उत्तराखंड मौसम: बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब और केदारनाथ में बर्फबारी, बर्फ पिघलने से काली नदी का जल स्तर बढ़ा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 08:15 PM IST

बदरीनाथ में बर्फबारी
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड के चमोली जिले में बृहस्पतिवार को दोपहर बाद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई, जबकि निचले क्षेत्रों में तेज आंधी चली। बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, लाल माटी के साथ ही नीती और माणा घाटियों में बर्फबारी हुई। मौसम में आए बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत मिल गई है।

वहीं, केदारनाथ समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दोपहर बाद हल्की बर्फबारी हुई। जबकि जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग व अन्य निचले इलाकों में झमाझम बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली। बृहस्पतिवार को सुबह मौसम साफ था और धूप खिली रही, लेकिन दिन चढ़ने के साथ आसमान में बादल छाने लगे।

उत्तराखंड : स्नो एवलांच, ग्लेशियर टूटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए फिलहाल कोई तंत्र नहीं

इस दौरान तेज हवा भी चलती रही। करीब चार बजे के बाद बादलों की गर्जना के साथ झमाझम बारिश शुरू हुई, जो रुक-रुककर एक घंटे तक रही। उधर, केदारनाथ, मद्महेश्वर व चंद्रशिला में हल्की बर्फबारी हुई। धाम में पहले से ही लगभग तीन फुट तक बर्फ मौजूद है। 

ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को नुकसान
बुधवार देर शाम को ग्वालदम क्षेत्र में हुई बैमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, मसूर और सब्जियों को काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की अस्सी प्रतिशत फसल बर्बाद हो चुकी है। बेमौसमी बारिश से आलू की फसल को भी नुकसान हुआ है। सुभाष बडियारी, वीरेंद्र सिंह, सुजान सिंह, गंगादत्त का कहना है कि पहले ही सूखे की मार झेल रह किसान अब अतिवृष्टि से परेशान हैं। उन्होंने सरकार से फसलों को मुआवजा देने की मांग उठाई। 

सीमांत के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद काली नदी का जल स्तर बढ़ गया है। तीन दिन पूर्व तक धारचूला के दारमा और व्यास घाटी में अत्यधिक बर्फबारी हुई है। दोनों घाटियों में लगातार चार दिनों तक दो से चार फुट तक हिमपात हुआ। 

मौसम सामान्य होने पर तपिश बढ़ते ही बर्फ पिघलने लगी है। इससे काली नदी का जलस्तर उफान पर है। काली नदी का जलस्तर 887 मीटर पहुंच गया है। जबकि खतरे का निशान 890 मीटर पर है।

जल स्तर बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले धारचूला, बलुवाकोट, जौलजीबी क्षेत्र में लोग सतर्कता बरतने लगे हैं। स्थानीय निवासी हरीश धामी ने बताया कि बेमौसम बर्फबारी के बाद काली नदी का बढ़ा जलस्तर लोगों को आपदा काल से पहले ही चेतावनी देने लगा है। 

विस्तार

उत्तराखंड के चमोली जिले में बृहस्पतिवार को दोपहर बाद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई, जबकि निचले क्षेत्रों में तेज आंधी चली। बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, लाल माटी के साथ ही नीती और माणा घाटियों में बर्फबारी हुई। मौसम में आए बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत मिल गई है।

वहीं, केदारनाथ समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दोपहर बाद हल्की बर्फबारी हुई। जबकि जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग व अन्य निचले इलाकों में झमाझम बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली। बृहस्पतिवार को सुबह मौसम साफ था और धूप खिली रही, लेकिन दिन चढ़ने के साथ आसमान में बादल छाने लगे।

उत्तराखंड : स्नो एवलांच, ग्लेशियर टूटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए फिलहाल कोई तंत्र नहीं

इस दौरान तेज हवा भी चलती रही। करीब चार बजे के बाद बादलों की गर्जना के साथ झमाझम बारिश शुरू हुई, जो रुक-रुककर एक घंटे तक रही। उधर, केदारनाथ, मद्महेश्वर व चंद्रशिला में हल्की बर्फबारी हुई। धाम में पहले से ही लगभग तीन फुट तक बर्फ मौजूद है। 

ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को नुकसान

बुधवार देर शाम को ग्वालदम क्षेत्र में हुई बैमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, मसूर और सब्जियों को काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की अस्सी प्रतिशत फसल बर्बाद हो चुकी है। बेमौसमी बारिश से आलू की फसल को भी नुकसान हुआ है। सुभाष बडियारी, वीरेंद्र सिंह, सुजान सिंह, गंगादत्त का कहना है कि पहले ही सूखे की मार झेल रह किसान अब अतिवृष्टि से परेशान हैं। उन्होंने सरकार से फसलों को मुआवजा देने की मांग उठाई। 


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बर्फ पिघलने से बढ़ा काली नदी का जल स्तर



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Author: riteshkucc01

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