शोध: कैंसर, दिल और लिवर की गंभीर बीमारियों से बचाएंगे दूध के दांत, संभालकर रखें

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धर्मेंद्र पंडित, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 22 Jul 2021 10:56 AM IST

सार

 राजकीय दंत महाविद्यालय शिमला के पीडियाट्रिक एंड प्रीवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपक चौहान ने अपने शोध में इसका खुलासा किया है। 

डॉ. दीपक चौहान।
– फोटो : अमर उजाला

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बच्चों के दूध के दांत कैंसर, दिल और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों से आपको बचा सकते हैं। बच्चे के दूध के दांत में पाए जाने वाली स्टेम कोशिकाएं (सेल) जीवन रक्षक का काम करती हैं। बड़ी बात यह है कि जिस बच्चे का दूध का दांत होगा, उस दांत से बच्चे के अलावा उसके भाई-बहन और माता-पिता को भी गंभीर बीमारी से बचाने का काम कर सकता है। राजकीय दंत महाविद्यालय शिमला के पीडियाट्रिक एंड प्रीवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपक चौहान ने अपने शोध में इसका खुलासा किया है। 

स्टेम कोशिका या मूल कोशिका ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर के किसी भी अंग को विकसित करने की क्षमता होती है। ये कोशिकाएं शरीर की दूसरी कोशिका के रूप में भी खुद को ढाल सकती हैं। इन कोशिकाओं को शरीर की किसी भी कोशिका की मरम्मत के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दूध के दांत में स्टेम कोशिकाएं जीवित रहती हैं।

डेंटल पल्प दांत के भीतर एक नरम हिस्सा होता है। जहां यह जीवित टिशू से बनी शक्तिशाली मेसेनकाइमल स्टेम कोशिकाएं होती हैं। डॉ. चौहान ने कहा कि दिल की बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए ये कोशिकाएं क्षतिग्रस्त या मृत टिशू को भी ठीक कर सकती हैं। 20 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का जब दांत टूट जाता है तो वह दोबारा नहीं आता है।

ऐसी स्थिति में इन कोशिकाओं से दांत भी उगाया जा सकता है। इनमें 80 से अधिक जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारियों का उपचार करने की क्षमता होती है। स्टेम सेल की यह खासियत है कि इन्हें कई तरह से निकाला जा सकता है। इन्हें अंबलिकल कोर्ड, अंबलिकल ब्लड, प्लेसेंटा, बोन मैरो, दांत आदि से निकाल सकते हैं। इन टूटे दांतों को कोल्ड मिल्क और अन्य प्रीजर्वेटिव्स या अन्य सॉल्यूशन आदि में संरक्षित करना होगा। इसके बाद इसे टूथ बैंक तक पहुंचाना होगा। लुधियाना, चंडीगढ़, अंबाला आदि शहरों मेें इस तरह के टूथ बैंक हैं। टूथ बैंक में इन स्टेम कोशिकाओं को क्रायोजेनिक टैंक में -150 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान में संरक्षित रखा जाता है। 

डेंटल कॉलेज में परिजनों को वापस दिए जाते हैं दूध के दांत 
– डेंटल कॉलेज शिमला में बच्चों के दूध के  दांत निकालने के बाद परिजनों को दे दिए जाते हैं। डॉक्टर इन्हें संभालकर रखने की सलाह दे रहे हैं। 5 से 12 साल के बीच दूध के दांत टूटते हैं, जिससे समय रहते नए दांत उग सकें। अगर इन दांतों को नहीं निकाला जाता है तो यह तकलीफ भी करते हैं।

विस्तार

बच्चों के दूध के दांत कैंसर, दिल और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों से आपको बचा सकते हैं। बच्चे के दूध के दांत में पाए जाने वाली स्टेम कोशिकाएं (सेल) जीवन रक्षक का काम करती हैं। बड़ी बात यह है कि जिस बच्चे का दूध का दांत होगा, उस दांत से बच्चे के अलावा उसके भाई-बहन और माता-पिता को भी गंभीर बीमारी से बचाने का काम कर सकता है। राजकीय दंत महाविद्यालय शिमला के पीडियाट्रिक एंड प्रीवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपक चौहान ने अपने शोध में इसका खुलासा किया है। 

स्टेम कोशिका या मूल कोशिका ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर के किसी भी अंग को विकसित करने की क्षमता होती है। ये कोशिकाएं शरीर की दूसरी कोशिका के रूप में भी खुद को ढाल सकती हैं। इन कोशिकाओं को शरीर की किसी भी कोशिका की मरम्मत के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दूध के दांत में स्टेम कोशिकाएं जीवित रहती हैं।

डेंटल पल्प दांत के भीतर एक नरम हिस्सा होता है। जहां यह जीवित टिशू से बनी शक्तिशाली मेसेनकाइमल स्टेम कोशिकाएं होती हैं। डॉ. चौहान ने कहा कि दिल की बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए ये कोशिकाएं क्षतिग्रस्त या मृत टिशू को भी ठीक कर सकती हैं। 20 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का जब दांत टूट जाता है तो वह दोबारा नहीं आता है।

ऐसी स्थिति में इन कोशिकाओं से दांत भी उगाया जा सकता है। इनमें 80 से अधिक जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारियों का उपचार करने की क्षमता होती है। स्टेम सेल की यह खासियत है कि इन्हें कई तरह से निकाला जा सकता है। इन्हें अंबलिकल कोर्ड, अंबलिकल ब्लड, प्लेसेंटा, बोन मैरो, दांत आदि से निकाल सकते हैं। इन टूटे दांतों को कोल्ड मिल्क और अन्य प्रीजर्वेटिव्स या अन्य सॉल्यूशन आदि में संरक्षित करना होगा। इसके बाद इसे टूथ बैंक तक पहुंचाना होगा। लुधियाना, चंडीगढ़, अंबाला आदि शहरों मेें इस तरह के टूथ बैंक हैं। टूथ बैंक में इन स्टेम कोशिकाओं को क्रायोजेनिक टैंक में -150 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान में संरक्षित रखा जाता है। 

डेंटल कॉलेज में परिजनों को वापस दिए जाते हैं दूध के दांत 

– डेंटल कॉलेज शिमला में बच्चों के दूध के  दांत निकालने के बाद परिजनों को दे दिए जाते हैं। डॉक्टर इन्हें संभालकर रखने की सलाह दे रहे हैं। 5 से 12 साल के बीच दूध के दांत टूटते हैं, जिससे समय रहते नए दांत उग सकें। अगर इन दांतों को नहीं निकाला जाता है तो यह तकलीफ भी करते हैं।



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Author: riteshkucc01

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