अपनत्व अभियान : कोरोना ने छीना मासूमों से पिता का साया, आर्थिक संकट के बोझ तले दबा परिवार

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न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 05 Jun 2021 08:00 PM IST

सार

उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें 7617566171 पर व्हाट्सअप के जरिए या [email protected] पर मेल करें।

परिवार आर्थिक संकट के बोझ तले दब गया
– फोटो : pixabay

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विस्तार

कोरोना ने दो मासूमों के सिर से पिता का साया छीन लिया। देहरादून के चुक्खुवाला निवासी इस परिवार का इकलौते कमाने वाले सदस्य के चले जाने से परिवार आर्थिक संकट के बोझ तले दब गया है। स्कूल वैन चलाकर वह परिवार का गुजारा करते थे। 8 मई को संक्रमण से पिता की मौत के बाद से बच्चों की मां भी सदमे में है। अब ढाई साल के बेटे और 6 साल की बेटी की परवरिश मां के लिए चिंता बन गई है। 

उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें 7617566171 पर व्हाट्सअप के जरिए या [email protected] पर मेल करें।

रुड़की : बच्चों की पढ़ाई पर भी संकट, घर में कोई कमाने वाला नहीं रहा

कोरोना ने दो बच्चों के सिर से उनके पिता का सहारा छीन लिया है। परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं रहा। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर भी संकट आ गया है। परिवार को किसी का सहारा नहीं मिला तो दो जून की रोटी का भी संकट खड़ा हो जाएगा। मूल रूप से पौड़ी निवासी युवक कई साल पहले रुड़की में आकर रहने लगे थे। वे कभी होटल में तो कभी आर्मी कैंटीन में काम करके किसी तरह घर चला रहे थे। कुछ दिन पहले लक्ष्मण की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। रुड़की के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दो दिन पहले हालत ज्यादा बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। उनके दो बेटे हैं जिनकी पढ़ाई पर संकट आ गया है। 

हल्द्वानी : पति की मौत के बाद परिवार की रोजी रोटी का संकट

हल्द्वानी। तल्ली बमौरी क्षेत्र के एक व्यक्ति की कोविड से मौत के बाद पत्नी और दो बच्चों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही बड़ी बेटी के लिए आगे की शिक्षा के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। यह व्यक्ति ठेकेदारी कर परिवार चला रहे थे लेकिन अचानक तबियत बिगड़ने के बाद 19 मई को उनका देहावसान हो गया। उनकी मृत्यु के बाद भी मुश्किल कम न हुई। परिवार में उनकी धर्मपत्नी सदमे में थीं। वहीं बड़ी बेटी, छोटा भाई और दादी तीनों कोविड पॉजिटिव आ गए। अब महिला के सामने बच्चों की परवरिश और शिक्षा की समस्या आ खड़ी हुई है। 

पिथौरागढ़ : चार बच्चों के सिर से कोरोना ने छीन लिया पिता का साया

कोरोना के कारण अस्कोट के चार बच्चों के सिर से पिछले माह पिता का साया छिन गया है। परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य खोने के कारण चारों बच्चों की जिम्मेदारी अब मां पर आ गई है।  क्षेत्र के एक व्यक्ति लंबे समय से गुजरात की एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। कोरोना की दूसरी लहर ने अप्रैल में चारों बच्चों से पिता का साया छीन लिया। बच्चों के पिता नौकरी के दौरान ही संक्रमित हो गए थे। स्थिति बिगड़ने लगी और दो मई को उन्होंने दम तोड़ दिया। अंतिम समय में परिजन उनका चेहरा तक नहीं देख सके। पिता की मौत के बाद पत्नी पर दुखों का पहाड़ तो टूटा ही उनकी 20, 18, 14, 12 वर्षीय तीन बेटी और एक बेटा भी बेसहारा से हो गए हैं। पत्नी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है। सबसे बड़ी 20 वर्षीय बेटी स्नातक में पढ़ रहीं हैं, जबकि अन्य बच्चे भी विद्यार्थी हैं।

