इमरती देवी को पीडब्ल्यूडी ने बंगला खाली करने का नोटिस, चंद घंटों में इंजीनियर का तबादला


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मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट में रहीं पूर्व महिला और बाल विकास मंत्री इमरती देवी का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनके गुस्से का कारण पीडब्ल्यूडी की तरफ से भेजा गया नोटिस है, जिसमें उनसे सरकारी बंगला खाली करने को कहा गया। इमरती देवी ने पीडब्ल्यूडी की नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन शाम होते-होते इमरती देवी को नोटिस भेजने वाले का इंजीनियर ट्रांसफर जरूर हो गया।

दरअसल, हाल ही में हुए उप-चुनाव में इमरती देवी डबरा विधानसभा से हार गईं, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज को अपना इस्तीफा भेज दिया। जो अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। इसी बीच पीडब्ल्यूडी की तरफ से इमरती देवी को नोटिस आया। इसमें लिखा था कि उन्हें सरकारी बंगला मंत्री पद के कार्यकाल तक के लिए मिला था। अब इमरती देवी के पास कोई पद नहीं है। उन्हें ग्वालियर के झांसी रोड पर मिले सरकारी बंगले का खाली करना होगा और उसे पीडब्ल्यूडी को सौंपना होगा।

इंजीनियर ओमहरि शर्मा के द्वारा भेजा गया यह नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया। एजीएम किशोर कन्याल ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने मंत्री को नोटिस भेजा। वह बेहद गलत है। क्योकि इमरती देवा अभी भी मंत्री हैं और किसी मंत्री को ऐसे नोटिस जारी करना सही नहीं है। इमरती देवी को नोटिस मिलने के बाद शाम को आदेश आया कि पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ओमहरि शर्मा का ट्रांसफर ग्वालियर से भोपाल कर दिया गया है।

इमरती देवी सिंधिया की वफादार मानी जाती हैं। इससे पहले वह कमलनाथ सरकार में बाल एवं महिला विकास मंत्रालय में मंत्री पद पर थी।ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से बगावत करके बीजेपी में शामिल होने के बाद इमरती देवी ने भी कमलनाथ सरकार दामन छोड़ दिया। वह भी उन 22 विधायकों में शामिल थी, जिन्होंने सिंधिया के साथ कांग्रेस बगावत की थी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद बनी बीजेपी सरकार ने इमरती देवी को वही पद दिया जो उन्हें कमलनाथ सरकार में मिला था। पर वह डबरा से चुनाव हार गईं, जिसके बाद उन्हें अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ा, हलांकि इमरती देवी का इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है।
 

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट में रहीं पूर्व महिला और बाल विकास मंत्री इमरती देवी का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनके गुस्से का कारण पीडब्ल्यूडी की तरफ से भेजा गया नोटिस है, जिसमें उनसे सरकारी बंगला खाली करने को कहा गया। इमरती देवी ने पीडब्ल्यूडी की नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन शाम होते-होते इमरती देवी को नोटिस भेजने वाले का इंजीनियर ट्रांसफर जरूर हो गया।

दरअसल, हाल ही में हुए उप-चुनाव में इमरती देवी डबरा विधानसभा से हार गईं, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज को अपना इस्तीफा भेज दिया। जो अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। इसी बीच पीडब्ल्यूडी की तरफ से इमरती देवी को नोटिस आया। इसमें लिखा था कि उन्हें सरकारी बंगला मंत्री पद के कार्यकाल तक के लिए मिला था। अब इमरती देवी के पास कोई पद नहीं है। उन्हें ग्वालियर के झांसी रोड पर मिले सरकारी बंगले का खाली करना होगा और उसे पीडब्ल्यूडी को सौंपना होगा।

इंजीनियर ओमहरि शर्मा के द्वारा भेजा गया यह नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया। एजीएम किशोर कन्याल ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने मंत्री को नोटिस भेजा। वह बेहद गलत है। क्योकि इमरती देवा अभी भी मंत्री हैं और किसी मंत्री को ऐसे नोटिस जारी करना सही नहीं है। इमरती देवी को नोटिस मिलने के बाद शाम को आदेश आया कि पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ओमहरि शर्मा का ट्रांसफर ग्वालियर से भोपाल कर दिया गया है।

इमरती देवी सिंधिया की वफादार मानी जाती हैं। इससे पहले वह कमलनाथ सरकार में बाल एवं महिला विकास मंत्रालय में मंत्री पद पर थी।ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से बगावत करके बीजेपी में शामिल होने के बाद इमरती देवी ने भी कमलनाथ सरकार दामन छोड़ दिया। वह भी उन 22 विधायकों में शामिल थी, जिन्होंने सिंधिया के साथ कांग्रेस बगावत की थी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद बनी बीजेपी सरकार ने इमरती देवी को वही पद दिया जो उन्हें कमलनाथ सरकार में मिला था। पर वह डबरा से चुनाव हार गईं, जिसके बाद उन्हें अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ा, हलांकि इमरती देवी का इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है।

 



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Author: riteshkucc01

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