लामपुर डिटेंशन सेंटर में साफ-सफाई व चिकित्सा सुविधाओं के अभाव पर कोर्ट ने जताई नाराजगी


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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने लामपुर डिटेंशन सेंटर में साफ-सफाई व चिकित्सा सुविधा के अभाव पर नाराजगी जताई है। अदालत ने दिल्ली सरकार को सेंटर में दयनीय स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल उचित कदम उठाने का निर्देश दिया है। इस सेंटर में विदेशी नागरिकों को उनके देश भेजने से पहले रखा जाता है। आरोप है कि सेंटर में चिकित्सा सुविधाओं के अलावा साफ सफाई की भी सुविधा का अभाव है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति ए जे भंभानी की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग को उनके द्वारा उठाए गए कदमों के संबंध में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने विभाग को रिपोर्ट के साथ सेंटर में वर्तमान स्थिति और सुधार के लिए उठाए गए कदमों की तस्वीरें और वीडियोग्राफी भी पेेेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सुनवाई 18 फरवरी तय की है।
खंडपीठ ने यह निर्देश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद दिए। रिपोर्ट में अदालत का ध्यान साफ-सफाई व चिकित्सा सुविधाओं के अभाव की ओर दिलवाया गया है। हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष 9 नवंबर को सत्र न्यायाधीश को उक्त सेंटर का निरीक्षा कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
दरअसल अदालत ने एक महिला रूमा बीबी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्देश दिया था। उसके पति आसिफ हुसैन के पाकिस्तान नागरिक के होने पर उसे सेंटर में भेजा गया था। महिला ने आरोप लगाया कि जेल की सजा पूरी होने के बावजूद उसके पति को सेंटर में गैरकानूनी रूप से बंधक बना कर रखा गया है।
याची के अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि सेंटर में साफ-सफाई/स्वच्छता, चिकित्सा सुविधाओं की कमी है और बंदियों को उनके परिवार और वकीलों से संवाद करने की अनुमति नहीं दिए जाने और उन्हें कोई कानूनी सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी।
महिला ने अपनी याचिका में कहा कि वह अपने पति और दो बच्चों के साथ कोलकाता में रहती थी और 2012 में हुसैन को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से सरकारी गोपनीयता कानून और विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन्हें निचली अदालत ने दोषी करार देते हुए नौ साल की सजा सुनाई थी और सजा पूरी होने के बाद उन्हें पिछले साल अप्रैल में जेल से रिहा कर इस सेंटर में भेज दिया गया था।

नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने लामपुर डिटेंशन सेंटर में साफ-सफाई व चिकित्सा सुविधा के अभाव पर नाराजगी जताई है। अदालत ने दिल्ली सरकार को सेंटर में दयनीय स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल उचित कदम उठाने का निर्देश दिया है। इस सेंटर में विदेशी नागरिकों को उनके देश भेजने से पहले रखा जाता है। आरोप है कि सेंटर में चिकित्सा सुविधाओं के अलावा साफ सफाई की भी सुविधा का अभाव है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति ए जे भंभानी की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग को उनके द्वारा उठाए गए कदमों के संबंध में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने विभाग को रिपोर्ट के साथ सेंटर में वर्तमान स्थिति और सुधार के लिए उठाए गए कदमों की तस्वीरें और वीडियोग्राफी भी पेेेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सुनवाई 18 फरवरी तय की है।

खंडपीठ ने यह निर्देश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद दिए। रिपोर्ट में अदालत का ध्यान साफ-सफाई व चिकित्सा सुविधाओं के अभाव की ओर दिलवाया गया है। हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष 9 नवंबर को सत्र न्यायाधीश को उक्त सेंटर का निरीक्षा कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

दरअसल अदालत ने एक महिला रूमा बीबी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान निर्देश दिया था। उसके पति आसिफ हुसैन के पाकिस्तान नागरिक के होने पर उसे सेंटर में भेजा गया था। महिला ने आरोप लगाया कि जेल की सजा पूरी होने के बावजूद उसके पति को सेंटर में गैरकानूनी रूप से बंधक बना कर रखा गया है।

याची के अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि सेंटर में साफ-सफाई/स्वच्छता, चिकित्सा सुविधाओं की कमी है और बंदियों को उनके परिवार और वकीलों से संवाद करने की अनुमति नहीं दिए जाने और उन्हें कोई कानूनी सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी।

महिला ने अपनी याचिका में कहा कि वह अपने पति और दो बच्चों के साथ कोलकाता में रहती थी और 2012 में हुसैन को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से सरकारी गोपनीयता कानून और विदेशी अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन्हें निचली अदालत ने दोषी करार देते हुए नौ साल की सजा सुनाई थी और सजा पूरी होने के बाद उन्हें पिछले साल अप्रैल में जेल से रिहा कर इस सेंटर में भेज दिया गया था।



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Author: riteshkucc01

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