उत्तराखंड: राकेश टिकैत बोले- 90 बरस आजादी की लड़ाई लड़ी, ये आंदोलन तो अभी शुरुआत है 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सितारगंज
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 15 Jul 2021 11:15 PM IST

सार

उत्तराखंड पहुंचे राकेश टिकैत ने कहा कि आठ माह से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा आंदोलन अभी तो शुरुआत है।

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भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता एवं संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेती, तब तक किसान भी दिल्ली से नहीं जाएंगे और आंदोलन जारी रहेगा। यह वही किसान खून है जिसने देश की आजादी के लिए 90 बरस तक लड़ाई लड़ी।

टिकैत ने कहा कि आठ माह से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा आंदोलन अभी तो शुरुआत है। सरकार को कानून वापस लेने ही होंगे और एमएसपी की गारंटी का कानून देना ही पड़ेगा। 

उत्तराखंडः युवा किसान नेता के निधन पर शोक जताने पहुंचे राकेश टिकैत, पांच राज्यों के चुनावों को लेकर कही ये बात

टिकैत बृहस्पतिवार को लालपुर में दिवंगत युवा किसान नेता सुखचैन सिंह के आवास पर शोक जताने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को डराने की कोशिश कर रही है। उन पर देशद्रोह के केस लगाए जा रहे हैं। हरियाणा, यूपी और राजस्थान का किसान डरकर नहीं लौटेगा। ये वही किसान हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी। वह लड़ाई 90 साल चली।

किसान आंदोलन की अभी शुरुआत ही हुई है। जो किसान आठ महीने से बॉर्डर से नहीं हटा उसे डराकर घर वापस भेज दोगे? ये तो नहीं होगा। इनको (सरकार को) बात करनी पड़ेगी और कानून को वापस लेना पड़ेगा। एमएसपी की गारंटी कानून देना पड़ेगा। सरकार को कमेटियां बनाकर मसलों पर बात करनी चाहिए। 

टिकैत ने केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ वार्ता के जवाब में कहा कि मंत्री जी कानून वापस न करने की शर्त पर बात करना चाहते हैं जबकि किसान कानून वापस करने और एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। कहा कि अगले साल पांच राज्यों में चुनाव हैं। पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। टिकैत ने कहा कि किसान मांगों पर अडिग हैं और मांगों के लिए 22 जुलाई से रोजाना 200 किसान पार्लियामेंट में जाएंगे। 

किसान नेता ने उत्तराखंड सरकार को पर्वतीय युवा एवं किसानों पर नीति बनाने की सलाह दी। कहा कि पर्वतीय राज्य में विलेज टूरिज्म पर काम करना चाहिए। पर्वतीय किसान को ट्रांसपोर्टेशन पर छूट दें। मंडी तक फसल लाने की सुविधा मिले। पलायन को रोकने के लिए काम हो। जंगली जानवरों पर रोक लगाने के लिए ठोस रणनीति बने। 

टिकैत ने कहा कि चारधाम यात्रा सुचारु रूप से चलाएं। बाहर से आने वाले टूरिस्ट के खर्च का पैसा दुकानदार, किसान, मजदूरों के हिस्से में आना चाहिए। कहा कि प्रदेश में तराई से युवा सीएम बने हैं। अपने तराई क्षेत्र के सितारगंज की बंद चीनी मिल को खोलें और मिल की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए ताकि मिल चलने से यहां के किसान व युवाओं का भला हो। पहाड़ के नौजवान को बाहर न भेजकर प्रदेश में रोजगार दिया जाए। उन्होंने भू-कानून पर कमेटी बनाकर उसमें किसानों को भी शामिल करने की बात कही। 

विस्तार

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता एवं संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं लेती, तब तक किसान भी दिल्ली से नहीं जाएंगे और आंदोलन जारी रहेगा। यह वही किसान खून है जिसने देश की आजादी के लिए 90 बरस तक लड़ाई लड़ी।

टिकैत ने कहा कि आठ माह से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा आंदोलन अभी तो शुरुआत है। सरकार को कानून वापस लेने ही होंगे और एमएसपी की गारंटी का कानून देना ही पड़ेगा। 

उत्तराखंडः युवा किसान नेता के निधन पर शोक जताने पहुंचे राकेश टिकैत, पांच राज्यों के चुनावों को लेकर कही ये बात

टिकैत बृहस्पतिवार को लालपुर में दिवंगत युवा किसान नेता सुखचैन सिंह के आवास पर शोक जताने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को डराने की कोशिश कर रही है। उन पर देशद्रोह के केस लगाए जा रहे हैं। हरियाणा, यूपी और राजस्थान का किसान डरकर नहीं लौटेगा। ये वही किसान हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी। वह लड़ाई 90 साल चली।

किसान आंदोलन की अभी शुरुआत ही हुई है। जो किसान आठ महीने से बॉर्डर से नहीं हटा उसे डराकर घर वापस भेज दोगे? ये तो नहीं होगा। इनको (सरकार को) बात करनी पड़ेगी और कानून को वापस लेना पड़ेगा। एमएसपी की गारंटी कानून देना पड़ेगा। सरकार को कमेटियां बनाकर मसलों पर बात करनी चाहिए। 


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एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने की मांग



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Author: riteshkucc01

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