उत्तराखंड : कोरोनाकाल में बैंक खातों पर साइबर हमला, अब बीपी और ऑक्सीजन लेवल नापने वाले एप से ठगी 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  


सार

अब जालसाज ओटीपी नंबर या अकाउंट की डिटेल मांगकर ठगी करने के साथ-साथ एप के जरिये ऑक्सीजन लेवल, शुगर, बीपी चेक करने के नाम पर भी लूटने लगे हैं।

ख़बर सुनें

वैश्विक महामारी कोरोना में साइबर ठगी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। साइबर ठग पहले फ्री में कोविड टेस्ट करवाने और वैक्सीन पंजीकरण के नाम पर लोगों को चूना लगा रहे थे। अब बीपी, ऑक्सीजन लेवल और शुगर मापने के एप डाउनलोड करवाने के बहाने ठगी कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों को आगाह करने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी की है।

कोरोना से मौत : मृत्यु प्रमाणपत्र में स्पष्ट नहीं मौत का कारण, आश्रितों को कैसे मिलेगा लाभ

कोरोना महामारी के इस दौर में ऑक्सीमीटर, शुगर, बीपी की जांच करने वाले उपकरणों की मांग बढ़ी है। होम क्वारंटीन मरीज इसे खरीद रहे हैं। उसे देखते हुए इंटरनेट पर साइबर ठग सक्रिय हैं। साइबर अपराधी जालसाजी के नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं।

उत्तराखंड : केंद्र से राज्य को मिली 1.19 लाख कोविड वैक्सीन, 18 से 44 आयु वर्ग को आज से लगाए जा रहे टीके

अब जालसाज ओटीपी नंबर या अकाउंट की डिटेल मांगकर ठगी करने के साथ-साथ एप के जरिये ऑक्सीजन लेवल, शुगर, बीपी चेक करने के नाम पर भी लूटने लगे हैं। प्ले स्टोर पर कई थर्ड पार्टी एप और एडवरटाइजमेंट वाले एप उपभोक्ताओं को लालच में फंसाकर डाउनलोड कराए जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने अब लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। इसके लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर लोगों से अपील की जा रही है। 

ऐसे करते हैं ठगी 
ऑक्सीमीटर से मिलते जुलते एप डाउनलोड करने के बाद उसे एक्टीवेट करने के लिए साइबर ठग फिंगरप्रिंट मांगते हैं। इससे बायोमीट्रिक डेटा ठगों के पास पहुंच जाता है। इसमें व्यक्तिगत फोटो और डेटा चोरी होने का भी खतरा है। क्योंकि यह इंस्टालेशन के दौरान स्टोरेज और गैलरी की अनुमति मांगता है। उंगली बॉयोमेट्रिक्स के लिए रखते ही डेटा लीक होने लगता है।

साइबर सेफ्टी मुहिम के तहत उत्तराखंड व हरिद्वार पुलिस ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर कर स्मार्टफोन ऑक्सीमीटर, शुगर व बीपी नापने वाले एप से बचने की सलाह दी है। जिला साइबर क्राइम सुंदरम शर्मा ने कहा कि आजकल सोशल मीडिया के यूजर ज्यादा हैं और थोड़ा सा सतर्क रहकर ठगी से बच सकते हैं।

– ठगी से बचने के लिए फोन में सीमित एप ही डाउनलोड करें 
– डाउनलोड करने से पहले एप की रेटिंग, कितने यूजर हैं, इसे चेक करें।
–  रेटिंग और यूजर के जरिये पता लग सकता है कि एप सेफ है या नहीं।
– कमेंट सेक्शन में लोगों द्वारा दिए गए फीडबैक की जांच कर लें।
– हाई रेटिंग एप जिनकी रेटिंग 3 प्लस हो, उसी एप को तरजीह दें। 
– सोशल मीडिया पर एडवरटाइजमेंट वाले एप डाउनलोड न करें। 

कोरोना महामारी के इस दौरान में साइबर ठग लोगों को नए-नए ढंग से ठग रहे हैं। ऐसे में लोगों से अपील है कि वह किसी भी अनजाने लिंक पर क्लिक न करें। इसके साथ ही किसी भी ऑक्सीमीटर, शुगर व बीपी नापने वाले एप को अपने मोबाइल में डाउनलोड न करें। 
सेंथिल अवूदई कृष्णराज एस, एसएसपी हरिद्वार

विस्तार

वैश्विक महामारी कोरोना में साइबर ठगी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। साइबर ठग पहले फ्री में कोविड टेस्ट करवाने और वैक्सीन पंजीकरण के नाम पर लोगों को चूना लगा रहे थे। अब बीपी, ऑक्सीजन लेवल और शुगर मापने के एप डाउनलोड करवाने के बहाने ठगी कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों को आगाह करने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी की है।

कोरोना से मौत : मृत्यु प्रमाणपत्र में स्पष्ट नहीं मौत का कारण, आश्रितों को कैसे मिलेगा लाभ

कोरोना महामारी के इस दौर में ऑक्सीमीटर, शुगर, बीपी की जांच करने वाले उपकरणों की मांग बढ़ी है। होम क्वारंटीन मरीज इसे खरीद रहे हैं। उसे देखते हुए इंटरनेट पर साइबर ठग सक्रिय हैं। साइबर अपराधी जालसाजी के नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं।

उत्तराखंड : केंद्र से राज्य को मिली 1.19 लाख कोविड वैक्सीन, 18 से 44 आयु वर्ग को आज से लगाए जा रहे टीके

अब जालसाज ओटीपी नंबर या अकाउंट की डिटेल मांगकर ठगी करने के साथ-साथ एप के जरिये ऑक्सीजन लेवल, शुगर, बीपी चेक करने के नाम पर भी लूटने लगे हैं। प्ले स्टोर पर कई थर्ड पार्टी एप और एडवरटाइजमेंट वाले एप उपभोक्ताओं को लालच में फंसाकर डाउनलोड कराए जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने अब लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। इसके लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर लोगों से अपील की जा रही है। 

ऐसे करते हैं ठगी 

ऑक्सीमीटर से मिलते जुलते एप डाउनलोड करने के बाद उसे एक्टीवेट करने के लिए साइबर ठग फिंगरप्रिंट मांगते हैं। इससे बायोमीट्रिक डेटा ठगों के पास पहुंच जाता है। इसमें व्यक्तिगत फोटो और डेटा चोरी होने का भी खतरा है। क्योंकि यह इंस्टालेशन के दौरान स्टोरेज और गैलरी की अनुमति मांगता है। उंगली बॉयोमेट्रिक्स के लिए रखते ही डेटा लीक होने लगता है।

साइबर सेफ्टी मुहिम के तहत उत्तराखंड व हरिद्वार पुलिस ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर कर स्मार्टफोन ऑक्सीमीटर, शुगर व बीपी नापने वाले एप से बचने की सलाह दी है। जिला साइबर क्राइम सुंदरम शर्मा ने कहा कि आजकल सोशल मीडिया के यूजर ज्यादा हैं और थोड़ा सा सतर्क रहकर ठगी से बच सकते हैं।


आगे पढ़ें

साइबर एक्सपर्ट की राय 



Source link

Author: riteshkucc01

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *