कैलाश सत्यार्थी की पुस्तक में विचार की अमीरी के सूत्र छिपे हैं: रामबहादुर राय


कैलाश सत्यार्थी की किताब पर परिचर्चा करते गणमान्य
– फोटो : Amar Ujala

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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की पुस्तक ‘कोविड-19 सभ्यता का संकट और समाधान’ पर एक परिचर्चा का आयोजन किया। परिचर्चा के दौरान डॉ सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि कैलाश जी बिल्कुल सही कहते हैं कि लंबे समय तक चलने वाला कोरोना संकट किसी जंतु या वायरस के द्वारा फैलाया संकट नहीं है, बल्कि यह सभ्यता का संकट है। वहीं पद्मश्री रामबहादुर राय ने कहा कि यह पुस्तक भारत की नेतृत्वकारी भूमिका का प्रमाण है।

डॉ सच्चिदानंद जोशी ने प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘कोविड-19 सभ्यता का संकट और समाधान’ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘कैलाश सत्यार्थी ने पूरे विश्व में बाल मजदूरों के अधिकारों के प्रति चेतना जगाने का काम किया है। उनकी कविताएं आपको रोमांच से भर देती हैं। आपके रोएं खड़े कर देती हैं। कैलाश जी बिल्कुल सही कहते हैं कि लंबे समय तक चलने वाला कोरोना संकट किसी जंतु या वायरस के द्वारा फैलाया संकट नहीं है, बल्कि यह सभ्यता का संकट है।’

सुप्रसिद्ध पत्रकार पद्मश्री रामबहादुर राय ने कहा, ‘इस पुस्तक से नई सभ्यता का शास्त्र रचा जा सकता है। यह पुस्तक अपने आप में मौलिक है। यह पुस्तक भारत की नेतृत्वकारी भूमिका का भी प्रमाण है। कैलाश सत्यार्थी की पहचान है कि वे सत्य के खोजी हैं जो इस पुस्तक में भी दिखती है। इस पुस्तक में विचार की अमीरी के सूत्र छिपे हैं, जिसे लोगों को यदि समझाया जाए तो पुस्तक की सार्थकता बढ़ेगी।’

राज्यसभा सांसद श्रीमती सोनल मानसिंह ने कहा कि कैलाश जी की पुस्तक को छापकर प्रभात प्रकाशन ने अपने प्रकाशन में एक रत्नमणि जोड़ने का काम किया है। यह पुस्तक गागर में सागर है। कोरोना काल के दौरान अपने घरों के अंदर घुट-घुटकर रहने को मजबूर लोगों में जो एक मानसिक विकृति आ गई है, उसके प्रभाव की कैलाश जी अपनी पुस्तक में सम्यक व्याख्या करते हैं और साथ ही समाधान भी पेश करते हैं।

परिचर्चा के दौरान कैलाश सत्यार्थी ने कहा, ‘करुणा सकारात्मक, रचनात्मक सभ्यता के निर्माण का आधार है। करुणा में एक गतिशीलता है। एक साहस है और उसमें एक नेतृत्वकारी क्षमता भी है। करुणा एक ऐसी अग्नि है जो हमें बेहतर बनाती है। जब हम दूसरे को देखते हैं और उसके प्रति हमारे मन में एक जुड़ाव का भाव पैदा होता है, तो वह सहानुभूति है। महामारी से पीड़ित वर्तमान में दुनिया की जो स्थिति हो गई है, उससे निजात करुणा ही दिला सकती है। इसीलिए करुणा का वैश्वीकरण समय की जरूरत है।’

परिचर्चा की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध पत्रकार पद्मश्री रामबहादुर राय ने की। जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में जानीमानी सांस्कृतिक दार्शनिक और राज्यसभा की सांसद श्रीमती सोनल मानसिंह की मौजूदगी रही। स्वागत वक्तव्य लेखक, कलाविद एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी का रहा। अन्य वक्ताओं में सुप्रसिद्ध लेखक एवं पूर्व राजनयिक श्री पवन के वर्मा, सुप्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एवं राज्यसभा सांसद श्री सुधांशु त्रिवेदी, सुप्रसिद्ध गीतकार एवं अध्यक्ष सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन श्री प्रसून जोशी और मशहूर लेखक एवं नेहरू सेंटर, लंदन के निदेशक श्री अमीश त्रिपाठी शामिल रहे। कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक कैलाश सत्यार्थी भी मौजूद रहे।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की पुस्तक ‘कोविड-19 सभ्यता का संकट और समाधान’ पर एक परिचर्चा का आयोजन किया। परिचर्चा के दौरान डॉ सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि कैलाश जी बिल्कुल सही कहते हैं कि लंबे समय तक चलने वाला कोरोना संकट किसी जंतु या वायरस के द्वारा फैलाया संकट नहीं है, बल्कि यह सभ्यता का संकट है। वहीं पद्मश्री रामबहादुर राय ने कहा कि यह पुस्तक भारत की नेतृत्वकारी भूमिका का प्रमाण है।

