Ujjain: पढ़िए जब पिता को बेटी के साथ दुष्कर्म की सजा दी, तो जज ने आखिर किया क्या?– News18 Hindi


उज्जैन. बेटी के साथ दुष्कर्म मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में अजीबो-गरीब वाक्या हुआ. विशेष न्यायाधीश ने पिता को मृत्युदंड न देकर उम्र कैद की सजा सुनाई. लेकिन, ये सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने मनुस्मृति का श्लोक पढ़ा. इस श्लोक का सीधा-सीधा अर्थ है कि जो भी अपराध करे, वह अवश्य दंडनीय है. चाहे वह पिता, माता, गुरु, पत्नी, मित्र या पुरोहित ही क्यों न हो.

दरअसल, अपनी ही बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) डॉ. आरती शुक्ला पांडेय ने फैसला सुनाया और 2,500 रुपए का जुर्माना लगाते हुए पिता को उम्र कैद दे दी.

11 साल की थी तब पिता ने की थी हरकत

उप संचालक अभियोजन डॉ साकेत व्यास के मुताबिक, घटना 6 अप्रैल 2019 की है. 5वीं में पढ़ने वाली 11 साल की बच्ची ने चिमनगंज मंडी थाने में अपने ही पिता के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत की थी. बच्ची ने शिकायत में कहा था कि पिता एक साल से दुष्कर्म कर रहा है. उसने बताया कि पिता पेशे से ड्राइवर हैं. बीच-बीच में बाहर जाते रहते हैं.

इस वजह से छुपाया था मां से

बेटी ने शिकायत में लिखा था कि एक साल पहले जब वह कमरे में बैठी थी तो पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया. उसके बाद पांच-छह महीने में कई बार गंदी हरकत कर चुके हैं. पिता ने धमकी दी कि किसी से बताया तो जान से मार डालूंगा. डर के मारे इस बात को अपनी मां से भी नहीं बताई. एक दिन पेट में तकलीफ हुई तो मां को पिता की हरकत के बारे में बताया.

मां के साथ थाने पहुंचकर दर्ज कराई रिपोर्ट

पति की इस घिनौनी हरकत को सुनने के बाद पत्नी अपनी बेटी को लेकर खुद ही चिमनगंज मंडी थाने पहुंच गई. वहां पर आरोपी पिता के खिलाफ आईपीसी की धारा 376(2) (एफ) (एन), 376(एबी), 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कराया.

फैसले से पहले मनुस्मृति का यह श्लोक सुनाया

पिताचार्य: सुह्न्माताभार्यापुत्र: पुरोहित:।

नादण्डयोनामरोज्ञास्ति य: स्वधर्मे न तिष्ठति।।

अर्थात, जो भी अपराध करे, वह अवश्य दंडनीय है। चाहे वह पिता, माता, गुरु पत्नी, मित्र या पुरोहित ही क्यों न हो?





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Author: riteshkucc01

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