सादगी के लिए जाने जाते थे पठानिया, निधन की खबर सुन विपक्ष के लोगों की आंखें भी नम


वन मंत्री, पूर्व सांसद समेत अन्य नेताओं ने पठानिया के निधन पर शोक जताया।
– फोटो : अमर उजाला

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किसी भी शादी समारोह में जाकर जब सुजान सिंह पठानिया जेब से नोट निकालकर शगुन डालते थे तो विधायक का वह सादगी भरा अंदाज हर किसी के दिल को छू जाता था। सादगी और देसीपन से लोगों के दिलों पर राज करने वाले पठानिया के निधन की खबर से फतेहपुर में सन्नाटा छा गया। कार्यकर्ताओं-नेताओं से लेकर विपक्ष के लोगों तक की आंखें नम हो गईं।  वहीं, आज के नेताओं से अलग मिजाज के पठानिया को बिना सिक्योरिटी और समर्थकों के जनता के बीच रहना बेहद पसंद था।

राजनीतिक कार्यक्रम, शादी या अन्य समारोह में उनके साथ हमेशा एक-दो व्यक्ति ही होते थे। हर रोज के बोलचाल में वह स्थानीय भाषा पहाड़ी का ही इस्तेमाल करते थे। उनकी यही खूबियां क्षेत्र के बड़े जनमानस के साथ उनके जुड़ाव को मजबूत करती थीं। इसके अलावा 44 वर्ष के राजनीतिक जीवन में वह अपनी ईमानदारी के लिए भी प्रसिद्ध रहे। पूरे राजनीतिक जीवन में उन पर कभी भी भ्रष्टाचार जैसा कोई आरोप नहीं लगा। चार दशकों से अधिक समय तक फतेहपुर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे सुजान सिंह पठानिया के निधन से फतेहपुर में एक युग का अंत हो गया।

सच हुआ पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का मजाक
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की मजाक में कही बात आखिरकार आधी सच हो गई। दरअसल, अमरिंदर सिंह 2017 के विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए फतेहपुर पहुंचे थे। यहां जनसभा को संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने मंच से मजाकिया अंदाज में कहा था कि यह चुनाव संभवतया हम दोनों का अंतिम चुनाव है, हम दोनों ही 75 साल से ज्यादा उम्र के हैं। यह उम्र अब आराम करने और नाती-पोतों के साथ खेलने की है। हालांकि जनसभा के तुरंत बाद जब पत्रकारों ने सुजान सिंह पठानिया से पूछा कि क्या यह आपका अंतिम चुनाव है, तो पठानिया ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह भविष्य की बात है।

सुजान सिंह पठानिया(फाइल फोटो)

किसी भी शादी समारोह में जाकर जब सुजान सिंह पठानिया जेब से नोट निकालकर शगुन डालते थे तो विधायक का वह सादगी भरा अंदाज हर किसी के दिल को छू जाता था। सादगी और देसीपन से लोगों के दिलों पर राज करने वाले पठानिया के निधन की खबर से फतेहपुर में सन्नाटा छा गया। कार्यकर्ताओं-नेताओं से लेकर विपक्ष के लोगों तक की आंखें नम हो गईं।  वहीं, आज के नेताओं से अलग मिजाज के पठानिया को बिना सिक्योरिटी और समर्थकों के जनता के बीच रहना बेहद पसंद था।

राजनीतिक कार्यक्रम, शादी या अन्य समारोह में उनके साथ हमेशा एक-दो व्यक्ति ही होते थे। हर रोज के बोलचाल में वह स्थानीय भाषा पहाड़ी का ही इस्तेमाल करते थे। उनकी यही खूबियां क्षेत्र के बड़े जनमानस के साथ उनके जुड़ाव को मजबूत करती थीं। इसके अलावा 44 वर्ष के राजनीतिक जीवन में वह अपनी ईमानदारी के लिए भी प्रसिद्ध रहे। पूरे राजनीतिक जीवन में उन पर कभी भी भ्रष्टाचार जैसा कोई आरोप नहीं लगा। चार दशकों से अधिक समय तक फतेहपुर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे सुजान सिंह पठानिया के निधन से फतेहपुर में एक युग का अंत हो गया।

सच हुआ पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का मजाक

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की मजाक में कही बात आखिरकार आधी सच हो गई। दरअसल, अमरिंदर सिंह 2017 के विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए फतेहपुर पहुंचे थे। यहां जनसभा को संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने मंच से मजाकिया अंदाज में कहा था कि यह चुनाव संभवतया हम दोनों का अंतिम चुनाव है, हम दोनों ही 75 साल से ज्यादा उम्र के हैं। यह उम्र अब आराम करने और नाती-पोतों के साथ खेलने की है। हालांकि जनसभा के तुरंत बाद जब पत्रकारों ने सुजान सिंह पठानिया से पूछा कि क्या यह आपका अंतिम चुनाव है, तो पठानिया ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह भविष्य की बात है।

सुजान सिंह पठानिया(फाइल फोटो)



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Author: riteshkucc01

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