डॉ सच्चिदानंद जोशी ने प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘कोविड-19 सभ्यता का संकट और समाधान’ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘कैलाश सत्यार्थी ने पूरे विश्व में बाल मजदूरों के अधिकारों के प्रति चेतना जगाने का काम किया है। उनकी कविताएं आपको रोमांच से भर देती हैं। आपके रोएं खड़े कर देती हैं। कैलाश जी बिल्कुल सही कहते हैं कि लंबे समय तक चलने वाला कोरोना संकट किसी जंतु या वायरस के द्वारा फैलाया संकट नहीं है, बल्कि यह सभ्यता का संकट है।’

सुप्रसिद्ध पत्रकार पद्मश्री रामबहादुर राय ने कहा, ‘इस पुस्तक से नई सभ्यता का शास्त्र रचा जा सकता है। यह पुस्तक अपने आप में मौलिक है। यह पुस्तक भारत की नेतृत्वकारी भूमिका का भी प्रमाण है। कैलाश सत्यार्थी की पहचान है कि वे सत्य के खोजी हैं जो इस पुस्तक में भी दिखती है। इस पुस्तक में विचार की अमीरी के सूत्र छिपे हैं, जिसे लोगों को यदि समझाया जाए तो पुस्तक की सार्थकता बढ़ेगी।’

राज्यसभा सांसद श्रीमती सोनल मानसिंह ने कहा कि कैलाश जी की पुस्तक को छापकर प्रभात प्रकाशन ने अपने प्रकाशन में एक रत्नमणि जोड़ने का काम किया है। यह पुस्तक गागर में सागर है। कोरोना काल के दौरान अपने घरों के अंदर घुट-घुटकर रहने को मजबूर लोगों में जो एक मानसिक विकृति आ गई है, उसके प्रभाव की कैलाश जी अपनी पुस्तक में सम्यक व्याख्या करते हैं और साथ ही समाधान भी पेश करते हैं।

परिचर्चा के दौरान कैलाश सत्यार्थी ने कहा, ‘करुणा सकारात्मक, रचनात्मक सभ्यता के निर्माण का आधार है। करुणा में एक गतिशीलता है। एक साहस है और उसमें एक नेतृत्वकारी क्षमता भी है। करुणा एक ऐसी अग्नि है जो हमें बेहतर बनाती है। जब हम दूसरे को देखते हैं और उसके प्रति हमारे मन में एक जुड़ाव का भाव पैदा होता है, तो वह सहानुभूति है। महामारी से पीड़ित वर्तमान में दुनिया की जो स्थिति हो गई है, उससे निजात करुणा ही दिला सकती है। इसीलिए करुणा का वैश्वीकरण समय की जरूरत है।’

परिचर्चा की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध पत्रकार पद्मश्री रामबहादुर राय ने की। जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में जानीमानी सांस्कृतिक दार्शनिक और राज्यसभा की सांसद श्रीमती सोनल मानसिंह की मौजूदगी रही। स्वागत वक्तव्य लेखक, कलाविद एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी का रहा। अन्य वक्ताओं में सुप्रसिद्ध लेखक एवं पूर्व राजनयिक श्री पवन के वर्मा, सुप्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एवं राज्यसभा सांसद श्री सुधांशु त्रिवेदी, सुप्रसिद्ध गीतकार एवं अध्यक्ष सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन श्री प्रसून जोशी और मशहूर लेखक एवं नेहरू सेंटर, लंदन के निदेशक श्री अमीश त्रिपाठी शामिल रहे। कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक कैलाश सत्यार्थी भी मौजूद रहे।



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Author: riteshkucc01

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