ब्रैकल मामला: विदेश में बैठे कंपनी निदेशक को जारी होगा रेड कार्नर नोटिस


पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

किन्नौर जिले में 960 मेगावाट के जंगी थोपन पोवारी बिजली प्रोजेक्ट को वर्ष 2006 में हासिल करने वाली ब्रैकल कॉरपोरेशन कंपनी के विदेश में बैठे एक निदेशक के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी होगा। विजिलेंस ने सीआईडी के जरिये इंटरपोल से इसके लिए संपर्क साधा है।

सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में करोड़ों के प्रोजेक्ट को सरकार से धोखाधड़ी कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल करने की बात सामने आई है। पता चला है कि पावर प्रोजेक्ट लेने के लिए ब्रैकल की ओर से कई फर्जी दस्तावेज लगाए थे। मामले में एक निदेशक पहले ही जमानत पर है, जबकि दूसरे के नीदरलैंड में होने की आशंका है। उससे पूछताछ जरूरी है, ऐसे में अब रेड कार्नर नोटिस की मदद से उसे हिमाचल प्रदेश में लाया जाएगा।

बता दें कि फर्जी दस्तावेजों की बात सामने आने के बाद 2009 में कंपनी से प्रोजेक्ट वापस ले लिया और ब्रैकल का करीब 260 करोड़ का अपफ्रंट प्रीमियम जब्त करने के लिए कैबिनेट ने फैसला ले लिया, लेकिन बाद में उसे लौटाने की मंजूरी दे दी। 2017 में जयराम सरकार बनने के बाद कैबिनेट ने अपफ्रंट प्रीमियम न लौटाने के फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी और मामला विजिलेंस के पास भेज दिया।

किन्नौर जिले में 960 मेगावाट के जंगी थोपन पोवारी बिजली प्रोजेक्ट को वर्ष 2006 में हासिल करने वाली ब्रैकल कॉरपोरेशन कंपनी के विदेश में बैठे एक निदेशक के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी होगा। विजिलेंस ने सीआईडी के जरिये इंटरपोल से इसके लिए संपर्क साधा है।

सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में करोड़ों के प्रोजेक्ट को सरकार से धोखाधड़ी कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल करने की बात सामने आई है। पता चला है कि पावर प्रोजेक्ट लेने के लिए ब्रैकल की ओर से कई फर्जी दस्तावेज लगाए थे। मामले में एक निदेशक पहले ही जमानत पर है, जबकि दूसरे के नीदरलैंड में होने की आशंका है। उससे पूछताछ जरूरी है, ऐसे में अब रेड कार्नर नोटिस की मदद से उसे हिमाचल प्रदेश में लाया जाएगा।

बता दें कि फर्जी दस्तावेजों की बात सामने आने के बाद 2009 में कंपनी से प्रोजेक्ट वापस ले लिया और ब्रैकल का करीब 260 करोड़ का अपफ्रंट प्रीमियम जब्त करने के लिए कैबिनेट ने फैसला ले लिया, लेकिन बाद में उसे लौटाने की मंजूरी दे दी। 2017 में जयराम सरकार बनने के बाद कैबिनेट ने अपफ्रंट प्रीमियम न लौटाने के फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी और मामला विजिलेंस के पास भेज दिया।



Source link

Author: riteshkucc01

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *