चमोली जलप्रलयः ऋषिगंगा आपदा के बाद बांधों पर पूर्व चेतावनी को पुख्ता करेंगे इसरो और जल आयोग


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ऋषिगंगा आपदा के बाद अब बांधों की सुरक्षा और उनके ऊपर बनी झीलों को लेकर नए सिरे से चिंतन शुरू हो गया है। इसके तहत अब उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के बांधों पर पूर्व चेतावनी (अर्ली वार्निंग सिस्टम) प्रक्रिया को पुख्ता करने की कवायद शुरू हो गई है। वहीं, यूजेवीएनएल ने 12 परियोजनाओं से हाथ पीछे खींच लिए हैं।

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यूजेवीएनएल ने तय किया है कि सभी बांधों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम को पुख्ता करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और केंद्रीय जल आयोग की मदद ली जाएगी।

यह दोनों संगठन मिलकर बांधों की सुरक्षा को परखने करने के साथ ही यहां पूर्व चेतावनी की प्रक्रिया पुख्ता करेंगे ताकि भविष्य में कोई आपदा होने की स्थिति में बचाव आसान किया जा सके। संचयी पर्यावरणीय प्रभाव की रिपोर्ट के आधार पर यह भी तय किया गया है कि उत्तरकाशी और चमोली में यूजेवीएनएल की 12 परियोजनाएं अब कभी शुरू ही नहीं होंगी। 
 

पाला मनेरी-480 मेगावाट- उत्तरकाशी
भैरों घाटी – 381 मेगावाट – उत्तरकाशी
तमक लाता- 190 मेगावाट – चमोली
ऋषिगंगा-1- 70 मेगावाट – चमोली
ऋषिगंगा-2- 35 मेगावाट – चमोली
उर्गम-2- 7.5 मेगावाट – चमोली
लिमचागाड- 3.5 मेगावाट – उत्तरकाशी
असीगंगा-1 – 4.5 मेगावाट – उत्तरकाशी
असीगंगा-2 – 4.5 मेगावाट – उत्तरकाशी
असीगंगा-3 – 9 मेगावाट – उत्तरकाशी
कालीगाड – 9 मेगावाट – उत्तरकाशी
पिलंगाड-2 – 4 मेगावाट – उत्तरकाशी
 

यूजेवीएनएल के एमडी संदीप सिंघल ने बताया कि राज्य सरकार ने विभिन्न अध्ययनों के बाद तय किया है कि अलकनंदा, भागीरथी, धौली गंगा, ऋषिगंगा आदि नदियों के अपर रिचेज (ऊपरी हिस्सों) में कोई भी पन बिजली परियोजना नहीं बनाई जाएगी। इसी के तहत पूर्व में ही इन कई प्रोजेक्ट को रोक दिया गया था।

हम इसरो और केंद्रीय जल आयोग की मदद से बांधों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम को और पुख्ता कर रहे हैं। उम्मीद है इसके बाद और बेहतर तरीके से किसी भी आपदा की पूर्व में ही जानकारी मिल सकेगी। 
संदीप सिंघल, एमडी, यूजेवीएनएल

ऋषिगंगा आपदा के बाद अब बांधों की सुरक्षा और उनके ऊपर बनी झीलों को लेकर नए सिरे से चिंतन शुरू हो गया है। इसके तहत अब उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के बांधों पर पूर्व चेतावनी (अर्ली वार्निंग सिस्टम) प्रक्रिया को पुख्ता करने की कवायद शुरू हो गई है। वहीं, यूजेवीएनएल ने 12 परियोजनाओं से हाथ पीछे खींच लिए हैं।

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यूजेवीएनएल ने तय किया है कि सभी बांधों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम को पुख्ता करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और केंद्रीय जल आयोग की मदद ली जाएगी।

यह दोनों संगठन मिलकर बांधों की सुरक्षा को परखने करने के साथ ही यहां पूर्व चेतावनी की प्रक्रिया पुख्ता करेंगे ताकि भविष्य में कोई आपदा होने की स्थिति में बचाव आसान किया जा सके। संचयी पर्यावरणीय प्रभाव की रिपोर्ट के आधार पर यह भी तय किया गया है कि उत्तरकाशी और चमोली में यूजेवीएनएल की 12 परियोजनाएं अब कभी शुरू ही नहीं होंगी। 

 


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Author: riteshkucc01

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