mauni amavasya 2021 :मौन डुबकी की लहर में ढही कोविड प्रतिबंधों की दीवार


prayagraj news : मौनी अमावस्या पर प्रयागराज माघ मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
– फोटो : prayagraj

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मौनी अमावस्या पर बृहस्पतिवार को आस्था के रेला ने कोरोना संक्रमण के प्रतिबंधों को दिन भर के लिए ताक पर रख दिया। संगम पर मौन डुबकी की होड़ में शामिल श्रद्धालुओं ने साबित कर दिया कि उनके लिए आस्था से बड़ी कोई चीज नहीं है। मेला प्रशासन की ओर से सैनिटाइजेशन, थर्मल स्केनिंग और एंटीजन टेस्ट के व्यापक इंतजामों के बावजूद भक्ति के ज्वार में सबकुछ पीछे छूट गया। स्नान घाटों पर न दूरी का पालन हो सका न भंडारों में सैनिटाइजेशन का। बिना मास्क के ही लोगों ने धक्कामुक्की करते हुए पुण्य की डुबकी लगाई और अन्न-वस्त्र का दान किया।

माघ मेले के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर कोविड प्रोटोकॉल भीड़ के आगे खुद-ब-खुद ध्वस्त हो गया। न खुद पर लोग काबू रख सके ना ही प्रशासन का जोर चल सका। आम दिनों की तरह ही लोग बिना किसी चिंता के मौन डुबकी लगाने के लिए गठरी में आटा-दाल लेकर चल पड़े। यह तब हुआ जब महज पखवारे भर पहले 25 जनवरी को 32 से अधिक संन्यासियों और कल्पवासियों में कोरोना संक्रमण पाया जा चुका है।

माघ मेले में तब ऐसे शिविरों को मेला प्रशासन न उखड़वा दिया था, लेकिन मौनी अमावस्या पर बिना किसी एहतियात के संतों-भक्तों और कल्पवासियों का सैलाब उमड़ने पर एक बारगी सांसों का थम जाना स्वाभाविक है, लेकिन स्नान पर्व के उत्साह ने सारे प्रतिबंधों, नियमों को दरकिनार कर दिया। हालत यह थी कि संगम के करीब एक किमी लंबे घाट से जुड़ी सर्कुलेटिंग एरिया भीड़ से खचाखच पैक रही। कहीं किसी को कपड़े बदलने तक की खाली जगह नहीं मिल रही थी। इसी भीड़ में लाखों श्रद्धालु ऐसे थे, जिन्हें चेहरे पर मास्क लगाने की भी सुध नहीं रही।

हालांकि नागवासुकि से पहले निराला चौराहे के पास थर्मल स्केनिंग के लिए कैंप लगा रहा। इसी तरह परेड में प्रवेश करते ही किला मार्ग पर थर्मल स्केनिंग के लिए शिविर लगा रहा, लेकिन इस जन सैलाब में किसी को रोकना और थर्मल स्केनिंग करना संभव नहीं हो सका। हालांकि लाउडस्पीकर से कोरोना संक्रमण की पहचान और इससे बचाव के उपाय दिन भर बताए जाते रहे। जगह-जगह एंटीजन टेस्ट के लिए मोबाइल वैन खड़ी रह गई। 

प्रशासन का दावा, 30 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

मौनी अमावस्या पर संगम क्षेत्र की हर सड़कें श्रद्धालुओं की भीड़ से भरी नजर आईं। हर तरफ का भक्ति भाव का रंग चढ़ा रहा। बृहस्पतिवार की देर शाम तक मेला प्रशासन ने 30 लाख श्रद्धालुओं के संगम में पुण्य की डुबकी लगाने का दावा किया।
संगम की रेती पर बृहस्पतिवार को आस्था, भक्ति और विश्वास की लहरें उठी तो उठती रहीं। मेला प्रशासन ने पहली बार दिन के दो बजे भीड़ का आंकड़ा जारी किया। दो बजे 26 लाख, चार बजे 28 लाख और छह बजे 30 लाख लोगों के संगम में स्नान का अधिकारिक दावा किया गया। 

मौनी अमावस्या पर बृहस्पतिवार को आस्था के रेला ने कोरोना संक्रमण के प्रतिबंधों को दिन भर के लिए ताक पर रख दिया। संगम पर मौन डुबकी की होड़ में शामिल श्रद्धालुओं ने साबित कर दिया कि उनके लिए आस्था से बड़ी कोई चीज नहीं है। मेला प्रशासन की ओर से सैनिटाइजेशन, थर्मल स्केनिंग और एंटीजन टेस्ट के व्यापक इंतजामों के बावजूद भक्ति के ज्वार में सबकुछ पीछे छूट गया। स्नान घाटों पर न दूरी का पालन हो सका न भंडारों में सैनिटाइजेशन का। बिना मास्क के ही लोगों ने धक्कामुक्की करते हुए पुण्य की डुबकी लगाई और अन्न-वस्त्र का दान किया।



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Author: riteshkucc01

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