हाईकोर्ट की टिप्पणी: निरंकुश या सम्राट के रूप में काम नहीं कर सकते स्वास्थ्य निदेशक

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अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 21 Jul 2021 06:44 PM IST

सार

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह अत्यंत खेदजनक है कि निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण इस तथ्य से पूरी तरह बेखबर हैं कि उन्हें सौंपा गया कार्यालय उपयोग के लिए है, न कि दुरुपयोग के लिए। 

 हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तीन उम्मीदवारों को प्रयोगशाला सहायक एलोपैथी के पद पर नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। इन्हें 22 उम्मीदवारों की वेटिंग लिस्ट में से तीन उम्मीदवारों के इस पद पर उपस्थिति न देने के कारण अवसर दिया जाना कानूनन वाजिब था। स्वास्थ्य विभाग को यह नियुक्तियां एक सप्ताह के भीतर करने के आदेश दिए गए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह अत्यंत खेदजनक है कि निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण इस तथ्य से पूरी तरह बेखबर हैं कि उन्हें सौंपा गया कार्यालय उपयोग के लिए है, न कि दुरुपयोग के लिए। निदेशक निरंकुश या सम्राट के रूप में कार्य नहीं कर सकता है।

लोकतंत्र में वह समानता और एकजुटता के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य हैं। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार 4 सितंबर, 2017 को निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को प्रयोगशाला सहायक के 102 रिक्त पद भरने के लिए सिफारिश भेजी थी। इन 102 उम्मीदवारों में से 22 उम्मीदवारों ने ज्वाइन नहीं किया। 20 सितंबर, 2019 को चयन आयोग ने वेटिंग पैनल से 22 उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश करने का अनुरोध किया। इन्हें 23 अक्तूबर, 2019 को पत्र के माध्यम से नियुक्ति की पेशकश की गई थी। इनमें तीन उम्मीदवारों ने ज्वाइन नहीं किया। फलस्वरूप प्रार्थी और अन्य दो उम्मीदवारों ने उन्हें नियुक्ति पत्र देने के लिए निदेशक से गुहार लगाई, लेकिन उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई।

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तीन उम्मीदवारों को प्रयोगशाला सहायक एलोपैथी के पद पर नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। इन्हें 22 उम्मीदवारों की वेटिंग लिस्ट में से तीन उम्मीदवारों के इस पद पर उपस्थिति न देने के कारण अवसर दिया जाना कानूनन वाजिब था। स्वास्थ्य विभाग को यह नियुक्तियां एक सप्ताह के भीतर करने के आदेश दिए गए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह अत्यंत खेदजनक है कि निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण इस तथ्य से पूरी तरह बेखबर हैं कि उन्हें सौंपा गया कार्यालय उपयोग के लिए है, न कि दुरुपयोग के लिए। निदेशक निरंकुश या सम्राट के रूप में कार्य नहीं कर सकता है।

लोकतंत्र में वह समानता और एकजुटता के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य हैं। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार 4 सितंबर, 2017 को निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को प्रयोगशाला सहायक के 102 रिक्त पद भरने के लिए सिफारिश भेजी थी। इन 102 उम्मीदवारों में से 22 उम्मीदवारों ने ज्वाइन नहीं किया। 20 सितंबर, 2019 को चयन आयोग ने वेटिंग पैनल से 22 उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश करने का अनुरोध किया। इन्हें 23 अक्तूबर, 2019 को पत्र के माध्यम से नियुक्ति की पेशकश की गई थी। इनमें तीन उम्मीदवारों ने ज्वाइन नहीं किया। फलस्वरूप प्रार्थी और अन्य दो उम्मीदवारों ने उन्हें नियुक्ति पत्र देने के लिए निदेशक से गुहार लगाई, लेकिन उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई।



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Author: riteshkucc01

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