24 दिन में पांच लाख लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य


कोरोना वैक्सीन टीके का परीक्षण
– फोटो : iStock

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एक तरफ दिल्ली में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा हैए वहीं केंद्र सरकार ने देश की राजधानी को 24 दिन में पांच लाख लोगों को कम से कम पहली खुराक देने के लिए पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा है। आगामी 6 मार्च तक इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अभियान पर जोर दिया जा रहा है लेकिन कर्मचारियों में टीकाकरण के प्रति झिझक के चलते काफी नुकसान भी हुआ है। बीते 16 जनवरी से दिल्ली सहित देशभर में कोरोना टीकाकरण शुरू हुआ था तब से लेकर बीते सोमवार तक दिल्ली में 13 हजार से ज्यादा खुराक बर्बाद हो चुकी हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने टीके की बर्बाद हुईं खुराक पर एक रिपोर्ट तैयार की है जिसके तहत अब तक 4 फीसदी कोविशील्ड और 17 फीसदी कोवाक्सिन टीके की खुराक बेकार हो गईं। ऐसा इसलिए क्योंकि एक बार वॉयल को खोलने के बाद चार घंटे में सभी खुराक का इस्तेमाल करना पड़ता है। कोविशील्ड के एक वॉयल में 10 और कोवाक्सिन के वॉयल में 20 डोज होती हैं। दिल्ली सरकार के ही अनुसार केंद्र की ओर से 2.64 लाख कोविशील्ड और 20 हजार कोवाक्सिन की खुराक उपलब्ध कराई गई थीं।

अब तक 13586 खुराक बेकार हो चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो एक वॉयल में अधिक खुराक होने की वजह से भी काफी नुकसान हुआ है। वहीं कर्मचारियों का पर्याप्त संख्या में न पहुंचना भी एक कारण है। हालांकि एक स्थिति यह भी है कि टीकाकरण शुरू होने के पहले तीन सप्ताह में खुराक काफी बर्बाद हुईं हैंए लेकिन अब सभी केंद्रों को इस ओर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की डॉण् सुनीला गर्ग का कहना है कि केंद्र सरकार ने अधिकतम 10 फीसदी तक ही नुकसान होने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि कोवाक्सिन के एक वॉयल में 20 खुराक होने से काफी नुकसान हुआ है। दिल्ली में 184 केंद्रों पर टीकाकरण हो रहा हैए जिनमें से 33 केंद्रों पर कोवाक्सिन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें केंद्र सरकार के दिल्ली एम्स सफदरजंग और आरएमएल सहित छह अस्पताल भी शामिल हैं। इन अस्पतालों में शुरुआत से ही टीकाकरण को लेकर काफी चुनौतियां देखने को मिली हैं। स्वास्थ्य कर्मचारियों में टीका को लेकर भ्रांतियों के चलते यहां सबसे ज्यादा खुराक बर्बाद हुई हैं।

सरकारी और निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं 2.78 लाख स्वास्थ्यकर्मी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दिल्ली में सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले 2.78 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों को कम से कम एक खुराक देने या फिर अपाइंटमेंट देने के लिए 20 फरवरी तक समय दिया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा सकता है लेकिन इसे 25 फरवरी तक समाप्त करना होगा। ठीक इसी तरह से आगामी 6 मार्च तक सभी फ्रंटलाइन वर्करों को भी पहली खुराक मिल जानी चाहिए। कोविन वेबसाइट के अनुसार दिल्ली में 6.39 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी और फ्रंटलाइन वर्कर पंजीकृत हैं। अब तक 1.46 लाख कर्मचारियों को टीका लगाया जा चुका है। ऐसे में आगामी 24 दिन में पांच लाख लोगों को भी टीका दिया जाना है।

एक तरफ दिल्ली में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा हैए वहीं केंद्र सरकार ने देश की राजधानी को 24 दिन में पांच लाख लोगों को कम से कम पहली खुराक देने के लिए पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा है। आगामी 6 मार्च तक इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अभियान पर जोर दिया जा रहा है लेकिन कर्मचारियों में टीकाकरण के प्रति झिझक के चलते काफी नुकसान भी हुआ है। बीते 16 जनवरी से दिल्ली सहित देशभर में कोरोना टीकाकरण शुरू हुआ था तब से लेकर बीते सोमवार तक दिल्ली में 13 हजार से ज्यादा खुराक बर्बाद हो चुकी हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने टीके की बर्बाद हुईं खुराक पर एक रिपोर्ट तैयार की है जिसके तहत अब तक 4 फीसदी कोविशील्ड और 17 फीसदी कोवाक्सिन टीके की खुराक बेकार हो गईं। ऐसा इसलिए क्योंकि एक बार वॉयल को खोलने के बाद चार घंटे में सभी खुराक का इस्तेमाल करना पड़ता है। कोविशील्ड के एक वॉयल में 10 और कोवाक्सिन के वॉयल में 20 डोज होती हैं। दिल्ली सरकार के ही अनुसार केंद्र की ओर से 2.64 लाख कोविशील्ड और 20 हजार कोवाक्सिन की खुराक उपलब्ध कराई गई थीं।

अब तक 13586 खुराक बेकार हो चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो एक वॉयल में अधिक खुराक होने की वजह से भी काफी नुकसान हुआ है। वहीं कर्मचारियों का पर्याप्त संख्या में न पहुंचना भी एक कारण है। हालांकि एक स्थिति यह भी है कि टीकाकरण शुरू होने के पहले तीन सप्ताह में खुराक काफी बर्बाद हुईं हैंए लेकिन अब सभी केंद्रों को इस ओर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की डॉण् सुनीला गर्ग का कहना है कि केंद्र सरकार ने अधिकतम 10 फीसदी तक ही नुकसान होने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि कोवाक्सिन के एक वॉयल में 20 खुराक होने से काफी नुकसान हुआ है। दिल्ली में 184 केंद्रों पर टीकाकरण हो रहा हैए जिनमें से 33 केंद्रों पर कोवाक्सिन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें केंद्र सरकार के दिल्ली एम्स सफदरजंग और आरएमएल सहित छह अस्पताल भी शामिल हैं। इन अस्पतालों में शुरुआत से ही टीकाकरण को लेकर काफी चुनौतियां देखने को मिली हैं। स्वास्थ्य कर्मचारियों में टीका को लेकर भ्रांतियों के चलते यहां सबसे ज्यादा खुराक बर्बाद हुई हैं।

सरकारी और निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं 2.78 लाख स्वास्थ्यकर्मी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दिल्ली में सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले 2.78 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों को कम से कम एक खुराक देने या फिर अपाइंटमेंट देने के लिए 20 फरवरी तक समय दिया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा सकता है लेकिन इसे 25 फरवरी तक समाप्त करना होगा। ठीक इसी तरह से आगामी 6 मार्च तक सभी फ्रंटलाइन वर्करों को भी पहली खुराक मिल जानी चाहिए। कोविन वेबसाइट के अनुसार दिल्ली में 6.39 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी और फ्रंटलाइन वर्कर पंजीकृत हैं। अब तक 1.46 लाख कर्मचारियों को टीका लगाया जा चुका है। ऐसे में आगामी 24 दिन में पांच लाख लोगों को भी टीका दिया जाना है।



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Author: riteshkucc01

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