सेहत व आमदनी के लिए वरदान बना हरड़, बाजार में मिल रहे अच्छे दाम


डॉ. कमल शर्मा, डीन, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी 
– फोटो : अमर उजाला

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डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी की ओर से हरड़ पर किए गए शोध के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। महाविद्यालय ने हरड़ के पौधों पर ग्राफ्ट कर पांच अलग-अलग प्रकार की किस्में तैयार की हैं। हरड़ की खेती उन क्षेत्रों में काफी फायदेमंद है, जहां अत्यधिक गर्मी और सिंचाई सुविधा की कमी हो। बंदर हरड़ को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

सर्दियों में कोहरे का भी इस पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसे लंबे समय तक सूखाकर रखा जा सकता है। इसके भंडारण में कोई समस्या नहीं। गेहूं और मक्की के अलावा यह नकदी फसल का अच्छा विकल्प है। संस्थान की ओर से करीब 12 वर्ष पहले लगाए गए पौधों पर हरड़ की फसल तैयार हो गई है। हरड़ के बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं। यह फसल बाजार में हाथोंहाथ बिक रही है। 

स्थानीय किसानों की ओर से तैयार किया गया हरड़ बाजार में 30 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। कई किसानों ने उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी से पौधे लेकर दो से तीन कनाल भूमि पर हरड़ की खेती कर 40 से 50 हजार रुपये की आमदन प्राप्त की है। संस्थान को भी तीन कनाल क्षेत्र में लगाए हरड़ के पौधों पर तैयार फसल बेचकर 35 हजार रुपये की आय हुई।

औषधीय गुणों से भरपूर है हरड़
हरड़ औषधीय गुणों से भरपूर है। कब्ज, दिल, लिवर, फेफड़ों की बीमारी तथा खांसी-जुकाम के लिए बनाई जाने वाली आयुर्वेदिक दवाइयों में इसका इस्तेमाल होता है। 

डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी की ओर से हरड़ पर किए गए शोध के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। महाविद्यालय ने हरड़ के पौधों पर ग्राफ्ट कर पांच अलग-अलग प्रकार की किस्में तैयार की हैं। हरड़ की खेती उन क्षेत्रों में काफी फायदेमंद है, जहां अत्यधिक गर्मी और सिंचाई सुविधा की कमी हो। बंदर हरड़ को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

सर्दियों में कोहरे का भी इस पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसे लंबे समय तक सूखाकर रखा जा सकता है। इसके भंडारण में कोई समस्या नहीं। गेहूं और मक्की के अलावा यह नकदी फसल का अच्छा विकल्प है। संस्थान की ओर से करीब 12 वर्ष पहले लगाए गए पौधों पर हरड़ की फसल तैयार हो गई है। हरड़ के बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं। यह फसल बाजार में हाथोंहाथ बिक रही है। 

स्थानीय किसानों की ओर से तैयार किया गया हरड़ बाजार में 30 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। कई किसानों ने उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी से पौधे लेकर दो से तीन कनाल भूमि पर हरड़ की खेती कर 40 से 50 हजार रुपये की आमदन प्राप्त की है। संस्थान को भी तीन कनाल क्षेत्र में लगाए हरड़ के पौधों पर तैयार फसल बेचकर 35 हजार रुपये की आय हुई।

औषधीय गुणों से भरपूर है हरड़

हरड़ औषधीय गुणों से भरपूर है। कब्ज, दिल, लिवर, फेफड़ों की बीमारी तथा खांसी-जुकाम के लिए बनाई जाने वाली आयुर्वेदिक दवाइयों में इसका इस्तेमाल होता है। 


संस्थान ने कुछ वर्ष पहले अपने बगीचे में हरड़ के 20 पौधे लगाए थे। इन्हें ग्राफ्ट कर पांच अलग-अलग किस्में तैयार की गई हैं। इससे अच्छी पैदावार शुरू हो गई है। हमीरपुर और कांगड़ा जिले के कुछ किसानों को भी पौधे उपलब्ध करवाए थे। इससे किसानों को अच्छी आमदन शुरू हो गई है। 

– डॉ. कमल शर्मा, डीन, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी



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Author: riteshkucc01

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