हिमाचल: मोनाल पक्षी की कलगी वाली टोपी पहनने पर रोक, आदेश जारी


मोनाल की कलगी वाली टोपी पर रोक।
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश के वन विभाग ने मोनाल पक्षी की कलगी को टोपी पर लगाकर पहनने पर रोक लगा दी है।  प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति मोनाल पक्षी के किसी भी भाग को धारण करेगा, उसके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आदेश की अवहेलना पर 3 से 7 साल की जेल और कम से कम 10,000 रुपये जुर्माना लग सकता है। पीसीसीएफ वन्यजीव डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत मोनाल पक्षी अनुसूची-1 में शामिल है और अधिनियम 5 क के अनुसार इस पक्षी का कोई भाग जैसे कलगी, ट्रॉफी इस अधिनियम की परिभाषा में आते हैं।

ऐसे में मुख्य वन्यजीव संरक्षक की अनुमति के बगैर कलगी या ट्रॉफी को अपने कब्जे में रखना कानूनी अपराध है। सिर्फ जिस व्यक्ति के पास मुख्य वन्यजीव संरक्षक द्वारा जारी स्वामित्व प्रमाण पत्र होगा, वही जंगली जानवर की ट्रॉफी को अपने कब्जे में रख सकता है। केंद्र सरकार ने 2003 में जंगली जानवरों की ट्रॉफी के पंजीकरण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में मोनाल पक्षी की कलगी का सार्वजनिक रूप से किसी उत्सव या खुलेआम टोपी पर लगाकर प्रदर्शन करना अवैध माना जाएगा।

हिमाचल का राज्य पक्षी रह चुका है मोनाल
मोनाल हिमाचल का राज्य पक्षी रह चुका है। राज्य में इसकी कलगी को टोपी पर लगाकर पहनने की परंपरा रही है। इसके लिए इस पक्षी का शिकार तक होता रहा है। यह दुर्लभ होती पक्षी प्रजाति भी है। उल्लेखनीय है कि हिमालयन मोनाल उत्तराखंड का भी राज्य पक्षी है। 

हिमाचल प्रदेश के वन विभाग ने मोनाल पक्षी की कलगी को टोपी पर लगाकर पहनने पर रोक लगा दी है।  प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति मोनाल पक्षी के किसी भी भाग को धारण करेगा, उसके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आदेश की अवहेलना पर 3 से 7 साल की जेल और कम से कम 10,000 रुपये जुर्माना लग सकता है। पीसीसीएफ वन्यजीव डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत मोनाल पक्षी अनुसूची-1 में शामिल है और अधिनियम 5 क के अनुसार इस पक्षी का कोई भाग जैसे कलगी, ट्रॉफी इस अधिनियम की परिभाषा में आते हैं।

ऐसे में मुख्य वन्यजीव संरक्षक की अनुमति के बगैर कलगी या ट्रॉफी को अपने कब्जे में रखना कानूनी अपराध है। सिर्फ जिस व्यक्ति के पास मुख्य वन्यजीव संरक्षक द्वारा जारी स्वामित्व प्रमाण पत्र होगा, वही जंगली जानवर की ट्रॉफी को अपने कब्जे में रख सकता है। केंद्र सरकार ने 2003 में जंगली जानवरों की ट्रॉफी के पंजीकरण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में मोनाल पक्षी की कलगी का सार्वजनिक रूप से किसी उत्सव या खुलेआम टोपी पर लगाकर प्रदर्शन करना अवैध माना जाएगा।

हिमाचल का राज्य पक्षी रह चुका है मोनाल

मोनाल हिमाचल का राज्य पक्षी रह चुका है। राज्य में इसकी कलगी को टोपी पर लगाकर पहनने की परंपरा रही है। इसके लिए इस पक्षी का शिकार तक होता रहा है। यह दुर्लभ होती पक्षी प्रजाति भी है। उल्लेखनीय है कि हिमालयन मोनाल उत्तराखंड का भी राज्य पक्षी है। 



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Author: riteshkucc01

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