गरीब बच्चों को पढ़ा रहे हैं किसान, अब तक 90 बच्चे करा चुके हैं पाठशाला में पंजीकरण


गाजीपुर बॉर्डर पर लगी पाठशाला…
– फोटो : amar ujala

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नए कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बार्डर पर 76 दिनों से चल रहे आंदोलन में किसान डटे हुए हैं। जहां एक ओर मंच से आंदोलनकारी लगातार कृषि कानूनों की कमियों को गिनाते हुए सरकार के खिलाफ हमलावर हैं वहीं दूसरी ओर किसान आंदोलन स्थल के आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले गरीब बच्चों को पढ़ाने में भी जुटे हुए हैं। 

गाजीपुर बॉर्डर के आसपास की कालोनियों में रहने वाले  बच्चे आंदोलन स्थल पर चल रहे भंडारों में खाने के लिए आते हैं। यह सभी बच्चे बहुत ही गरीब परिवारों से हैं और शिक्षा से वंचित हैं। इन बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा किसानों ने उठाया है। 

बार्डर पर डटे युवाओं ने इन बच्चों के लिए एक पाठशाला चलाई हुई है।  पाठशाला का संचालन कर रहे भूपेंद्र यादव ने बताया कि आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में गरीब-मजदूरों के बच्चे पहुंचते हैं।

इनको प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उन्होंने अपने साथियों के साथ सावित्रीबाई फुले के नाम से एक पाठशाला का संचालन शुरू किया। भूपेंद्र ने बताया कि यहां आने वाले बच्चों का पहले पंजीकरण करते हैं। बच्चों को रोजाना दो पालियों में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा बच्चों को निशुल्क पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। 

नए कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बार्डर पर 76 दिनों से चल रहे आंदोलन में किसान डटे हुए हैं। जहां एक ओर मंच से आंदोलनकारी लगातार कृषि कानूनों की कमियों को गिनाते हुए सरकार के खिलाफ हमलावर हैं वहीं दूसरी ओर किसान आंदोलन स्थल के आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले गरीब बच्चों को पढ़ाने में भी जुटे हुए हैं। 

गाजीपुर बॉर्डर के आसपास की कालोनियों में रहने वाले  बच्चे आंदोलन स्थल पर चल रहे भंडारों में खाने के लिए आते हैं। यह सभी बच्चे बहुत ही गरीब परिवारों से हैं और शिक्षा से वंचित हैं। इन बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा किसानों ने उठाया है। 

बार्डर पर डटे युवाओं ने इन बच्चों के लिए एक पाठशाला चलाई हुई है।  पाठशाला का संचालन कर रहे भूपेंद्र यादव ने बताया कि आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में गरीब-मजदूरों के बच्चे पहुंचते हैं।

इनको प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उन्होंने अपने साथियों के साथ सावित्रीबाई फुले के नाम से एक पाठशाला का संचालन शुरू किया। भूपेंद्र ने बताया कि यहां आने वाले बच्चों का पहले पंजीकरण करते हैं। बच्चों को रोजाना दो पालियों में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा बच्चों को निशुल्क पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। 



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Author: riteshkucc01

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