हिमाचल : उर्मिला ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कहा- 87 रुपये में तो रिफाइंड भी नहीं आता

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हितेश शर्मा, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 22 Jul 2021 10:57 AM IST

सार

उर्मिला रावत ने बताया कि इसी स्कूल में शिक्षक का वेतन 60 से 70 हजार रुपये के बीच है। वहीं, मिड-डे मील वर्कर का मानदेय महज 2600 रुपये। जबकि, वह भी स्कूल में सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक अपनी सेवाएं देती हैं। 

मिड डे मील वर्कर उर्मिला रावत
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल के सांगना गांव की मिड डे मील वर्कर ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर दुखड़ा सुनाया है। पत्र में मिड-डे मील वर्कर उर्मिला रावत ने पीएम से कहा कि पिछले 16 साल से दोपहर भोजन योजना में सेवाएं दे रही हूं। महज 87 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उनकी सेवा का भुगतान किया जा रहा है। प्रधानमंत्री बताएं कि महंगाई के इस दौर में क्या 87 रुपये में कोई अपने पूरे परिवार का पालन पोषण कर सकता है। जबकि, इस राशि में बाजार से रिफाइंड भी नहीं मिल पाता। 

 पत्र की एक प्रति उन्होंने भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री को भी प्रेषित की है। उन्होंने पत्र में कहा कि वह राजकीय प्राथमिक स्कूल सांगना में वह डेढ़ दशक से बतौर मिड-डे मील वर्कर सेवाएं दे रही हैं। उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से 87 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। उर्मिला रावत ने बताया कि इसी स्कूल में शिक्षक का वेतन 60 से 70 हजार रुपये के बीच है। वहीं, मिड-डे मील वर्कर का मानदेय महज 2600 रुपये। जबकि, वह भी स्कूल में सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक अपनी सेवाएं देती हैं।

बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने का जिम्मा उस पर है। बावजूद इसके कर्मचारियों के बीच आर्थिक असमानता बेहद ज्यादा है। एमडीएम वर्करों का वेतन कम से कम 15 हजार रुपये किया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र के अंत में यह भी जिक्र किया कि इस पत्र को पढ़कर वह इस दिशा में कोई न कोई ठोस कदम जरूर उठाएंगे। 

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल के सांगना गांव की मिड डे मील वर्कर ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर दुखड़ा सुनाया है। पत्र में मिड-डे मील वर्कर उर्मिला रावत ने पीएम से कहा कि पिछले 16 साल से दोपहर भोजन योजना में सेवाएं दे रही हूं। महज 87 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उनकी सेवा का भुगतान किया जा रहा है। प्रधानमंत्री बताएं कि महंगाई के इस दौर में क्या 87 रुपये में कोई अपने पूरे परिवार का पालन पोषण कर सकता है। जबकि, इस राशि में बाजार से रिफाइंड भी नहीं मिल पाता। 

 पत्र की एक प्रति उन्होंने भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री को भी प्रेषित की है। उन्होंने पत्र में कहा कि वह राजकीय प्राथमिक स्कूल सांगना में वह डेढ़ दशक से बतौर मिड-डे मील वर्कर सेवाएं दे रही हैं। उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से 87 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। उर्मिला रावत ने बताया कि इसी स्कूल में शिक्षक का वेतन 60 से 70 हजार रुपये के बीच है। वहीं, मिड-डे मील वर्कर का मानदेय महज 2600 रुपये। जबकि, वह भी स्कूल में सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक अपनी सेवाएं देती हैं।

बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने का जिम्मा उस पर है। बावजूद इसके कर्मचारियों के बीच आर्थिक असमानता बेहद ज्यादा है। एमडीएम वर्करों का वेतन कम से कम 15 हजार रुपये किया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र के अंत में यह भी जिक्र किया कि इस पत्र को पढ़कर वह इस दिशा में कोई न कोई ठोस कदम जरूर उठाएंगे। 



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Author: riteshkucc01

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