ध किया गया। अध्ययन में पाया गया कि यह क्षेत्र में पोषण का बड़ा माध्यम है।

झील में 37 उपयोगी जलीय पौध प्रजातियां पायी गईं। वहीं छह व्यावसायिक रूप से उपयोगी मछलियों की प्रजातियां, पक्षियों की 21 प्रजातियां पायी र्गईं। झील में पानी की गुणवत्ता के साथ संकटग्रस्त पौधों व जीवों के आंकड़े जुटाए गए।

इसके बाद झील के संरक्षण को लेकर योजना को धरातल पर उतारा गया। इसके बाद झील का पानी न सिर्फ पीने योग्य हुआ वरन मछलियों की 55 प्रजातियों समेत 163 जलीय जीवों की प्रजातियां भी विकसित हुईं। 

हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत वेटलैंड को संरक्षित करने को लेकर मसौदा तैयार किया गया है। इसके तहत वेटलैंट को संरक्षित करने के साथ ही उन्हें पर्यटन केद्रों के तौर पर भी विकसित किया जाएगा। वेटलैंड में पानी की पर्याप्त मात्रा होने पर नौकायन समेत अन्य गतिविधियां होंगी। पर्यटकों की आवाजाही से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर मुहैया होंगे। 

 देश के115 वेटलैंड रामसर श्रेणी में शामिल
आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी दुनिया में कुल 2200 वेटलैंड हैं। जिन्हें रामसर श्रेणी में शामिल किया गया है। देश में कुल 115 वेटलैंड ऐसे हैं जो रामसर श्रेणी में शामिल हैं। इसमें उत्तराखंड का आसन कंजर्वेशन रिजर्व एकमात्र रिजर्व है। जिसे रामसर वेटलैंड श्रेणी में शामिल किया गया है। 

क्या है वेटलैंड 
वेटलैंड दलदली या नम जमीन को कहते हैं। इसमें दलदल के साथ पानी भी होता है। वेटलैंड में वनस्पतियों की कई प्रजातियों के साथ ही जलीय जंतुओं की कई प्रजातियां पायी जाती हैं। रामसर वेटलैंड के रूप में वर्ष 1971 में ईरान में कैस्पियन सागर से सटे रामसर इलाके की दलदली जमीन को वेटलैंड (आर्द्र भूमि) के तौर पर चिह्नित किया गया। रामसर के बाद पूरी दुनिया में हजारों की संख्या में वेटलैंड चिह्नित किए गए और संबंधित देशों की सरकारों ने इनके संरक्षण को लेकर तमाम योजनाएं भी शुरू कीं। 

 देश में अब तक 42 रामसर वेटलैंड क्षेत्रों को संरक्षण के लिए चयनित किया गया है। पहले चरण में त्रिपुरा के रुद्रसागर झील को संरक्षित किया गया है। वेटलैंड के संरक्षण से इसमें पायी जाने वाली वनस्पतियों के साथ ही जलीय जंतुओं को भी संरक्षित किया जाएगा। 
-किरीट कुमार, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन

विस्तार

उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न राज्यों में स्थित 42 वेटलैंड को संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन को जिम्मेदारी सौंपी है। पहले चरण में त्रिपुरा मेें स्थित रुद्रसागर झील को संरक्षित किया गया है। अगले चरण में अन्य राज्यों में स्थित वेटलैंड का संरक्षण किया जाएगा। 

अध्ययन के अनुसार पर्यावरण में आए बदलावों के चलते उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में स्थित वेटलैंड सिकुड़ रहे हैं। वेटलैंड में खरपतवार की अधिकता, गाद की मात्रा बढ़ने और अतिक्रमण के चलते कई वेटलैंड का वजूद पर ही संकट है। इसके अलावा वेटलैंड में जलकुंभी पनपने से वनस्पतियां नष्ट होने से जलीय जंतुओं पर असर पड़ रहा है। वेटलैंड के समीपवर्ती खेतों में रासायनिक खादों के उपयोग से नदियां प्रदूषित हो रही हैं। गाद भरने से नदी का जलस्तर भी घट रहा है। 

अध्ययन के तथ्य परियोजना में सबसे पहले झील से मिलने वाली पारिस्थितिकीय सेवाओं का मूल्यांकन किया गया। स्थानीय मछुवारों और 18 गांवों के साथ मिलकर परियोजना के तहत झील परिक्षेत्र में उपलब्ध जैवविविधता को भी सूचीबद्ध किया गया। अध्ययन में पाया गया कि यह क्षेत्र में पोषण का बड़ा माध्यम है।

झील में 37 उपयोगी जलीय पौध प्रजातियां पायी गईं। वहीं छह व्यावसायिक रूप से उपयोगी मछलियों की प्रजातियां, पक्षियों की 21 प्रजातियां पायी र्गईं। झील में पानी की गुणवत्ता के साथ संकटग्रस्त पौधों व जीवों के आंकड़े जुटाए गए।

इसके बाद झील के संरक्षण को लेकर योजना को धरातल पर उतारा गया। इसके बाद झील का पानी न सिर्फ पीने योग्य हुआ वरन मछलियों की 55 प्रजातियों समेत 163 जलीय जीवों की प्रजातियां भी विकसित हुईं। 


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पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किए जाएंगे वेटलैंड 



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Author: riteshkucc01

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