उत्तरकाशी : दो बेटियों ने महामारी में पिता को खोया

चिन्यालीसौड़ ब्लाक के बड़ी मणी गांव निवासी एक युवक की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। पंडिताई कर घर का खर्च चलाने वाला ये युवक अप्रैल में एक शादी समारोह में पंडिताई (पूजा पाठ) के लिए गया था, जिसे तबियत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया और उपचार के दौरान 7 मई को उसकी मौत हो गई। परिवार के एक मात्र कमाऊ सदस्य इस युवा की मौत से उसकी पत्नी के समक्ष स्वयं के साथ दो मासूम बेटियों के पालन पोषण का संकट उत्पन्न हो गया है। 

कोटद्वार : कोरोना ने छीना पिता का साया, सरकार से सहारे की दरकार

कोरोना की दूसरी लहर कई परिवारों को जीवनभर का ऐसा जख्म दे गई, जिसकी लंबे समय तक भरपाई संभव नहीं है। दुगड्डा विकासखंड के सिमलना न्याय पंचायत क्षेत्र के एक गांव में कोरोना ने तीन बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया। अब उनके लालन पालन की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर आ गई है। परिजन बताते हैं कि घर का अकेला कमाने वाला 48 साल का एक व्यक्ति कुमाऊं क्षेत्र के रुद्रपुर में एक ढाबे पर नौकरी कर रहा था। परिवार में सब कुछ ठीक चल रहा था। अप्रैल अंतिम सप्ताह में वह कोरोना से संक्रमित हो गए। लोगों ने उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन तीन दिन बाद ही उनकी मौत हो गई। वे अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। एक बेटा 20 साल का है, जबकि उससे छोटी दो बहनें हैं। तीनों बच्चे अब गांव में मां के साथ रह रहे हैं। मां के सामने उनके पालन पोषण के साथ ही आगे की पढ़ाई को लेकर चिंता बनी हुई है। 

ऋषिकेश : पिता के प्यार के प्यार से वंचित हुए फलक, नामरा और उज्जैर

कोरोना संक्रामक बीमारी में डोईवाला निवासी युवक का निधन हुआ तो उनका परिवार बेसहारा हो गया। वे ही अपने परिवार में एक मात्र कमाने वाले सदस्य थे। कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा था। बीते 24 अप्रैल को वे जिंदगी की जंग हार गए। वे अपने पीछे अपनी पत्नी , दो बेटियां और एक बेटा है जिनके भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।

तीन बच्चों के पालन-पोषण के लिए सरकारी मदद की जरूरत

टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक में एक परिवार के मुखिया की कोरोना से मौत हो गई। इससे तीन बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई है। होटल में नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा घर का मुखिया दो साल से बेरोजगार था। 16 मई को कोविड केयर सेंटर में उनकी मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण और शिक्षा के लिए महिला को सरकारी मदद की दरकार है। 

जौनुपर ब्लॉक के एक गांव में परिवार के मुखिया की मौत होने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। खेतीबाड़ी कर परिवार भरण-पोषण कर रहे परिवार के मुखिया को अप्रैल में बुखार आने पर देहरादून एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। अब चार नाबालिग बच्चों की जिम्मेदारी महिला पर आ गई है। घर की माली हालत को देखते हुए इस पीड़ित परिवार को मदद की दरकार है।

जौनपुर ब्लाक में ही तीन और अनाथ बच्चों को सरकारी मदद की जरूरत है। पत्नी के बाद पति की भी मौत हो गई।  तीन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठने से बच्चे मुफलिसी में जीवन काट रहे हैं। दो साल से भाई-बहन के पालन-पोषण में पिता का हाथ बंटा रहा 22 वर्षीय बेटा भी दो साल से बेरोजगार है। पिता की मौत के बाद युवक को भाई-बहन के पालन-पोषण के लिए सरकारी मदद की जरूरत है। 



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Author: riteshkucc01

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