उत्तराखंड: मानदेय बढ़ोतरी नाकाफी, उपनलकर्मी करेंगे आंदोलन, रोडवेज कर्मचारियों ने भी दिया नोटिस

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सार

कर्मचारियों का आरोप है कि उप समिति ने कैबिनेट में तय फार्मूला न रखकर कुछ और ही फार्मूला प्रस्तुत किया है। उपनल कर्मचारियों ने इसे उनके साथ छलावा करार दिया है।

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22 हजार उपनल कर्मचारियों ने मानदेय बढ़ोतरी को नाकाफी करार देते हुए इस महीने के आखिर से आंदोलन की चेतावनी दी है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने मानदेय संशोधन संबंधी जो फार्मूला कैबिनेट में पेश किया, वह उपनल कर्मचारी महासंघ को मंजूर नहीं है। 

उपनल कर्मचारियों ने 56 दिन आंदोलन किया था
महासंघ का आरोप है कि उप समिति ने कैबिनेट में तय फार्मूला न रखकर कुछ और ही फार्मूला प्रस्तुत किया है। उपनल कर्मचारियों ने इसे उनके साथ छलावा करार दिया है। बुधवार को इस संबंध में उपनल कर्मचारी महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में रोष व्यक्त किया गया। प्रदेश अध्यक्ष कुशाग्र जोशी ने कहा कि उपनल कर्मचारियों ने 56 दिन आंदोलन किया। इसके बाद कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और गणेश जोशी ने आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करवा दिया।

 

मंत्रियों ने उस वक्त कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर सहमति जताई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से उप समिति बनाई गई। कर्मचारियों ने उप समिति के सम्मुख प्रस्तुत होकर अपनी मांगे बताई थीं। लेकिन उप समिति ने कैबिनेट में जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, उस पर कर्मचारी महासंघ की कोई सहमति नहीं थी। 

कहा कि आगामी कैबिनेट में अगर उप समिति सही फामूर्ले पर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करती है तो महासंघ अक्तूबर माह के अंत में पुन: आंदोलन के लिए बाध्य होगा। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष विवेक भट्ट ने कर्मचारी महासंघ की ओरसे समस्त कर्मचारियों से आह्वान किया यदि उनकी मांगें नहीं मानी जातीं तो वे आंदोलन के लिए तैयार रहें। बैठक में प्रदेश महामंत्री हेमंत सिंह रावत, सभापति विनोद गोदियाल, उपाध्यक्ष विनय प्रसाद, राकेश राणा, मनोज सेमवाल आदि मौजूद रहे।

मांगें पूरी न होने के विरोध में रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आंदोलन की चेतावनी दी है। परिषद ने बुधवार को मंडलीय प्रबंधक को आंदोलन का नोटिस दिया है। परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष मेजपाल सिंह, क्षेत्रीय मंत्री राकेश पेटवाल ने बुधवार को 15 सूत्री मांगपत्र के साथ रोडवेज के मंडल प्रबंधक तकनीकी एवं संचालन को आंदोलन का नोटिस दिया। उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। 26 अक्तूबर तक समाधान न किया गया तो 27 अक्तूबर से संगठन अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर देगा।

यह हैं प्रमुख मांगें
-अगस्त से लंबित वेतन का भुगतान किया जाए। हर माह वेतन देने की व्यवस्था बनाई जाए।
-एसीपी प्रत्यावेदनों का तत्काल निपटारा कर, जिन कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ मिलना है, उनका एमएसीपी का वेतन निर्धारण किया जाए।
-संविदा, विशेष श्रेणी, तकनीकी, संचालन कर्मचारियों को नियमित किया जाए। 
-निगम मुख्यालय की तर्ज पर एवं नियमावली के मुताबिक नियमित कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।
-ऋषिकेश डिपो स्थित डीजल पंप के संदर्भ में आ रही आपत्तियों का तत्काल निपटारा किया जाए।
-कार्यशालाओं में स्पेयर पार्ट्स, लूब्रिकेंट्स, टायर, ट्यूब की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति की जाए, जिससे बसों का संचालन सुचारू हो सके।
-देहरादून के सभी डिपो में नई ई-टिकटिंग मशीनों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
-राज्य कर्मचारियों की भांति परिवहन निगम कर्मचारियों को भी मकान किराया भत्ता, 11 प्रतिशत डीए, कार्यशाला कर्मचारियों को प्रदूषण भत्ता, चिकित्सा भत्ता, धुलाई भत्ता भी लागू किया जाए। कोरोना महामारी के दौरान जो भत्ते बंद किए गए थे, उन्हें दोबारा शुरू किया जाए।
-शासनादेश के अनुरूप सभी सवर्ग की प्रोन्नति दीपावली से पहले सुनिश्चित की जाए।
-कोविड-19 के तहत परिचालक संवर्ग से प्रोन्नति में किलोमीटर की बाध्यता को समाप्त किया जाए। कोविड में जिन कर्मचारियों की मृत्यु हो चुकी है, उनके परिजनों को सरकार के आदेशानुसार मुआवजे का भुगतान किया जाए।

विस्तार

22 हजार उपनल कर्मचारियों ने मानदेय बढ़ोतरी को नाकाफी करार देते हुए इस महीने के आखिर से आंदोलन की चेतावनी दी है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने मानदेय संशोधन संबंधी जो फार्मूला कैबिनेट में पेश किया, वह उपनल कर्मचारी महासंघ को मंजूर नहीं है। 

उपनल कर्मचारियों ने 56 दिन आंदोलन किया था

महासंघ का आरोप है कि उप समिति ने कैबिनेट में तय फार्मूला न रखकर कुछ और ही फार्मूला प्रस्तुत किया है। उपनल कर्मचारियों ने इसे उनके साथ छलावा करार दिया है। बुधवार को इस संबंध में उपनल कर्मचारी महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में रोष व्यक्त किया गया। प्रदेश अध्यक्ष कुशाग्र जोशी ने कहा कि उपनल कर्मचारियों ने 56 दिन आंदोलन किया। इसके बाद कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और गणेश जोशी ने आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करवा दिया।

 

मंत्रियों ने उस वक्त कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर सहमति जताई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से उप समिति बनाई गई। कर्मचारियों ने उप समिति के सम्मुख प्रस्तुत होकर अपनी मांगे बताई थीं। लेकिन उप समिति ने कैबिनेट में जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, उस पर कर्मचारी महासंघ की कोई सहमति नहीं थी। 

कहा कि आगामी कैबिनेट में अगर उप समिति सही फामूर्ले पर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करती है तो महासंघ अक्तूबर माह के अंत में पुन: आंदोलन के लिए बाध्य होगा। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष विवेक भट्ट ने कर्मचारी महासंघ की ओरसे समस्त कर्मचारियों से आह्वान किया यदि उनकी मांगें नहीं मानी जातीं तो वे आंदोलन के लिए तैयार रहें। बैठक में प्रदेश महामंत्री हेमंत सिंह रावत, सभापति विनोद गोदियाल, उपाध्यक्ष विनय प्रसाद, राकेश राणा, मनोज सेमवाल आदि मौजूद रहे।


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रोडवेज कर्मचारियों ने मांगें पूरी न होने पर दिया आंदोलन का नोटिस



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Author: riteshkucc01

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