चमोली आपदा: 13 गांवों का मुख्यालय से संपर्क कटा, अपने गांवों में ही कैद हो गए नीती घाटी के 360 परिवार


छानी में रात बिताते लोग
– फोटो : अमर उजाला

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ऋषि गंगा की जल प्रलय के बाद से चीन सीमा क्षेत्र में 13 गांवों के 360 परिवार अपने गांवों में ही कैद होकर रह गए हैं। उनके सामने रोजगार और आवाजाही चुनौती बन गई है। कई लोगों की दुकानें तपोवन में थीं, लेकिन वहां का रास्ता क्षतिग्रस्त होने से लोग अपनी दुकानों तक नहीं जा पा रहे हैं। आपदा के बाद से ग्रामीण पूरी तरह से प्रशासन की मदद पर निर्भर हैं। ग्रामीण बार-बार अपने परिजनों से फोन पर बात कर अपनी परेशानियों को साझा कर रहे हैं।

सीमा क्षेत्र में होने के कारण नीती घाटी के गांवों को द्वितीय रक्षा पंक्ति के गांव भी कहते हैं और इन गांवों में भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। आपदा में जोशीमठ-मलारी हाईवे पर रैणी गांव में 90 मीटर लंबा मोटर पुल बह जाने से ग्रामीण पांच दिनों से गांवों में ही कैद हो गए हैं।

यह भी पढ़ें: चमोली जल प्रलय: अपने ही घरों में जाने से डर रहे ग्रामीण, पांच दिन से जंगलों में ऐसे बिता रहे रात, तस्वीरें…

यहां के कई ग्रामीणों की तपोवन औैर जोशीमठ में दुकानें हैं, लेकिन वह दुकान तक नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीण सुरांईथोटा बाजार से जरूरत का सामान खरीदकर घरों को लौट रहे हैं। पेंग गांव के शंकर सिंह का कहना है कि आपदा के बाद से जिंदगी सिमट गई है।

तोलमा गांव के संजय का कहना है कि उनकी जोशीमठ में दुकान है। आपदा के बाद से वह बेरोजगार घूम रहे हैं। सुरांईथोटा के सोहन की भी तपोवन में दुकान थी, लेकिन निचले क्षेत्र से संपर्क कट जाने के बाद से वह दुकान खोलने भी नहीं जा पा रहा है।

सोहन ने कहा कि यदि अधिक समय तक आवाजाही की कोई व्यवस्था नहीं की गई तो दिक्कतें बढ़ जाएंगी। सुकी गांव के प्रधान लक्ष्मण बुटोला का कहना है कि प्रशासन की ओर से दिए जा रहे राशन किट को घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है।  

इन गांवों का संपर्क कटा 
रैंणी चक लाता, पेंग, मुरंडा, लाता, तोलमा, जुग्जु, जुवा-ग्वाड़, सुकी, भलगांव, फाक्ती, लोंग, भंग्यूल और लोंग गांव। 

नीती घाटी के 13 गांवों में राशन किट औैर मेडिकल टीमें भेजी गई हैं। ग्रामीणों को किसी भी तरह से असुविधा नहीं होने दी जा रही है। ग्रामीणों के पास अभी पर्याप्त खाद्यान्न सामग्री है। किसी भी बीमार व्यक्ति को लाने व ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की गई है। गांवों में संचार व विद्युत की सुचारु आपूर्ति कराई जा रही है।
– स्वाति एस भदौरिया, डीएम, चमोली

ऋषि गंगा की जल प्रलय के बाद से चीन सीमा क्षेत्र में 13 गांवों के 360 परिवार अपने गांवों में ही कैद होकर रह गए हैं। उनके सामने रोजगार और आवाजाही चुनौती बन गई है। कई लोगों की दुकानें तपोवन में थीं, लेकिन वहां का रास्ता क्षतिग्रस्त होने से लोग अपनी दुकानों तक नहीं जा पा रहे हैं। आपदा के बाद से ग्रामीण पूरी तरह से प्रशासन की मदद पर निर्भर हैं। ग्रामीण बार-बार अपने परिजनों से फोन पर बात कर अपनी परेशानियों को साझा कर रहे हैं।

सीमा क्षेत्र में होने के कारण नीती घाटी के गांवों को द्वितीय रक्षा पंक्ति के गांव भी कहते हैं और इन गांवों में भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। आपदा में जोशीमठ-मलारी हाईवे पर रैणी गांव में 90 मीटर लंबा मोटर पुल बह जाने से ग्रामीण पांच दिनों से गांवों में ही कैद हो गए हैं।

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यहां के कई ग्रामीणों की तपोवन औैर जोशीमठ में दुकानें हैं, लेकिन वह दुकान तक नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीण सुरांईथोटा बाजार से जरूरत का सामान खरीदकर घरों को लौट रहे हैं। पेंग गांव के शंकर सिंह का कहना है कि आपदा के बाद से जिंदगी सिमट गई है।

तोलमा गांव के संजय का कहना है कि उनकी जोशीमठ में दुकान है। आपदा के बाद से वह बेरोजगार घूम रहे हैं। सुरांईथोटा के सोहन की भी तपोवन में दुकान थी, लेकिन निचले क्षेत्र से संपर्क कट जाने के बाद से वह दुकान खोलने भी नहीं जा पा रहा है।


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कोई व्यवस्था नहीं की गई तो दिक्कतें बढ़ जाएंगी



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Author: riteshkucc01

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